Suman Kumari

  • हाथ में रेखा
    रेखा में जीवन
    जीवनt रेखा हाथ में।
    पर है जीवन
    और मरन
    एक ईश्वर के हाथ में।।
    हाथ मिलाने से पहले
    सोच लो एक बार।
    वायरस और बैक्टीरिया
    है बीमारी के आधार।।
    गर मिलाया
    फिर सेनिटाइज करो। […]

    • हाथ में रेखा
      रेखा में जीवन
      जीवन रेखा हाथ में।
      पर है जीवन
      और मरन
      एक ईश्वर के हाथ में….

      महामारी है कोरोना
      अपना खुद बचाव करो।
      हाथ में है जीवन तेरे
      अच्छा नित बरताव करो।।
      ______ कवि विनय चंद शास्त्री जी की अति उत्तम रचना, इसमें उन्होंने बताया है बेशक जीवन मरण ईश्वर के हाथ में है, लेकिन आजकल के कोरोना के माहौल में जीवन मरण कुछ हद तक अपने हाथ में भी है। कोरोना महामारी से बचाव के लिए उचित संदेश देती हुई अति उत्तम रचना , उम्दा लेखन।

    • महामारी है कोरोना
      अपना खुद बचाव करो।
      हाथ में है जीवन तेरे
      अच्छा नित बरताव करो।।
      — बहुत सुंदर पंक्तियाँ और लाजवाब कविता है। वाह वाह

    • बहुत सुंदर कविता

    • बहुत खूब

    • हाथ में रेखा
      रेखा में जीवन
      जीवनt रेखा हाथ में।
      पर है जीवन
      और मरन
      एक ईश्वर के हाथ में।।
      हाथ मिलाने से पहले
      सोच लो एक बार।
      वायरस और बैक्टीरिया
      है बीमारी के आधार।।

      बहुत ही सुंदर पंक्तियां

  • दिखा लो तुम भी दम,
    कम नहीं हैं हम।
    अपने देश के लिए,
    हम भी जाॅं लुटा देंगे।
    चीन, पाक जैसे बैरी को,
    पल में ही मिटा देंगे।
    चीन ने कोरोना फैलाया,
    पाक ने आतंक बढ़ाया।
    भारत के जवाॅं सैनिक,
    कम नहीं हैं किसी […]

  • कविता- खबर ले ले
    ————————-
    कोई तो हो खबर ले ले,
    कहां थे अब तक-
    यह सवाल पूछ ले,
    वक्त का हिसाब मांगे,
    साथ रहने का साथ मांगे,
    हो फोन जब व्यस्त मेरा,
    फोन पर ही दो बात कह दे,
    वक्त गु […]

  • समन्दर की गहराइयों में
    उतर के देखो तो एक बार।
    बहुत से राज खुल जाएंगे
    जो छुपे हुए थे हरेक बार।।
    मोती भी हैं सीप भी प्यारे
    रत्नों का है बड़ा खजाना।
    उतरोगे तो पाओगे तुम
    गहराई से नहीं डर जाना।।
    गहराई ह […]

  • बिल्ली की पूंछ
    ——————-
    रुकी कलम अगर
    भूत भविष्य बिखर जाएगा
    रखो न हाथ गिरवी,
    जमाना भूखे बच्चों को-
    व्रती बता जाएगा,
    जिन्हें शुद्ध पानी नसीब नहीं,
    उन्हें बोतल का-
    पानी पीने की सलाह दे जाएगा, […]

  • ज़रा सी बारिश के छींटों से,
    क्यारी में खिल गए गुलाब।
    सुहाना सा हुआ मौसम,
    बहने लगी शीतल पवन।
    मयूर नृत्य कर उठे बाग में,
    कोयल गाती मीठे राग।
    इन्द्रधनुष भी दिखे गगन में,
    मीठे गीत बजे हैं मन में।
    “गीता”का ह […]

    • गीता जी आपका हृदय ही नहीं हमारा भी मन हर्षिता हो उठा है
      अत्यंत सुंदर रचना

    • अतिसुंदर भाव पूर्ण रचना

    • गीता”का हृदय हुआ है हर्षित,
      प्रज्ज्वलित हो उठे चिराग॥
      **
      अनुप्रास अलंकार से सजी हुई बहुत सुंदर कविता है गीता जी आपकी

    • ज़रा सी बारिश के छींटों से,
      क्यारी में खिल गए गुलाब।
      सुहाना सा हुआ मौसम,
      बहने लगी शीतल पवन।
      —- कवि गीता जी की बहुत ही शानदार रचना। वाह

    • सचमुच गीता जी इतना सुंदर प्रकृति वर्णन पढ़कर मन रोमांचित हो उठा

    • आपकी लेखनी उच्चस्तरीय है, आप एक श्रेष्ठ कवि हैं।

      • सुंदर सराहना हेतु हार्दिक धन्यवाद कमला जी बहुत-बहुत आभार आपकी सराहना से मनोबल प्राप्त होता है

  • चिकित्सक डटे हुए हर बार,
    बीमारों का करें उद्धार।
    लगाकर दवा ज़ख़्म पर,
    कर रहे हैं उपचार।
    शत्-शत् नमन् है चिकित्सकों को,
    उनके सेवा भाव को प्रणाम।
    गंभीर व्याधि के मौसम में भी,
    एक सैनिक की तरह ड […]

  • सच्चा साथी वही है,
    जो दुःख में भी साथ दे।
    हृदय में हो जब संताप,
    हाथ बढ़ाकर हाथ दे।
    अमावस सी काली रातों को,
    जो बना दे चाॅंद रात।
    ह्रदय में जब शूल चुभें,
    वो फूल खिला दे मन..
    “मैं हूँ ना” […]

    • अति सुंदर रचना

    • बहुत खूब

    • अमावस सी काली रातों को,
      जो बना दे चाॅंद रात।
      **
      वाह बहुत खूब ,गीता जी की बहुत सुंदर कविता

    • ह्रदय में जब शूल चुभें,
      वो फूल खिला दे मन..
      “मैं हूँ ना” कहकर,
      मिटा दे सारे ग़म।
      — वाह अतिसुन्दर रचना। बहुत खूब

      • उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी अभिवादन सर

    • सच्चा साथी वही है,
      जो दुःख में भी साथ दे।
      हृदय में हो जब संताप,
      हाथ बढ़ाकर हाथ दे।
      अमावस सी काली रातों को,
      जो बना दे चाॅंद रात।

      सच्ची मित्रता को परिभाषित करती रचना

  • कविता- भारत रत्न तथा नोबेल
    ——————————————
    मेरे बाद ख्वाब
    सजाएगा कौन,
    बुझते हुए दिए को
    जलाएगा कौन,
    सपना था ,
    भारत रत्न नोबेल का,
    अब इसे जीतकर लाएगा कौन,
    अगर मेर […]

    • वाह वाह क्या बात है
      अतिसुंदर रचना

    • बहुत खूब अति सुंदर रचना

    • मेरे बाद ख्वाब
      सजाएगा कौन,
      बुझते हुए दिए को
      जलाएगा कौन,
      सपना था ,
      भारत रत्न नोबेल का,
      अब इसे जीतकर लाएगा कौन,

      अत्यंत सुंदर लेखनी है आपकी

  • नाम….
    यही तो है हमारी पहचान,
    हमारे व्यक्तित्व की शान।
    नाम केवल एक नाम ही नहीं है,
    एक विशेष शख्सियत है…
    जिसे जानते हैं हम उस “नाम” से,
    उसके आचरण से
    और उसके व्यवहार से।
    तो दोस्तों…
    कभी अपन […]

  • कविता- फोन चोरी हुआ
    ——————————–
    सुनो भाई,
    कब तक गुजारोगे,
    जीवन में चोरी करके,
    मेरा या गैरों का-
    फोन चुरा करके,
    इस काम से क्या
    जीवन सुधर जाएगा,
    चोरी करके – […]

  • कोरोना की फिर तेज़ हुई रफ्तार है,
    इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
    देश में कोरोना का विस्फोट,
    फ़िर से हो चुका है
    अब हम कितने तैयार हैं।
    वैकसीन भी आई है,
    कितनों ने लगवाई है??
    मास्क लगाकर घूमना है,
    वर […]

  • आलोचना का जिम्मा
    फिर से उठा लिया तूने
    चल अच्छा है ये काम
    संभाल लिया तूने
    साहित्य के मंच पर
    दूरियां अच्छी नहीं लगती
    जैसे-तैसे दिल को मना लिया तूने…

  • सुधा बरसे सदा वाणी से,
    ह्रदय में भी ना कोई गरल हो।
    कभी किसी का,
    दिल ना दुखाऊँ मैं
    मेरी वाणी मीठी और सरल हो।
    मदद कर सकूॅं पीड़ितों की,
    ऐसा भाव रहे सदा मन में
    हृदय की भावनाएं सदा तरल हों। […]

    • बहुत सुंदर गीता जी, आपकी रचनाएं उच्च स्तर की हैं। इनमें न किसी को ठेस देने की भावना है, न किसी का दिल दुखाने की भावना है। एक साहित्यकार का जैसा व्यवहार होना चाहिए वह सब आपके भीतर है। आपके मन में न कोई गांठ है न बेवजह ऐसा वैसा लिखने की प्रवृति है। बल्कि हृदय के सरल भाव हैं। वाह

      • इतनी सुंदर समीक्षा और इतनी सुंदर सराहना हेतु आपका ह्रदय तल से आभार चंद्रा जी🙏

    • वाह भाई वाह
      अद्भुत लेखन आपकी इस रचना ने मन को आनन्दित कर दिया

      • सुंदर समीक्षा हेतु धन्यवाद विवेक भाई

    • अदभुत भावाभिव्यक्ति
      सुंदर रचना प्रखर पल्लवित लेखन

      • आपकी दी हुई इस सुंदर और प्रेरक समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद भाई जी सादर अभिवादन 🙏

    • बिल्कुल सही
      अति सुंदर भाव

  • ये दिल…
    वही क्यूॅं माॅंगता है!!
    जो अक्सर मिल ना पाए,
    लब वही क्यूॅं कहना चाहें!!
    जो अक्सर हम कह ना पाएं।
    काश!!
    दिल ही न होता,
    तो ये दर्द भी ना होता।
    हम दर्द न मिले कोई दर्द में,
    जान भी माॅंगें […]

  • मेरे अश्क जो गिरे धरा पर,
    वो चमकीले ओस बने।
    मुस्कुरा दिए वो दूर से देखकर,
    मैं मोम सी पिघलती रही..
    वो पाहन सम ठोस बने।
    मेरी सिसकियों में उनको,
    ठॅंडी पवन का एहसास हुआ
    मेरे गर्म आंसू..
    मेरी देह पिघ […]

  • मायूसियों ने मेरा,
    पता ढूॅंढ लिया है
    लगता है अब हम को,
    बदलना पड़े ठिकाना ।
    मायूसियाॅं देने लगी हैं दर्द ज्यादा,
    अब यहाॅं रहने का नहीं है कोई फ़ायदा।
    सामान अपना उठाकर,
    हम रुख़सत […]

  • माफी एक हुनर है,
    सत्य अहिंसा का पूरक है,
    राम कृष्ण ईशा को प्यारा है,
    बच सकते है शान तुम्हारे
    बिगड़े काम बने तुम्हारे
    झुक कर देखो एक बार,
    बागों में फूल खिले रोज तुम्हारे,
    दो गांव की इज्जत आज बचे
    सभ्यता […]

  • साहित्य है सबके लिए,
    यही समाज का है दर्शन।
    रुचिकर भी हो पढ़ने में,
    हो उस काल का दर्पण।
    जीवन की समस्याओं पर भी करे विचार,
    ऐसा हो साहित्यकार।
    कठिनाइयों पर विजय पाने की,
    नैराश्य में आशा लाने की […]

  • साहित्य है केवल वह रचना,
    जिससे प्रकट हो समाज की सच्चाइयाॅं।
    भाषा और शिल्प भी उत्तम हो,
    दिलो-दिमाग पर असर डालने का हो गुण
    समाज का भला हो, हो यही भावना ।
    प्रस्तुत करे जीवन की सच्चाई,
    प्रभावित कर […]

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