Tej Pratap Narayan

  • जो समाज में समता का समर्थक है
    जो देश का विकास चाहता है
    जो अंधकार की जगह प्रकाश चाहता है
    जो अंध विश्वास ,पाखंड ,भेदभाव हटाना चाहता है
    जो सामाजिक दीवारों को तोड़ना चाहता है …
    जो धर्म ,संप्रदाय और जाति […]

  • यह जापान है

    ——————-

    यह हिंदुस्तान नहीं ,बाबू …
    जापान है
    जहाँ गुरु ग्राम और
    घंटा घड़ियाल नहीं
    विज्ञान है

    यहाँ आप आज़ाद है
    अपने विकास के लिए
    उन्नति के प्रयास के लिए

    यहाँ नम्रता है
    फालतू का […]

  • वो कनेक्ट होना चाहता है
    पूरी दुनिया से
    वर्चुअली
    लेकिंन अपनी रियल दुनिया
    के लिए …
    उसको फुरसत नही

    फेस बुक पर
    5000 मित्र है
    और 10000 फॉलोवर
    ट्विटर में ट्रेंड करता है वह
    और इंस्टाग्राम में हिट है
    पर उसका द […]

  • अन्याय
    इस लिए नही हैं कि
    वह बहुत शक्तिशाली है
    और उसका पलड़ा भारी है
    वह हर जगह छाया है…
    उसने अपना घर बसाया है

    अन्याय इसलिए है
    क्यों कि
    हम अपनी आवाज़ उठा नही पाते
    अपनी बात पहुंचा नही पाते
    उसकी नीव हिला नही […]

  • ज़िंदगी में ऐसे काज करो
    कि ज़िंदगी पे थोड़ा नाज़ करो
    ज़िंदगी को रिलैक्स करो
    ज़िंदगी का हेड मसाज़ करो
    फिर …
    ज़िंदगी से कुछ सवाल करो

    ज़िंदगी पे यक़ीन करो
    ज़िंदगी को न ग़मगीन करो
    माँ की आँखों का तारा बन कर
    अँधेरे में स […]

  • जब कोई धर्म साज़िशों का पुलिंदा बन जाता है
    तब धर्म केवल धंधा बन जाता है

    शोषण और लूटपाट ही दलालों का एजेंडा होता है
    इंसानियत मर जाती है और खोखला धर्म ही केवल ज़िंदा होता है

    देवी पूजी जाती हैं और स्त्रि […]

  • एक फूल के लिए कितना मुश्किल होता है
    कि
    वह अपनी पंखुड़ियों को
    तूफानों से बचा ले
    छिटकने न दें …
    पराग कणों को बिखरने न दे

    एक पेंड के लिए बड़ा कठिन होता है
    अपने अस्तित्व को बनाए रखना
    अपनी जड़ों म […]

  • मैं और तुम साथ साथ बड़े हुए
    दोनों साथ- साथ
    अपने पैरों पर खड़े हुए
    तुम्हारी शाखाएं बढ़ने लगीं
    पत्तियां बनने लगीं
    दोनों एक साथ
    जीवन में आगे बढ़े
    अपने -अपने कर्मों के साथ्
    तुमने जीवन को हवा दी
    साँसे दी जी […]

  • अपनी छटपटाहटों को ही देता हूँ
    मन के जज़्बातों को डायरी में उतार लेता हूँ

    ये छटपटाहटें सिर्फ मेरी अपनी ही नहीं
    औरों की छटपटाहटों को भी उधार लेता हूँ

    अंदर और बाहर की लड़ाईयों के लिए
    कलम को हथियार बना लेता हूँ ।

    तेज

  • ये बात अफवाह सी लगती है
    कि ,सच्चा प्रेम कहीं मिला
    भीड़ में कहीं इंसान दिखा

    यह बात अफवाह सी लगती है
    कहीं ज्ञान का दीपक जला
    किसी के हिस्से का अँधेरा मिटा
    कुछ ज़िन्दगियों को बसेरा मिला
    किसी की ज़िन्दगी में स […]

  • शाम का समय
    सूरज विश्राम करने को तत्पर
    दिन पर तपने के बाद
    सारी दुनिया तकने के बाद
    अपूर्ण ख्वहिशे दिन भर की
    मन में रखे हुए
    ये सोंच कर
    कि चलों रात में
    चन्द्रमा की शीतल छाया होगी
    पर ये क्या
    ये तो अँधेरी […]

  • हरी जाली से देखने पर सूखे पेंड भी हरे लगते हैं
    नज़र का फ़ेर हो जाए तो पिलपिले भी खरे लगते है ।
    तेज

  • एक युद्ध में कितने युद्ध छिपे होते हैं
    हर बात में कितने किंतु छिपे होते हैं

    नींव का पत्थर दिखाई नहीं पड़ता अक्सर
    रेल चलती है पर पटरियों के जैसे सिरे दबे होते हैं

    जिसने क़त्ल किया उसका पता नहीं चलता
    जब औरो […]

  • मोहब्बत की नज़्मों को फिर से गाया जाए
    अपनी आज़ादी को थोड़ा और बढ़ाया जाए

    हक़ मिला नहीं बेआवाज़ों को आज तक
    हक़ लेना है तो अब आवाज़ उठाया जाए

    किसी इंसान को भगवान बनाने से पहले
    हर इंसान को एक इंसान बनाया जाए

    कैसे […]

  • Poetry
    ————

    Poetry is
    Neither frustration
    Nor speculation

    Poetry creates a situation
    where we get solution

    Poetry is an inspiration
    To live and let live

    Poetry is like meditation
    Where […]

  • पवित्र नारी ही क्यों हो
    पुरुष की पवित्रता का क्या मोल नहीं ?
    पतिव्रता नारी ही क्यों
    पुरुष के पत्नी व्रत का क्या कोई तोल नहीं ?

    सारी सीमाऐं
    सारी गरिमाएं
    मर्यादाएं
    नारियों तक ही सीमित हैं
    प […]

  • सिर्फ संकेतो और प्रतीकों से कुछ न होगा
    सिर्फ परंपरागत तरीक़ों से कुछ न होगा
    सिर्फ नारे बाज़ी से भी कुछ न होगा
    सिर्फ आज़ादी से भी कुछ न होगा
    सिर्फ चेहरे नहीं
    चरित्र बदलना होगा
    सिर्फ शतरंज के […]

  • सुपर डेंस फेज में जब
    कण होते हैं
    तब बिस्फोट के कई कारण होते हैं
    बिग बैंग भी तभी होता है
    और अणु, परमाणु ,न्यूट्रॉन ,इलेक्ट्रान
    और प्रोटोन सभी छितरा जाते हैं

    अणुओं का स्वतंत्र अस्तित्व है
    क्यों कि […]

  • चलो थोड़ा जादू करते हैं
    जनता के दिल को छूती हुई एक कविता लिखते हैं

    झोपड़ियों में पल रही भूख से टकराते हैं
    छोटे छोटे मासूमों की चीख
    और डूबती हुई ज़िंदगियों को
    कविता का विषय बनाते हैं

    लड़ते हैं
    अफगानि […]

  • ज़्यादा दिमाग़ न आज लगाया जाए
    सिर्फ मन में ज़मी मैल को बहाया जाए

    धर्म और परंपरा की ऐसी भी न कट्टरता हो
    कि होलिका की तरह औरत को जलाया जाए

    सौहार्द और प्यार का रंग भरकर मन में
    जो रूठे हैं आज उनको मनाया ज […]

  • Load More