इश्कबाज

इश्कबाज पसंद है मुझे,

चाहे इश्क़ में ना पड़ा हूँ कभी,

अल्फाज बह जाते है आशिकी देखकर

चाहे आशिक़ ना बना हूँ कभी

#पंकज

Previous Poem
Next Poem

लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

7 Comments

  1. JYOTI BHARTI - March 23, 2017, 7:52 pm

    जनाब इश्क़ में पड़ कर देखिये,
    आप भी कभी बहक कर देखिए,
    इस नशे और मज़े की बात ही कुछ और हैं।।।।

    • Sridhar - March 24, 2017, 7:58 am

      कहते है इश्क गुमराह करता है
      मगर हमें तो राह ही इश्क ने दिखाई

  2. Pankaj Garg - March 23, 2017, 8:16 pm

    Hahahaha…
    क्या ह इश्क़ जिसके कहर से डरता है जमाना
    कम्बख्त मेरे सब्र के टुकड़ों पे पला है
    और जनाब कभी खोल के देखो पन्ने इश्क़ के
    इसके नशे में हर आशिक़ जला है ।।?

    • JYOTI BHARTI - March 23, 2017, 8:21 pm

      जलना तो हर परवाने की आरज़ू होती है शमा के आगोश में,
      फिर आप क्यों इश्क़ करने से कतरा रहे है,
      आँखें मूँद कर पड़ जाये इश्क़ में
      या तो आप बदल जायेंगे या फिर आपका लहज़ा।।।

      • Urvashi Singh - March 23, 2017, 8:47 pm

        veryyyy niceee

      • Pankaj Garg - March 23, 2017, 9:00 pm

        Shukriya

      • Pankaj Garg - March 23, 2017, 9:04 pm

        परवाने की क्या बात करती हो आप,
        वो तो रोशनी से भी इश्क़ करके जलता रहता है
        सुनो, इश्क़ में जीते जी मर जाना पड़ता है,
        लेकिन मर कर भी जुर्माना चलता रहता है ??

Leave a Reply