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बादलों बरसने को आँखें तरस गई है
तुम तो न बरसे पर आँखें बरस गई है

राजेश “अरमान ”

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हर निभाने के दस्तूर क़र्ज़ है मुझ पे गोया रसीद पे किया कोई दस्तखत हूँ मैं राजेश'अरमान '

1 Comment

  1. Panna - March 3, 2017, 9:35 am

    तुम्हारी राह में देखती रहती है आसमां एकटक
    ये आखें अब बस तेरी तस्वीर अटक गयी है

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