Poems

Aise kaise wo bhool paayeGi

Aise kaise wo bhool paayeGi

Aise kaise wo bhool paayeGi

Yaad meri use sataayegi

Aor madhosh mujhko rahne do

Hosh aayega yaad aayegi

Arif Jafri

ज्योति

हजारो लोग तम लेकर, निगलने दौड़ पड़ते हैं !

अगर एक ज्योति हल्की सी, कहीं दिखलाई पड़ती है

“क़दमों के निशान” #2Liner-104

ღღ__कल भी आये थे “साहब”, घर तक उनके क़दमों के निशान;
.
वो मुझसे मिलते तो नहीं लेकिन, मिलने आते ज़रूर हैं!!….‪#‎अक्स

मैं अपनी मर्जी से नहीं आया था

मैं अपनी मर्जी से नहीं आया था

बाबा साहेब की १२५ जंयती पर शुभकामनाएं

मैं अपनी मर्जी से नहीं आया था
न उनकी मर्जी से जाऊंगा।
युग-युग तक सांसे चलेंगी अब,
मैं विचारों में जिवित रह जाऊंगा।
गर आ जाए मृत्यु सम्मुख मेरे
मैं तनिक नहीं घबराऊंगा।
किताबों की गठरी खोल,
यमदुतों को पढ़ाऊंगा।
ओमप्रकाश चंदेल”अवसर”
रानीतराई पाटन दुर्ग छत्तीसगढ़
7693919758


 

उसके कजरारे नैनों में….

कल दिल ने फिर गोते मारे, उसके कजरारे नैनों में

हम अपना सब कुछ फिर हारे, उसके कजरारे नैनों में

उसके नैनों में उतरे जब, तब जा के हमने जाना ये

हैं छुपे हुए कितने तारे, उसके कजरारे नैनों में

ना जाने कैसा जादू था उन काली-काली अँखियों में

कि भूल आया मैं गम सारे, उसके कजरारे नैनों में

जब तक वो मेरे साथ रहे, पल कब गुजरे, कुछ याद नहीं

थे रुके समय के भी धारें, उसके कजरारे नैनों में

कल से मेरा ये दिल मुझसे बस ये ही पूछे जाता है

कब जाओगे फिर से प्यारे, उसके कजरारे नैनों में

@आशुतोष चौधरी @@

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