Poems

अधूरे ख्वाब

अधूरे ख्वाब

अधूरे ख्वाब

 

थे ख्वाब जो चुन-बुन सजाए हमनें

पा मुझको तन्हा , बहुत तड़पाते हैं .

 

कारवाँ तेरी यादों का लंबा है ,

या मेरे ग़मों की रात गहरी है ,

दशकों बीते, ना क्योँ यह मिटते हैं .

 

रातों के गहन – प्रगाढ़ अंधेरों में ,

गहरी क़ब्र खोद रोज़ दफ्नाता हूँ ,

ना-मुराद लौट ज़िंदा वापस आते हैं ,

कह्ते हैं,अकेले मिटना गँवारा नहीँ ,

यूई, हैं चाहे हम अधूरे ख्वाब तेरे ,

साथ रसमें-ए-वफ़ा पूरी निभाएँगे ,

संग – संग तेरे ही कब्र में जाएँगे .

                               …… यूई

 

 

ए ज़िन्दगी ……

ए ज़िन्दगी ……

ए ज़िन्दगी 

 

कैसे शिकायत करूँ तुझसे

खुदा की बंदगी पाई तुझसे

बस तुझमें सिमटा रह्ता हूँ

हर पल तेरे ही संग रहता हूँ

 

कभी टेडी मेडी लकीरों में

कभी रंग भर उन्ही लकीरों में

कभी अल्फाज़ बन तकरीरो में

कभी जज़्बात बन फकीरों में

 

बस तुझमें सिमटा रह्ता हूँ

हर पल तेरे ही संग रहता हूँ

कभी अकेले में, कभी मेले में

मैं तुझसे मिलता रहता हूँ

 

 

तेरा हर रंग आंखों में बसाया मैंने

उनको आँखों से दिल में उतारा मैंने

उन रंगो में अपना खून मिलाया मैंने

ऐसे ख़ुदी को तेरे रंग में रंगाया मैंने

 

तेरी खूबसूरती में ख़ुद को भिगोया मैंने

तेरी मस्तियों में कूद ख़ुद को तेराया मैंने

तेरी गहराईयों में उतर इश्क़ रचाया मैंने

अ‍पनी रूह को तेरे इश्क़ में नहलाया मैंने

 

तेरे पलों को ज़ज़्बातो से सँजोया मैंने

उन ज़ज़्बातो को दिल से पिरोया मैंने

तेरी आग में तप ख़ुद को बनाया मैंने

बना ख़ुद को तुझे माथे पे सजाया मैंने

 

बड़ी शिद्दत से यह इश्क रचाया मैंने

सूख दुःख में एक सा साथ निभाया मैंने

जब अपने मन को समुंदर बनाया मैंने

तब तेरी कहानी को मुकमल बनाया मैंने

 

यूई तो कभसे तुझमें सिमटा बैठा है

वो तन मन तेरे रंग में रंगा बैठा है

अब तुम भी युई में सिमटी रहती हो

हर पल उसके ही रंग में रँगती हो

 

                                   …… यूई

मुझे याद रहा, तुम भूल गए ……

मुझे याद रहा, तुम भूल गए ……

मुझे याद रहा,  तुम भूल गए 

कहने को दो दिल चार आँखे हम,

थी एक रूह में बस्ती जान हमारी

कहने को दिया और बाती हम,

थी बस लौ ही पहचान हमारी

 

मदमस्त हवाओं के झोंकों से,

थे लहराते गाते जज़्बात हमारे,

उतार सजाया आस्मानो में,

थे सपने जो जनमें पलकों तले हमारे

 

कुछ यूँ खाईं थी क़समें हमने,

हर हाल में प्यार निभाएँगे

मिल पाए तो ज़िन्दा हैं,

ना मिल पाए तो यादों में निभाएँगे

 

हुए गर तन से ज़ुदा तो क्या,

ज़ुदा ना मन से कभी हो पाएँगे

गर साँसें छोड़ जाएँ साथ तो क्या,

जन्मो का साथ निभाएँगे

 

बरसों से हम उसी मोड़ पे अटके,

राह जहां से तुम बदल गए

मोहब्बत को नए मायने दे कर,

उन मायनों को ही तुम बदल गए

 

उठा फर्श से अर्श पे बिठा हमको,

अपना अर्श ही तुम बदल गए

वफाएँ लेती थी तुमसे सबक वफ़ा का,

अपना सबक ही तुम बदल गए

 

जब मुझको सब यह याद रहा,

कैसे तुम सब भूल गए

मर के भी यूई भूल ना पाया,

तुम जिंदा रह के भूल गए                                                                                                                                                                                     …… यूई

इशक है – 5

इशक है

तेरा ग़ुरबत के वक्त को ,

मेरी रज़ा मान हाथ जोड़ जाना

इशक है

तेरा अपनी हर सफलता को ,

मेरी दुआ कह जाना

इशक है

इशक है – 4

इशक है

तेरा मेरे हर रुप की ,

बन्दगी में झुक जाना

इशक है                                   

तेरा मुझे पाने के इंतज़ार में ,

नाचते गाते मस्त रहना

इशक है

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