Poems

तुमने मेरे बाग़ के फूलों को

तुमने मेरे बाग़ के फूलों को पत्थर कर दिया,
मैं तेरी गली के पत्थरों को फूल करके आया हूँ
जाना मुझे तेरी गली ,आना तुझे मेरे बाग़ों में
इस आने जाने को कितना माकूल करके आया हूँ
राजेश’अरमान’

वादियों में गूंजती आवाज़

वादियों में गूंजती आवाज़ लौट सकती है
घटाओं में छुपी बिजलियाँ कौंध सकती है
ना ले मेरी खामोशियों का इम्तेहान इस कदर,
मेरी ख़ामोशी तेरे लफ़्ज़ों को रौंद सकती है
राजेश’अरमान’

तुम आसमाँ मैं ज़मीं ही सही

तुम आसमाँ मैं ज़मीं ही सही
तुम हो आंसूं मैं नमीं ही सही
यूँ पलट के देखना तेरा बार बार
कुछ नहीं मेरी कमीं ही सही
राजेश’अरमान ‘

शोर नहीं जो दबा दिया जाऊँ

शोर नहीं जो दबा दिया जाऊँ
हर्फ़ नहीं जो मिटा दिया जाऊँ
कोई दीवार पे टंगी तस्वीर नहीं
जब चाहे जिसे हटा दिया जाऊँ
राजेश’अरमान’

जो बिकता सरे आम वो ईमान होता है

जो बिकता सरे आम वो ईमान होता है
जो जहाँ को समझे वो नादान होता है
बदलते रंग में ढल गयी सारी दुनिया
जो अधूरा रहे सदा वो ‘अरमान’ होता है
राजेश’अरमान’

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