Poems

नाज हमें है उन वीरों पर

नाज हमें है उन वीरों पर, जो मान बड़ा कर आये हैं।
दुश्मन को घुसकर के मारा, शान बड़ा कर आये हैं।I

मोदी जी अब मान गये हम, छप्पन इंची सीना है।
कुचल, मसल दो उन सब को अब, चैन जिन्होंने छीना है।I

और आस अब बड़ी वतन की, अरमान बड़ा कर आये हैं।
नाज हमें है उन वीरों पर, जो शान बड़ा कर आये हैं।I

एक मरा तो सौ मारेंगे, अब रीत यही बन जाने दो।
लहू का बदला सिर्फ लहू है, अब गीत यही बन जाने दो।I

गिन ले लाशें दुश्मन जाकर, शमसान बड़ा कर आये हैं।
नाज हमें है उन वीरों पर, जो मान बड़ा कर आये हैं।I

अब बारी उन गद्दारों की, जो घर के होकर डसते हैं।
भारत की मिट्टी का खाते, मगर उसी पर हँसते हैं।I

उनको भी चुन चुन मारेंगे, ऐलान बड़ा कर आये हैं।
नाज हमें है उन वीरों पर, जो मान बड़ा कर आये हैं

– भारतीय सेना के वीर जवानों को नमन !!

प्रस्तुति – रीता जयहिंद
?? जयहिंद ??

राम अब बनवास पर है।

कई मंथराओं का मिलन– परिहास पर है
कैकयी फिर भृमित कोप में उपवास पर है
तड़फ रहे जनता के दशरथ हाथ मल रहै
देख रहै सव कि -राम अव वनवास पर है

सीता भी अव बन जाने के लिऐ भ्रमित है
आज के रावणों के चरित्र से बह चकित है
लक्ष्मण -हनुमान के चरित्र अव खो गऐ है
हॉ- बिभीषणों की भरमार स्वार्थ सहित है

अयोध्या को आतुर कई भरत बन गऐ है
कई तो आपस में लड़कर ही बिखर गऐ है
राम से मिलने- चरण पादुका चर्चा नही है
राम राज कहते सव खजाना कुतर गऐ है

प्रस्तुति – रीता

जयहिंद

तुम आओ सिंह की सवार बन कर

तुम आओ सिंह की सवार बन कर !
माँ तुम आओ रंगो की फुहार बनकर !
माँ तुम आओ पुष्पों की बहार बनकर !

माँ तुम आओ सुहागन का श्रृंगार बनकर !
माँ तुम आओ खुशीयाँ अपार बनकर !
माँ तुम आओ रसोई में प्रसाद बनकर !

माँ तुम आओ रिश्तो में प्यार बनकर !
माँ तुम आओ बच्चो का दुलार बनकर !
माँ तुम आओ व्यापार में लाभ बनकर !

माँ तुम आओ समाज में संस्कार बनकर !
माँ तुम आओ सिर्फ तुम आओ,
क्योंकि तुम्हारे आने से ये सारे सुख
खुद ही चले आयेगें तुम्हारे दास बनकर !

~ रीता

जयहिंद

समुन्दर किनारे

हर लहर उठती है एक नयी उम्मीद लेकर
खाती ठोकर चट्टानों की,अपना सबकुछ देकर
फिरभी खिंचती चली आए, मिलने किनारे से
इन दोनों का प्यार चला है इक ज़माने से

एक अरसे से किनारा भी उसकी कदर करे
खुली बाहें और प्यार भरे दिल से सबर करे
वहीँ मिलते ही खुशियों के बुलबुले बने
और वहां बैठे प्रेमियों के भी सिलसिले चलें

कुदरत के रोमांस का ये अद्भुत अंदाज
खुद ही संगीत दे और खुद ही है साज़
जीते ये सदियों से एक दूसरे के सहारे
कुछ देर और बीठलु मैं समुन्दर किनारे

जो इन दिलों में नफरतों के बीज बोयेगा

हम भारतवासी हैं
हम सभी धर्मों का आदर करते हैं
जो भारत मां की तरफ आंखों उठायेगा
उसका सीना चीर दिया जाएगा
जो इन दिलों में नफरतों के बीज बोयेगा
वह जिंदगी भर रोयेगा
भारत मां के रखवाले हमारे वीर सैनिक हमें जान से ज्यादा प्यारे है
मां कसम एक वीर के बदले सौ – सौ
दुशमनों को मार गिराने की हम ठाने हैं
जितने भी गद्दारों तुमने पाले हैं
वह सब लगे हमारे निशाने हैं
एक वीर की जगह सौ गद्दारों को गिरायेंगे
और तिरंगे का मान बढ़ायेंगे
पाकिस्तान के गद्दारों के लहू से शोभित होगी हमारी धरती
उस लहू से तिलक करेंगे अपनी भारत मां का
तभी शहीदों की शहादत को सच्ची श्रद्धांजलि होगी
भारत माता की जय
रीता जयहिंद

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