Poems

घने अंधेरे भी बेहद जरुरी होते हैं….

घने अंधेरे भी बेहद जरुरी होते हैं…..

घने अंधेरे भी बेहद जरुरी होते हैं
बहुत से काम उजाले में नहीं होते हैं।

उडऩा चाहेंगे जो पत्ते, वे झड़ ही जायेंगे
वे आंधियों के तो मोहताज नहीं होते हैं।

कूदती-फांदती लड़की को सीढिय़ां तरसें
छत पे जब कपड़े नहीं सूख रहे होते हैं।

डूबती कश्तियों को देख कर भी हंस देंगे
बच्चे कागज से यूं ही खेल रहे होते हैं।

हादसा, जैसे सड़क पर कोई तमाशा हो
लोग बस रुक के जरा देख रहे होते हैं।

उसके जलने की सी उम्मीद लिये आंखों में
बच्चे चूल्हे के आसपास पड़े रहते हैं।

ऐसे आकर के नहीं घौंसला बना लेते
परिन्दे उड़ते में घर देख रहे होते हैं।

वो अपने जिस्म से हर रात निकल जाती है
जानवर लाश को बस नौच रहे होते हैं।
 …सतीश कसेरा

“हासिल” #2Liner-7

ღღ___हासिल-ए-इश्क़ के बारे में, सोंचता हूँ जब भी ;
.
तेरा मिलना याद आता है, तेरी बेरुखी नहीं !!………..‪#‎अक्स‬

Nice winter

Woods are dark and deep

Like my feelings and Lazy sleep.

Silent breeze blowing around my ear

Making soft noise, a little whisper.

Cloudy fog is on their way

trembling hands hardly finds their way.

I think winter is on their way.

humse kya puchte ho

Humse kya puchte ho dard

“Jnab”

Humne to bs ishq kiya..

Fir bdle me jo tha..

Use sb “dard dard” keh rhe h.

“तजुर्बा” #2Liner-6

ღღ__लोग कहते हैं, इश्क़ मत कर, आखिर इश्क़ से क्या होगा;
.
अरे कुछ हुआ तो ठीक है “साहब”, ना हुआ, तो तजुर्बा होगा !!……..‪#‎अक्स

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