Poems

साथी चल

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साथी चल कुछ कर दिखलाएँ

अमन- चैन के गीत सुनाएँ

शोषण, घुसखोरी, गद्दारी

अन्याय, अनाचार, भ्रष्टाचारी

गली-गली नफरत का जहर

द्वार-द्वार मच रहा कहर

मिलकर आओ दूर भगाएँ

साथी चल कुछ कर दिखलाएँ

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मुक्तक

मैं भूला था कभी तेरे लिए जमाने को!
मैं भूला था कभी अपने आशियाने को!
भटक रहा हूँ जबसे गम के सन्नाटों में,
हर शाम ढूँढता हूँ जामे-पैमाने को!

मुक्तककार-#महादेव'(24)

कुछ पल मेरे साथ बिताओ तो कभी…

विधा-ग़ज़ल
काफिया-ओ
रदीफ़-तो कभी
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चाहती हो मुझे अगर बताओ तो कभी
देख कर मुझको मुस्कुराओ तो कभी

यूँ ना तड़पाओ तुम इतना दिल को मेरे
हाल-ए-दिल अपना सुनाओ तो कभी

दोस्त तो है बहुत पर तुझ से ना कोई
पास बैठकर तुम बतियाओ तो कभी

गम तो बहुत है जिंदिगी में मेरे दोस्त
अपनी प्यारी बातो से हँसाओ तो कभी

अगर रूठ जाऊं किसी बात पर तेरे
तो प्यार जताकर मनाओ तो कभी

क्या रखा है इस छनभंगुर जीवन में
कुछ पल मेरे साथ बिताओ तो कभी

SHAYRI

 

ज्ञानी को होता है एकांत पसंद

लेकिन किसीसे मिलने की तलब

मूर्खता का प्रमाण तो नहीं होता

कम से कम प्यार में तो नहीं होता।

SHAYRI

क्या नाम है उसका

कौन से देश से है वो

असल मे दिल देने वाला तो

सोचता ही नहीं इन सब बातों को।

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