Poems

मुक्तक

न मैं तुलसी जैसा हूँ ,और न मैं खुसरो जैसा हूँ,
मेरी कल्पना अपनी है ,सच नहीं दुसरो जैसा हूँ ।

हम सभी एक ही ग्रन्थ के ,हाँ हर पन्नो सिमटे है,
छन्दों में जो सिमट जाऊ तो,सुंदर बहरो जैसा हूँ ।।

लालजी ठाकुर

अधूरा गीत

अधूरा गीत

तुम बिन मेरे साजन बोलो कैसे ये जज़्बात लिखूँ,
दिन मेरा कैसा बीता कैसे बीती रात लिखूँ।

मन में उलझन भारी था तो ख़त तुमको ये लिख डाला,
याद तुम्हारी दर्द लिखूँ या लम्हों की बारात लिखूँ।

#काफ़िर

जिन्दगी

एक ताज़ा ग़ज़ल के चन्द अश’आर आप हज़रात की ख़िदमत में पेश करता हूँ; गौर कीजिएगा…

चाहता था जिसे जिन्दगी की तरह,
वो रहा बेवफ़ा जिन्दगी की तरह।

हाँ मेरा प्यार था बस उसी के लिए,
जिसने लूटा मुझे था सभी की तरह।

दूर जाके मुझे आजमाता रहा,
जो ज़ेहन में बसा सादगी की तरह।

पास आया न मेरे कभी वो देखो,
मुझमें शामिल रहा तिश्नगी की तरह।

कैसे बीते सफ़र अब ये काफ़िर भला,
रूह में उतरे वो शायरी की तरह।

#काफ़िर (10/07/2016)

मुक्तक

जबसे आप मुझसे पराये हुए हैं!

दर्द-ए-सितम मुझको सताये हुए हैं!

मुझसे रूठी हैं मंजिलें मेरी,

अपनी जिन्दगी को भुलाये हुए हैं!

 

Composed By #महादेव

चिमणा चिमणीच प्रेम…!!

आनंद भरला मनी हर्षचा ?
चिवचिव करत गाणी गात… ?
झाडावरच्या फांदीवर उबदार घरट्यात ?
चोंचीत चोंच वेडे प्रेमात…!! ?

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