Poems

गजल

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कुछ दिनों से खफा-खफा सा है ।

चाँद मेरा छुपा-छुपा सा है ।।

 

कुछ तो जिन्दा है जिस्म के अंदर ;

और कुछ तो जुदा-जुदा सा है ।

 

जब से’ उतरा हूँ’ होश की तह में  ;

होश तब से हवा-हवा सा है ।

 

सादगी से बदल गयी रंगत  ;

ये असर भी नया-नया सा है ।

 

उसकी’ सांसों ने’ छू लिया था कल ;

जिस्म से रूह तक छुआ सा है ।

 

उसने’ भी आग को हवा दी थी ;

हर तरफ जो धुँआ-धुँआ सा है ।

राहुल द्विवेदी ‘स्मित’

दीये जलने दो जरा

दीये जलने दो जरा
कूछ उजाला हो जाए
वैसे तो अंधेरे की आदत है
आज कुछ अलग हो जाए
जिंदगी गुजरी है सीधी सी
आज रोकेट को कुछ टेडा कर के छोड देते है
शायद इससे किसी अंधेरे में उजाला हो जाए|

रौनक – ए – बाज़ार

ए – ख़ुदा …..

जरा तू रौनक – ए – बाज़ार देख….

 

हर इंसान के चेहरे पर …..

मुस्कराहट का कारवाँ सिलसिलेवार देख …..

 

जरा एक निगाह , फ़लक पर डाल …..

नजारा –  ए – आतिशबाज़ी बार – बार देख …..

 

Happy Diwali ……

PANKAJ ” prem “

दीपावली

सुख़ , समृद्धि और ख़ुशहाली संग ,  माँ लक्ष्मी का पूजन हो …

 

अपनों की , अपनों से , अपनेपन की बढ़ती चले मिठास ….

और दूर सभी उलझन हो …

 

जब दिखे फ़लक पर , नजारा – ए – आतिशबाज़ी …..

तो हर जन – जन का , आनंदित मन हो….

 

” सोनी परिवार की और से …

आपको और आपके सभी स्नेहजनों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें ……”

 

Pankaj Soni…..

Cracks crawling silently

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Cracks crawling silently,

Down to the heart.

spreading slowly,

Silent noise of tearing apart.

The world is on the edge of disaster.

intolerance leads to our fall!

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– Anjali

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