Poems

Rita arora jai hind

हे जीवन के दातार
मैं ठाड़ी तोहरे द्वार
लेके उम्मीदों के हार
मोरी नैया लगा दे पार
बिगड़ी बना दे इक बार
मोरा जीवन दे संवार
मैं ठाड़ी दामन पसार
मैं दुखी तुम सृजन हार
दे दो मुझको अपना प्यार
रूठा है मोसे सारा संसार
अब जीवन से तो मैं हारा
हाथ पकड़ मोहे देना सहारा
मिल जाय मुझको भी सहारा
भूल गया था मैं बेचारा
मिथ्या है ये सब संसारा
हाथ थाम लो नाथ हमारा
छोड़ कर दुनिया का नजारा
हो जाना अब प्रभु हमारा
कबहउ ना जाऊँ अब दोबारा
मैंने अपना सब कुछ वारा
कृपा करो अब बख्शनहारा
??? ?? रीता जयहिंद?? ??????????????

Rita arora jai hind

कोई लौटा दे रे मेरे बचपन के दिन
जब ना थी कोई चिंता व फिकर
वो जोर – जोर के गीतों का गाना
बारिश में जी भरकर नहाना और भीग जाना
जान बूझकर सोते रहने का बहाना
पढाई के नाम पर पेट दर्द बतलाना
स्कूल जाने पर बुखार का बहाना
रेडियो जोर – जोर के बजाना
मेहमान के जाने के बाद प्लेटें साफ करना
बार – बार गिरकर भी साईकिल चलाना
बारिश के पानी में नाव चलाना
छत पर चढ़कर पतंग उड़ाना
होली मे आने जाने वालों पर गुब्बारे मारना
दीपावली पर जी भरकर पटाखे छुड़ाना
हर दुख से बेखबर अपनी मस्ती में रहना
काश कोई लौटा दे मेरा वो बचपन

?????????
प्रस्तुति ?? रीता जयहिंद ??

Rita arora jai hind

एक प्रयास
मापनी 211 211 211 22

रे मन बावरा हुआ जाय है
बादलों में घटा घिर आयी रे।
श्याम बंसी की तान सुना दे
नयनन की प्यास बुझाय दे।।

?? रीता जयहिंद ✍?

Rita arora jai hind

मापनी
211 211 211 22

मैं बालक तुम पालनहार
शरण पड़ी प्रभु राखो लाज ।
दाता दीनबंधु हे दीनानाथ
कब से खड़ी हूँ मैं तेरे द्वार ।।

?? रीता जयहिंद ??

Rita arora jai hind

वसंत ऋतु पर मेरी ये कविता

?? रीता जयहिंद ??
आया वसंत देखो आया वसंत ।
खुशियों की सौगात लाया वसंत ।।
पेड़ पौधे पशु पक्षी सब लगे झूमने।
नदियाँ झरने सब गुनगुनाने लगे।।
मोर पपीहा कोयल गीत गाने लगे।
तितली भँवरे फूलों पर मंडराने लगे।।
पीली सरसों खेतों में खिलने लगी।
धरती भी अंबर को छूने लगी।।
सारा जग में खुशियाँ छाने लगी।
पेड़ों पर कमलपट खिलने लगे।।
गुलाब भी खुशबू महकाने लगे।।
राधे भी श्याम से मिलने जाने लगी ।
आया वसंत देखो आया वसंत ।। ??????❤❣???❣?????❤?

। राधे – राधे ।

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