Poems

जब भरोसा उठ जाए, तो खुद के पास खुदा रखना

तुम अपने गिर्द हिसारों का सिलसिला रखना
मगर हमारे लिये कोई रास्ता रखना

ज्यादा देर तक जुल्म नहीं सह सकता मैं
अब अगर आयें कडे दिन तो दिल कडा रखना

तुम्हारे साथ सदा रह सकें जरूरी नहीं
अकेलेपन में कोई दोस्त दूसरा रखना

वो कहते हैं न कि जिसका कोई नहीं खुदा होता है
जब भरोसा उठ जाए, तो खुद के पास खुदा रखना

छु न सके हथियार

छु न सके हथियार जिसे, उसे वो नजरो से घायल करते रहे,,
हम भी बने हिम्मती इतने,, वो वार करते रहे, हम हलाल होते रहे!!
कल तक मिल्कियत की जिसकी मिसाले देता था जमाना,
उसे ही वो होठों के जाम पिलाते रहे,, हम भी शौक से पीते रहे!!
कुछ तो बात हैं कान्हा, जो सितारे उसे चंदा समझ लेते हैं अक्सर,,
काश!! वो भी मेरी ख़ामोशी समझ पाए और  हम भी उन्हें देखते रहे!!

कोई खिडकी न खुले और गुजर जाऊं मैं

हादसा ऐसा भी उस कूचे में कर जाऊं मैं
कोई खिडकी न खुले और गुजर जाऊं मैं

सुबह होते ही नया एक जजीरा लिख दूं
आज की रात अगर तह में उतर जाऊं मैं

मुन्तजिर कब से हूं इक दश्ते करामाती का
वह अगर शाख हिला दे तो बिखर जाऊं मैं

जी में आता है कि उस दश्ते सदा से गुजरूं
कोई आवाज ना आये तो किधर जाऊं मैं

सारे दरवाजों पे आईने लटकते देखूं
हाथ में संग लिये कौन से घर जाऊं मैं

कभी कभी सोचता हूं

कभी कभी सोचता हूं
कि हमने पत्थर को भगवान बनाया है
या भगवान को भी पत्थर बना दिया

4 liner#3

कर के दरकिनार फासलों को तू बढ़ता जा

तू चढ़ता जा सीढियां वो तमाम

जो हर पल गोल घूम जातीं हैं सताती हैं पर

बताती हैं कि बढ़ना ही जिंदगी है चढ़ना ही जिंदगी है

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