Poems

गुनाह् नही

गुनाह् नही,  कोई उम्मीद करना
गुनाह् है , उम्मीद को ना-उम्मीद करना

…… यूई

उम्मीद

उम्मीद तेरी यह कैसे होती पूरी
इमारत की तामीर थी हवाओं में
…… यूई

देख आईने में

वफाएँ हासिल करने का दम भरते हो
सर उठा कर चेहरा तो देख आईने में

…… यूई

सोच तो मैं क्या ही पता

अता ना की होती यह
गर रोशनी ख़ुद की तूने
सोच तो मैं क्या ही पता
लिखना तो कभी ना भाता

…… यूई

तेरा नाम रोशन

लिखवाता जा रहा है तूँ मुझसे
नाम मेरा हो रहा है रोशन
मैंने भी ना रखा कुछ मुझमें
रोज़ किया तेरा नाम रोशन
…… यूई

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