Poems

Ishtehaar si ho gayi he zindagi meri

poetry With Panna

निकल जाते है उन रास्तों पर

निकल जाते है उन रास्तों पर
जिनकी कोई मंजिल नहीं
अंधेरे होते है जिन राहों में
मगर कोई अंजुमन नहीं
होते है कांटे, कंकड़
फूलों का बागान नहीं
बस इक साथी की तलाश होती है
जो हमारी तरह इन राहों पे निकला हो

“गुमराह ” #2Liner-36

ღღ__ज़रा देखो तो निकल के “साहब”, अब तक वो आए क्यूँ नहीं;
.
कहीं ऐसा तो नहीं रस्तों नें, उन्हें गुमराह कर दिया !!……..‪#‎अक्स‬

This Silence

Screenshot (215)

जम जाते है क्यों रिश्ते बर्फ़ की तरह

सोचता हूं कभी कभी
क्यों हो जाते है शुष्क
जम जाते है क्यों रिश्ते
बर्फ़ की तरह

लेकिन तभी लुड़क पडते है
गर्म गर्म आंसू
नर्म रुखसारों पर
पिघल जाती है सारी बर्फ़
रिश्तों की |

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