Poems

Aazaadi……..!

Aazaadi……..!

Aazaadi ki keemat hamne bahut badi chukaai hai
Tab jaa kar hamne ye aazaadi paai hai

Ye din hai bahut sunhaira, ye din hai bahut pavitra
hindustaan ko aazaad rakhne ki ham sab ne kasam khaai hai

Aazaadi ki keemat hamne bahut badi chukaai hai
Tab jaa kar hamne ye aazaadi paai hai

deshbakhton ne sinchaa hai esko apne khoon se
aur bharat maa per apni jaan lutaai hai

Aazaadi ki keemat hamne bahut badi chukaai hai
Tab jaa kar hamne ye aazaadi paai hai

Har yaad es din ki taza hui aaj phir,
Har gali, har nukkad per yahi goonch paai hai

Aazaadi ki keemat hamne bahut badi chukaai hai
Tab jaa kar hamne ye aazaadi paai hai

Haste haste suuli chadh gaye bhagat singh
Chandra sekhar ne khusi khusi prano ki bainth chadhai hai

Aazaadi ki keemat hamne bahut badi chukaai hai
Tab jaa kar hamne ye aazaadi paai hai

Rakhenge ham apne desh ko aazaad hamesha
Har hindustaani ne aaj yahi kasam khaai hai

Aazaadi ki keemat hamne bahut badi chukaai hai
Tab jaa kar hamne ye aazaadi paai hai

Mahatma gandhi ki wo dhandi yatra,
Aur jaliawala bhag ki kahani aaj yaad aai hai

Aazaadi ki keemat hamne bahut badi chukaai hai
Tab jaa kar hamne ye aazaadi paai hai

Aao aaj sab mil kar naman kare
Un sapooton ko jinhone hame ye aazaadi dilaai hai

Aazaadi ki keemat hamne bahut badi chukaai hai
Tab jaa kar hamne ye aazaadi paai hai

Baikaar nahi jaane denge ham unki kurbaani ko
aaj ham sab ne yahi kasam khaai hai

Aazaadi ki keemat hamne bahut badi chukaai hai
Tab jaa kar hamne ye aazaadi paai hai

Bahut kuch khooya hai sab ne
Bahut kuch kaiyon ne aazaadi ke khaatir gawai hai

Aazaadi ki keemat hamne bahut badi chukaai hai
Tab jaa kar hamne ye aazaadi paai hai

Sat sat naman un desh bhakton ko
Jinhone ham sab ko ye nai subaah dikhaai hai

Aazaadi ki keemat hamne bahut badi chukaai hai
Tab jaa kar hamne ye aazaadi paai hai …………………….!!!!

D K

इश्क और भूगोल

प्रशांत महासागर सी अनंत विस्तार लिए हुए तुम्हारे इश्क़ में
मेरियाना ट्रेंच सी गहराई महसूस होती है ।
एवरेस्ट की ऊँचाई जैसी हमारी आकांक्षाओं को जब तुम 8848 मीटर से देखती हो तो बरबस ही मेरी निगाहें सागर की प्रवाल भित्तियाँ सी तुम्हें निहारती है …
मेरी और तुम्हारी दूरी के बीच फ़ासला इन्दिरा कौल से लेकर इन्दिरा पॉइंट तक है
पर हमेशा लगता है की तुम मेरी इर्द गिर्द ही हो ।

मैं तुम्हें ठीक वैसे ही फॉलो करता हूँ जैसे चंद्रमा पृथ्वी को करता है ।
कभी कभी तुम नाराज हो जाती हो तो लगता है जैसे तुम्हारे अंदर क्लोरोफ़्लोरोकार्बन और नाइट्रस ऑक्साइड की मात्रा बढ़ गयी हो ।
और तुम अब बस मेरे दिल के ओज़ोन परत को छलनी करने ही वाली हो
लेकिन तभी तुम्हें मैं मांट्रियल और क्योटो प्रोटोकाल की कसमें देकर मनाता हूँ।
और तुम चुपचाप विकासशील देश जैसी मुझे सुनती हो और ये सिलसिला फिर कोन्फ्रेंस ऑन पार्टी की तरह हर साल चलता है ……कभी न ख़त्म होने वाली बैठकों की तरह ……………..

हिन्दुस्तान

जहाँ हिन्दू मिले जहाँ पर मुसलमान मिले उसे हिन्दूस्तान कहते हैं,
जहाँ हर मज़हब को एक सा सम्मान मिले उसे हिन्दूस्तान कहते हैं।

कहदो उससे जाकर जहां में हमारे मुल्क से अच्छा कोई मुल्क नहीं,
जहाँ गुरुग्रंथ बाईबल गीता और कुरान मिले उसे हिन्दूस्तान कहते हैं।

जिसने सदियों से संजोऐ रख्खा है इन मोतीयों को एकता के धागे में,
जहाँ आँगनों में तुलसी घरों में रहमान मिले उसे हिन्दूस्तान कहते हैं ।

हमारा वतन हमको जान से प्यारा है यही बस हमारे जीने का सहारा है,
जहाँ मंदिरों में घंटीयाँ मस्जिदों में अजान मिले उसे हिन्दूस्तान कहते हैं ।

हो जाएगी बेकार ये सब कोशिशें तुम्हारी हमको आपस में लड़वाने की,
जहाँ एक दूजे के लिए हथेलीयों पर जान मिले उसे हिन्दूस्तान कहते हैं ।

आखिर क्यों ना हो ग़ुमान हमको खुद पर अपने हिन्दूस्तानी होने का,
जहाँ भाईचारा जहाँ अमन ओ अमान मिले उसे हिन्दूस्तान कहते हैं ।

सिर्फ और सिर्फ वतन परस्ती यही हमारा धरम है यही हमारा करम है,
जहाँ दिलों की हर धड़कन में हिन्दूस्तान मिले उसे हिन्दूस्तान कहते है ।

इस मिट्टी का दाना पानी बनके जिंदगी रगों में हमारी दौड़ रहा है
जहाँ हर क़तरा खून का अपने वतन पे कुर्बान मिले उसे हिन्दूस्तान कहते हैं ।

एकता की जोत

हम भारत मैं एकता की
अखंड जोत जलायेंगै
बहकावे में किसी के
अब न हम आयेंगे
दुख और मुश्किलों से
अब ना हम घबरायेंगे
रोटी एक हो या आधी
मिल बांटकर हम खायेंगे
अभी प्रेम हमारा
देखा है तुमने
जिस दिन रोष हमारा
देखोगे
खुदा भी बचा न पायेगा
खूनी दिन और खूनी रातें
कब तिलक खेल ये खेलोगे
जाग गया है हिन्दूस्तान
जाग गया है बच्चा – बच्चा
जाग गया हर नोजवान
दंगाईयों को मार – मारकर
देश से हम भाग देंगे
अब देश को यूँ ना हम
खूनी रंग से रंगने देंगे
यहाँ प्यार बसे हैं दिलों में
प्यार के रंग चढायेंगे
सबसे पहले भगवा रंग
फिर तिरंगा हम लहरायेंगे

प्रस्तुति – रीता अरोरा

तिरंगा

ना बिलखे भूख से ना कोई बच्चा नंगा रहे
ना हो आतंक के साये ना कहीं कोई दंगा रहे
मेरे भारत में चहुँ ओर बस प्रेम की गंगा बहे
“आदि” का हो अन्त तब उसका कफ़न तिरंगा रहे

जय हिन्द ! जय भारत !
ऋषभ जैन “आदि”

Page 1518 of 2162«15161517151815191520»