Poems

क्यों तुम मेरा पता पूछते हो

नहीं है कोई खबर मुझे खुद की
क्यों तुम मेरा पता पूछते हो

खुद को खामोश ही पाती हूं मैं

तुझसे कहां कुछ कह पाती हूं मैं
जब भी तुम होते हो सामने
खुद को खामोश ही पाती हूं मैं

mera Raja beta

Mera Raja beta

INDEINDPENDENCE DAY…! ….!

Independence & the day; as it was in 2013 & now in 2019

INDEPENDENCE DAY ….!
Independence of the country & its citizens is
Not to be regarded by elected leaders as authority & license (to)
Do whatever greedy, unholy acts they want to indulge in nuisance (but)
Entails a great responsibility on their part for all their deeds & actions
Provides freedom & liberty to them to do as they ought for the nation
Engage continuously in activities for benefit & upliftment of its citizens (&)
Nation building for real unity, progress, peace & prosperity of the union
Developing profound brotherhood & love within all sections in the country,
Enlightened clean living of self, setting as an example in sincerity & honesty
Nurturing & demonstrating in all aspects high individual & national character
Commanding for country respect & power in comity of Nations of high order
Enlightened Democratic Strong Nation of Citizens in dignity caliber & character…..!
(2013)
Day is now to review how our leaders in power have (mis)managed this far the country
And hold them responsible for the cowardice, corruption, sins, greed they manifested in polity
Yet we must combine to throw such leaders out constitutionally to save degradation of country ….!
(2019)
Day is now to appreciate how since’14, PM/his NDA team have managed this country better
And helped eradicating the cowardice, corruption, sins, greed that manifested in polity earlier
Yet now they need full support of honest nationalist citizens to make the country far superior ..!

“Vishvnand”

हे। कृष्ण तुम्हें फिर आना होगा

हे। कृष्ण
तुम्हें फिर आना होगा
हे। कृष्ण तुम्हें फिर आना होगा
फुफकारों से भरी वसुंधरा
आकर उसे मिटाना होगा
विष फैलाते असंख्य कालिया
आकर मर्दन दिखाना होगा
काट शीश को दुष्ट पापियों के
सुर्दशन तुम्हें चलाना होगा
हे। कृष्ण तुम्हें फिर आना होगा
हे। कृष्ण तुम्हें फिर आना होगा।
आस्तीनों में सांप पल रहे
रिश्ते-रिश्तों को नित डस रहे
किसे बताएं अपना साथी
किस पर हम विश्वास करें
हर रिश्ता, अब कंस बन गया
अब कैसे उसे निभाना होगा
रिश्तों में अब कंस समाया
आकर तुम्हें मिटाना होगा
मानवता की साख बचाने
हे। कृष्ण तुम्हें फिर आना होगा।
एक दुशासन मरा, कुरुक्षेत्र रण
असंख्य दुशासनों ने जन्म लिया
तब एक अकेली थी, द्रौपदी
उसकी लाज बचा डाली
कितने चीरहरण नित होते
मानवता हुई धरा से खाली
आकर लाज बचाओ हरि तुम
तुमको रूप दिखाना होगा
एक नहीं, दो-चार नहीं
अनगिनत चक्र चलाना होगा
लाज बचा लो सुताओं की
तुमको शस्त्र उठाना होगा
मनुष्यों को राह दिखाने
हे। कृष्ण तुम्हें फिर आना होगा।
Dharamveer Vermaधर्म

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