Poems

Pradhanmantri Narendramodi

तमन्ना थी हम देशवासियों की,
ऐसा हो कोई प्रधानमंत्री हमारा,
गर्व हो जिस पर हम सबका,
हां, आप में पाया वह सब गुण हमने,
उच्च शिखर तक भारत को है पहुंचाया आपने,
भारत क्या दुनिया ने भी लोहा मान लिया है आपका,
पहले थी हर तरफ लूट मारी चोरी घूसखोरी,
अब तो लगा लगाम नौकरशाही पर,
अब तो लगा लगाम चोर बाजारी पर,
स्वच्छ भारत का सपना है दिखाया,
योग दिवस का बिगुल बजाया.
कश्मीर से 370 हटाया,
पुलवामा का बदला लिया,
आतंकवाद की नीव हिलाई,
हां सच है 56 इंच के सीने वालीे है बात आपमे,
उज्जवल भारत का सपना है अब दिख रहा |

Pradhanmantri Narendramodi

तमन्ना थी हम देशवासियों की,
ऐसा हो कोई प्रधानमंत्री हमारा,
गर्व हो जिस पर हम सबका,
हां आप में पाया वह सब गुण हमने,
उच्च शिखर तक भारत को है पहुंचाया आपने,
भारत क्या दुनिया ने भी लोहा मान लिया है आपका,
पहले थी हर तरफ लूट मारी चोरी घूसखोरी,
अब तो लगा लगाम नौकरशाही पर,
अब तो लगा लगाम चोर बाजारी पर,
स्वच्छ भारत का सपना है दिखाया,
योग दिवस का बिगुल बजाया.
कश्मीर से 370 हटाया,
पुलवामा का बदला लिया,
आतंकवाद की नीव हिलाई,
हां सच है 56 इंच के सीने वालीे है बात आपमे,
उज्जवल भारत का सपना है अब दिख रहा |

दोस्ती

Mam दोस्ती ही तो है एक ऐसा रिश्ता है जो जिंदगी के एक रंग में भी कई रंग दिखाता है ।
वरना बिना दोस्तों के रंगीन जिंदगी भी बेरंग सी नजर आती है ॥
Mam आपकी सच्ची दोस्ती से बढ़कर इस दुनिया में कुछ कहाँ है ।
आप जैसा एक दोस्त सच्चा है आप जैसा तो अपना सारा जहाँ है ॥
आप साथ हो मेरे तो डर किस उड़ती चिड़िया का नाम है ।
मस्त- मस्ती में बस हर दम खिलखिलाने का मेरे काम है ॥
जब हो कोई tension या किसी problem से हों परेशान ।
तब आप के साथ होने से ही हो जाता है सारी समस्या का समाधान ॥
आपकी नजरें ही कह देती हैं चल Anu इसे भी देख लेते हैं ।
और हर भी पल में यूँ ही मुस्कुराने की हिम्मत दे देते हैं ॥
जब होता है आपका साथ तो खुद में ही हिम्मत सी आ जाती है
और चेहरा घोर उदासी में भी खिलखिला कर मुस्कुरा पड़ता है ॥
आप ही तो हैं जो बिना कुछ बोले सब जान लेते हैं ।
और हर expressions को दूर से ही भाँप लेते हैं ॥
आप के साथ मिल कर हर बोझ हल्का हो जाता है ।
आप से मिलकर पल में ही मन को सुकून मिल जाता है ॥
दिन भर शरारत करना और रात भर उन पर खिलखिलाना ।
और पुरानी बातों का ताजा करके यूँ ही पूरा दिन बिताना
अब हो गए है आदत ॥
Mam वो अजब गजब शरारते और कई कारनामों का बबाला ।
वो शरारत की चटनी और शोर शराबे का मसाला ॥
वो code words का खेल और लोगो को चिढाना ।
और लोगो के नये नये नामों का बनाना ॥
सब वो शरारते याद आएगी…………………
वो Saturday की planing करना और अपने Group का active होना।
वो पेड़ के नीचे खड़े होकर अपने Group में अपनी बातो पे खिलखिलाकर जोर जोर से हसँना…………
Mam मेरी सच्ची दोस्त सिर्फ आप है, सच्चा दोस्त रखने वाला संसार में सबसे धनवान है ।।

धूप

धूप,आज
कुछ, सरक आयी,
मेरे आंगन में….
और, बिखेर गई,
मुठ्ठी भर अबीर……

…. कविता मालपानी

ए मन जरा थम

ए मन, ज़रा थम.
तू चला है… थाम के,
अपनी पतवार…
नदी तो, बहती रहती,
जो सतत् , चाहे
जैसे भी हों रास्ते…
कंकरीले.. पथरीले…
पतवार ना छूटे, हाथों से…
तू कौन??
तेरा वजूद क्या??
सिर्फ़ एक आत्मा!!
राह में, जो मुकाम आए…
वो पड़ाव भर ;
इस सफ़र के…
तू घिरा,है। जिस भीड़ से..
उनके , कुछ ॠण हैं बाकी,
भरदे, अपने प्रेम के प्यालों से..
पार करके, ये पड़ाव…
फिर थामले, अपनी पतवार…
कि,ये तेरी नियति नहीं..
अभी तो, सफ़र है बाकी.
कि,पहचान ख़ुद की,
अभी है बाकी…..

……..कविता मालपानी

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