Poems

हम ना बदल पाएँ

मुस्किल हुआ दिल को समझाना
मुस्किल हुआ रूठोंं को मनाना
कितना बदल गया ये ज़माना
पर हम ना बदल पाएँ
पर हम ना बदल पाएँ
तुझसे बिछड़ के ज़िंदा हूँ ये मेरी फूटी किस्मत है
मिले दो दिल तो जुदा कर देना ये दुनियाँ की फितरत है
मुझसे जुदा होके सम्हल गए तुम
पर हम ना सम्हल पाएँ
कितना बदल गया ये ज़माना
पर हम ना बदल पाएँ

Mai hu rastrabhasha hindi

मीठी मीठी झंकार सी,
कानों में रस घोलती,
मैं हूं राष्ट्रभाषा हिंदी,

स्वीकार किया
सब ने मुझे,
हू मातृभाषा हिंदी,
फिर भी जताने को
वर्चस्व अपना,क्यों
बोलते हो अंग्रेजी,

वह तो भाषा है विदेशी,
मैं तो हूं तेरी अपनी,
मैंने ही तो दिए हैं
संस्कार तुझे मेरे बच्चों,
फिर क्यों मुझसे ही
मुंह फेरते हो मेरे बच्चो |

मायूस

बड़े मायूस होकर, तेरे कूचे से हम निकले।
देखा न एक नज़र, तुम क्यों बेरहम निकले।

तेरी गलियों में फिरता हूँ, एक दीद को तेरी,
दर से बाहर फिर क्यों न, तेरे कदम निकले।

घूरती निगाहें अक्सर मुझसे पूछा करती हैं,
क्यों यह आवारा, गलियों से हरदम निकले।

मेरी शराफत की लोग मिसाल देते न थकते,
फिर क्यों उनकी नज़रों में, बेशरम निकले।

ख्वाहिश पाने की नहीं, अपना बनाने की है,
हमदम के बाँहों में ही, बस मेरा दम निकले।

देवेश साखरे ‘देव’

दोस्ती

दोस्ती

***
दोस्ती हो
तो ऐसी कि
उसके मुक़ाबिल
पुश्तैनी दुश्मनी भी
फ़ीकी पड़ जाये….

दोस्त
के बिना
रहा न जाये
अगर दोस्त मिल जाए
तो कुछ और न भाये….
****
@deovrat 15.09.2019

आधुनिक नारी

सशक्त है कमजोर नहीं,
पत्थर है केवल मोम नहीं।
विद्वती है बुद्धि हीन नहीं ,
बेड़ियों में अब वो जकड़ी नहीं।
आधुनिक है ,संकीर्ण नहीं,
संस्कृति संस्कारों से हीन नहीं।

हक पाना लड़ना जानती हैं
दिल की आवाज़ पहचानती है।
गुमराह करना आसान नहीं,
वह स्त्री है सामान नहीं।

शक्ति स्वरूपा , वो तेजोंमयी,
ममता मयी मगर दुखियारी नहीं।

सृष्टि का भार उठाए खड़ी ,
आंखों में पहले सा पानी नहीं।
हर क्षेत्र में अब वो आगे हैं ,
बीती हुई कोई कहानी नहीं।

निमिषा सिंघल

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