Poems

हम बीमार हो गए

कुदरत के संग बदफेली के खुद हीं हम शिकार हो गए।
आबोहवा संग धरती भी तो दूषित हो गई और हम बीमार हो गए।

हमहे देखी

वईसी डेरु बईठा
अइसी शरम हमका घेरे हई
ना वई द्याखइ ना हमहे देखी

किस ओर

सीडियाँ अनगिनत चढ़नी पड़तीं हैं,
जब पानी होती है इश्क की मंज़िल ।

किस ओर

किस ओर गया मेरा सुकून
फकत इतना-सा बता दे कोई,
दिन-रात आगोश में रहता हूँ
बेचैनी के ।

दिल ए नशाद!

ले गया दिल ए नशाद! मुझे
जाने कहाँ ,
जब एक निगाह उसने कर दी
मेरी तरफ।

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