माँ पर मार्मिक कविता

माँ

दुनिया की भीड़ में जब कभी अकेली होती हूँ तो बहुत याद आती है मुझे मेरी माँ खुशियाँ हो या गम हो हर सुख दुःख में बहुत याद आती है मुझे मेरी माँ जब भी किसी तकलीफ़ में होती हूँ तो बहुत याद आती है मुझे मेरी माँ जब कभी नींद न आती है मुझे तो बहुत याद आती है मुझे मेरी माँ जब होती हूँ बेचैन तो बस तेरी सुकून की गोद याद आती है मुझे मेरी माँ जब दिल याद में तेरी भीगा होता है तो सिर्फ तेरा ही आँचल याद आता है मुझे म... »

जो उड़ रहे थे परिंदे बेख़ौफ़ खुले आसमाँ में,

जो उड़ रहे थे परिंदे बेख़ौफ़ खुले आसमाँ में,

जो उड़ रहे थे परिंदे बेख़ौफ़ खुले आसमाँ में, आज उस खुदा ने उन्हें ज़मी का मुरीद कर दिया॥ – राही »

तेरा प्यार अनंत है माँ

हर पल मेरी परवाह करते थकती क्यों तू न है, माँ मुझको इतना बतला दे तेरा भी क्या सपना है।।   चंदा मामा के किस्से कहकर कैसे हँसते-हँसते तू लोरियाँ सुनाती थी माँ मझको इतना बतला दे इतना स्नेह कैसे तू लूटा पाती थी   तुझसे जो थोड़ा दूर हो जाऊँ पल-पल मझसे तू पूछते जाती थी कैसा है बेटा कहकर, खाना समय से खा लेने की सलाह दे जाती थी   मेरे सपने को अपना कहकर निस्वार्थ प्रेम जो तूने दिखलाया हर पल प... »

माँ

माँ माँ! तुम बहुत याद आती है, जब मै अकेले मे होता , आपका चेहरा नजर आता आँसु को रोक ना पाता ।। मेरी अब ख्वाहिश है एे खुदा, मै फिर से माँ के पास आ जाऊ, माँ के आँचल मे इस तरह लिपट जाऊ। कि मै फिर से न्नहा हो जाऊ। माँ !! तेरी ही खुशी के खातिर– अब मै चल रहा हूँ सही रास्तो पर तेरे भी कुछ सपने होगे खंडर जैसे मंजिल को सजाने की।। ज्योति mob no 9123155481 »

मां

एक मां ही तो है जो अब भी अपनी लगती है वरना इस परायी दुनिया में कौन अपना है »

कुछ भी नहीं छुपाता हूँ मैं माँ को सब कुछ बताता हूँ

कुछ भी नहीं छुपाता हूँ मैं माँ को सब कुछ बताता हूँ, माँ मुझ पर प्यार लुटाती है मैं सब कुछ भूल जाता हूँ, मैं भूखा जब हो जाता हूँ माँ मुझको खूब खिलाती है, पर कभी कभी माँ मेरी चुप के भूखी भी सो जाती है, मैं दूर कहीँ भी जाता हूँ माँ मुझको पास बुलाती है, मैं माँ को भूल न पाता हूँ माँ मुझको भूल न पाती है।। – राही (अंजाना) »

“माँ”

“माँ” कितनी बार धुप मे खुन को जलाई तुने “माँ” मेरी लिए चंद रोटियाँ लाने मे। कितनी बार तुने खुशी बेच ली “माँ” तुने मुझे सुलाने मे।। कितनी बार दुसरे से लड़ गई ” माँ ” मुझे बस के सीट पर बैठाने मे, कितनी बार अपनी सोना– चाँदी बेची “माँ” मुझे रोजगार दिलाने मे। कभी खुशी कभी आँसु बेची माँ मुझे घर से बाहर भेजने मे। तब पर भी ये मतलबी दुनिया त... »

आई

आई तुझ्यासाठी मी काय लिहू, आणि किती लिहू, तुझ्या महितीसाठी शब्दच अपुरे आहेत, तुझ्यासमोर सगळे जगच फिके आहे।। आई तुझ्या बद्दल बोलायला मला शब्दच उरणार नाहीत. आणि तुझे उपकार फेडायला मला हजारो जन्म पुरणार नाहीत।। आजपर्यंत तू माझा प्रत्येक हट्ट पूर्ण केला, अगदी निस्वार्थ भावनेने, तसेच माझी काळजी घेतलीस निष्ठेने. माझ्या आयुष्यातील शांतता तू, माझ्या मनातील गारवा तू, अंधाऱ्या आकाशातील चंद्र तू, माझ्या आयुष... »

दुनिया जीतकर मैं ममता हार गयी

चल पड़ी उस राह पर,जहां काटें बहुत थे| माँ, तेरी फूल जैसी गोदी से उतरकर ये काटें बहुत चुभ रहे थे| चलते हुए एक ऐसा काटा चुभा था, कि ज़ख्म से खून आज भी निकल रहा है| माँ, मंजिल पर तो पहुँच गयी हूँ, पर इसकी ख़ुशी मनाने के लिए है तू ही नहीं है| यूं तो मैं तेरी मल्लिका थी, पर मैं तुझे रानी बनाना चाहती थी| लेकिन पता नहीं था मुझे कि तेरे दिल में, मुझे पाने का फ़कीर जिंदा था| माँ, वो तेरे शब्द जो मैंने सफलता के... »

मॉ बोली लाठी से मारुँगी ।??

आज मेरे पास सावन की मातृ दिवस की लिंक आई । फिर क्या इसे देखकर मुझे भी सनक आई । फिर मैने भी कलम उठाई । और पुरी महेनत से एक कविता बनाई । फिर मैने मेरी कविता सबसे पहले मॉ को सुनाई । मॉ हल्का सा मुस्काई । और बोली बेटे तेरी ये कविता तो समझ ना आई। पर तेरी ऑखो मे मेरे लिये इज्ज्त देखकर ऑखे भर आई । मॉ को रोता देख मेरी ऑखे भी भर आई । इतना देख मॉ रोना छोड अचानक गुस्से मे आई । और उसने अपने पास पडी लाठी उठाई।... »

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