माँ पर मार्मिक कविता

माँ

हर दर्द मां सहती रही, पूरी मेरी हर बात की., हर जिद को मेरी मान के हर वक्त मेरे साथ थी, अब मै बडा़ जबहो गया कैसे भुलादूं मां को मै , दुनियाँ ही मेरी माँ से है मां खुशियों की सौगात थी बागी के दिल कि आह,. »

वो माँ है

वो माँ है आँखों में छुपी हमारी हर ख़ुशी , हर मुस्कराहट का राज़ है तो वो माँ है, गम हो की दुख़,दर्द ही क्यों न हो दिल मे , उस दर्द में छुपे हर सवाल का जवाब है तो वो माँ है, दुखाये दिल जब ये दुनिया कही हर मुकाम पे, संभाल मुझे समझाने वाली वो है तो वो अपनी माँ है, आंसू आए जहाँ चहेरे पर जब कभी , हाथ आँचल संभाले आये वो साथ मेरी माँ है, ये मुस्कान, ये हँसी, चहेरे पे जो हरदम दिखे,दुनिया की तब्दील मुश्किलों क... »

माँ-बाप की लाडो

माँ-बाप की लाडो

माँ–बाप की लाडो   ज्यौं जोगि छोड़े दुनिया को त्यों अपनी दुनिया छोड़ आई हूँ मैं तेरी जोगन हो आई हूँ अपना व्याह रचा आई हूँ   बाबुल का आँगन सूना कर तेरा स्वारन चल आई हूँ वीरो की बाँहे छोड़ जीवन तेरे लड लगा आई हूँ   मै माँ–बाप की लाडो तेरी परछाई बन चल आई हूँ अपनी मंज़िलों को भूल तेरी राहों को अपना आई हूँ   हाथो की मेहँदी में तेरे इश्क का रंग चडा आई हूँ इन सभी लकीरो में एक तेरा ही नाम सजा आयी... »

माँ

आँखे तुझ पर थम गई जब तुझको बहते देखा। सोच तुझमे रम गई जब तुझको सेहते देखा ।। अपनी कलकल लहरों से तूने प्रकृति को संवरा है। सबको शरण में लेती माँ तू तेरा ह्रदय किनारा है।। हमे तू नजाने कितनी अनमोल चीज़े देती है । और बदले में हमसे कूड़ा करकट लेती है।। खुद बच्चे बन गए,तुझको माँ कह दिया। तूने भी बिन कुछ कहे हर दर्द को सेह लिया ।। तेरे जल में कितने जलचर जलमग्न ही रहते है। और कर्मकाण्ड के हथियारो से जल में... »

मां

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“आसमाँ” #2Liner-16

ღღ__इक परिन्दा हो के भी, अब उड़ नहीं सकता; . कि मेरे साये ने ही मेरा, मेरा आसमाँ चुरा लिया !!……..‪#‎अक्स‬ »

माँ

कुछ खास नहीं था कहना , कुछ बात नहीं था कहना , जो बोल न पाया ख्यालों की अंजुमन मैं , बिन बोले तुम तक वह बात पहुंच गयी , आस्चर्य मैं पढ़ जाता हूँ मैं , मेरे दिन की रहमत होगी जरूर तुम , नहीं तोह तुम तक मेरी हर अनकही बात कैसे पहुंच जाती हैं »

दिल क्यूँ मांगो “More” ….!

   दिल क्यूँ  मांगो “More” ….! दिल तुम्हरी नहीं मानेगे हम, क्यूँ तुम मांगो “More” “More” “More” ही दुःख का कारण, सुख ले जावे चोर…..! इतना सारा पास जो अपने, देख तो उसकी ओर, जो कुछ है, इसमे ही समाया समाधान संतोष….. ! भगवत्प्रेम और भक्तिभाव में होकर मन मदहोश, सुख है, जो है, उसका करना परिपूर्ण उपभोग, सुख है, जो है, उसका करना प्यार से सद्उपयोग …..! ये जीवन है प्रभु की पूजा, ठान ले तू हररोज, प्रभु ... »

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