स्वतंत्रता दिवस पर निबंध

****जकड़ी है****

****जकड़ी है****

****जकड़ी है****   कुर्बानी से उपजी थी अब तस्वीरों में जकड़ी है, ऐ हिंद! तेरी आज़ादी सौ-सौ जंजीरों में जकड़ी है l     हर मुफलिस की भूख ने इसको अपनी कैद में रख्खा है, और यही पैसे वालों की जागीरों में जकड़ी है l     मां-बहनों पर दिन ढलते ही खौफ़ का साया रहता है, और हवस के भूखों की ये तासीरों में जकड़ी है l     भ्रष्टाचार का दानव इसको बरसों-बरस सताता है, ये संसद की उल... »

शत्-शत् नमन करें

शत्-शत् नमन करें उनको , जो राष्ट्र-हित में शहीद हुए। जन-जन रो देता है सुन वे वीर गति को प्राप्त हुए। पुत्र खोने का दर्द भला माता से ज़्यादा कौन सहे! धन्य है वो माँ जिसने ऐसे पुत्र जने! संवल खोने का दर्द भला पिता से ज़्यादा कौन सहे ! धन्य है वो पिता जिसने राष्ट्र को ऐसे पुत्र दिए ! पति-विरह की पीड़ा को पत्नी से ज़्यादा कौन सहे! दुश्मन से लड़ते पति जब वीर गति को प्राप्त हुए! राखी के बंधन का वादा बहन से ज़... »

स्वतंत्रता का नव विहान

स्वतंत्रता का नव विहान– गाओ मंगल गान! लहराते ध्वज को देखो- स्वाभिमान भरे मस्तक ऊँचे! याद करो वीरों की कुर्बानी! ज़ुल्म भरे व्यथा की कहानी। चहुदिश अरुण रश्मि छायी- धरती पर स्वर्ण-आभा आई ! बरस रहे सुधा रस राग रंग जनता में खुशियों की पुरवाई! गगन-धरा-अनिल-क्षितिज प्रदिप्त हो रहे मंगल दीप! त्याग-बलिदान की ज्योति जले कभी न बुझ पाए ये अमर दीप ! बँटवारे का दर्द समेटे आज भेद भाव सब छूटे। जननी नव दुल्ह... »

मां तेरा लाल आयेगा

माँ तुम राह देखती होगी कि मेरा लाल आयेगा पर सरहद पर जंग इतनी छिड़ी थी कि तेरा लाल नआ पाया वो इतने सारे थे कि माँ तेरा लाल अकेला पड़ गया मैंने एक – एक को मार गिराया वो भी अकेला रह गया अचानक उसने भारत माता का नारा लगाया मैंने जैसे ही भारत माता के चरणों में शीशे झुकाया उसने धोखे से मुझे मार गिराया अब कोई गम न करना मां भारत माता पर कुरबान हुआ हूँ तिरंगे में लिपटा जब मेरा शव आयेगा तो आंसू एक न बहा... »

भारतमाता

स्वर्णिम ओज सिर मुकुट धारणी,विभूषित चन्द्र ललाट पर गुंजन करे ये मधुर कल-कल, केशिक हिमाद्रि सवारकर आभामय है मुखमडंल तेरा, स्नेहपू्र्णिता अतंरमन। अभिवादन माँ भारती, मातृभूमि त्वमेव् नमन।। बेल-लताँए विराजित ऐसे, कल्पित है जैसे कुण्डल ओढ दुशाला तुम वन-खलिहन का ,जैसे हरित कोमल मखमल तेरा यह श्रृंगार अतुलनीय, भावविभोर कर बैठे मन। वन्दे तु परिमुग्ध धरित्री, धन्य हे धरा अमूल्यम्।। वाम हस्त तुम खडग धरे, दाह... »

क्या है भारत।

क्या है भारत । एक कल्पना है ये भारत, हरिअर वन-खलिहानो की रहे सूखी जहाँ ये धरती तो उसे भारत नही समझना एक उम्मीद है ये भारत, जो नित् पथ दिखाए जग को बिखरे जो यूँ तूफाँ से तो उसे भारत नहीं समझना एक आवाज है ये भारत,जो मधुर ज्ञान दे जगत को कहीं गुम अगर हो जाए तो उसे भारत नहीं समझना एक विचार है ये भारत, संगठित करे जो जगत को विभाजन अगर जो चाहे तो उसे भारत नहीं समझना एक कर्म है ये भारत, जो जीवन सिखाए जगत क... »

काश्मीर और अवध हमारा है हिन्दुस्तान हमारा है।

चांद और सूरज हमारा है धरती और आसमान हमारा है कश्मीर और अवध हमारा है हिंदुस्तान हमारा है न कुछ रहा जो तुम्हारा है तोप तलवार गोला बारूद मिसाइल जंखिरा की मात्रा हमपर भारी है अब न कश्मीर बंटने पायेगा धरा पर रामराज ही रहे पायेगा अब जंग छिड़ने वाली है करना यह सरहद तुम्हें खाली है आने वाला तूफान भारी है यदि जान तुम्हें प्यारी है तो भाग चलो यहाँ से कयामत आने वाली है – रीता अरोरा »

माटी का कर्ज

अनजानी राहों पर बिन मकसद के मैं चलती हूँ जबसे तुम से जुदा हुई हूँ तनहाईयों में पलती हूँ कब आओगे तुम प्रियवर अब और सहा नहीं जाता है बिन तुम्हारे जीवन मुझसे अब न काटा जाता है तुम से ही मेरा ये दिन है तुम से ही ये रैना है तुम बिन सूनी ये दुनिया तुम बिन बैचेन ये नयना भीगी पलकें भीगे नैना भीगी दामन चोली है ऑख़ों का काजल माथे की बिंदिया हंस – हंस कर तुम्हें बुलाने हैं सुनो प्रियवरम मेरी भी मजबूरी ... »

तिरंगे का मान

लेखनी को पुष्प चढ़ाकर भाव ह्रदय से सजाकर ज्ञान का भंडार भरकर प्रेम – अश्रु के साज से आज कुछ ऐसा लिखूॅ गीता लिखूॅ कुरान लिखूॅ वेद लिखूॅ ग्रन्ध लिखूॅ राम लिखूॅ – कृष्ण लिखूॅ सच लिखूॅ या झूठ लिखूॅ आईने सा स्पष्ट लिखूॅ आज देश पर छाया जो दुशमनों का कोहराम है देश वासियों का हुआ जीना अब मुहाल है मिलकर सब भारतवासी बचा लें अपना मथुरा कासी अवध और काश्मीर के साथ माँग लें अपना ननकाणां साहब और माँग... »

नमन करो उन वीरों को

शहीदों को नमन ****** नमन करो उन वीरों को जिनसे से यह देश हमारा है उनके साहस के दम पर महफूज घरों में रहते हैं । उन वीरों के दम से अपनी होली और दिवाली है मावस की काली रातें उनके दम से उजियाली हैं उनको अपनी मातृभूमियह प्राणों से भी प्यारी है सीमाओं पर बनकर प्रहरी शेर शूरमा तने हुए । राष्ट्र प्रेम की खातिर अपना वो सर्वस्व लुटाते हैं मातृभूमि की रक्षा हेतू अपनी जान गंवाते हैं तन मन धन से सैनिक अपना पूर... »

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