shayari

हर कोई हमारे करीब आना चाहता है

हर कोई हमारे करीब आना चाहता है मगर रिश्ता कोई नहीं निभाना चाहता है चाहत तो हमारी बस सच्चे दिल की ही है मगर झूठी दुनिया में सच कहां नजर आता है »

क्या होगा. . . . . .❤

क्या होगा. . . . . .❤ कभी सोचा है, कि जब तुझको, मेरी याद आई तो क्या होगा; ना हम होंगे, ना तुम होगे, और ना तन्हाई तो क्या होगा !   कि आकर लफ्ज़ होठों तक, पलट जायेंगे मुमकिन है; किसी से कह दिया, और हो गयी, रुस्वाई तो क्या होगा!   करोगे जज़्ब कैसे तुम, जो कहना ना हुआ मुमकिन; ख़ुशी की महफ़िलों में आँख, भर आई तो क्या होगा!   ये माना जीतने का हुनर है, तुम्हारे पास मोहब्बत में; पर सोंचते हैं, ... »

लम्हा लम्हा जीने वालों का मक़ां कोई नहीं

  वह रहे कैदे जमां में जो मकीने आम हो लम्हा लम्हा जीने वालों का मक़ां कोई नहीं     »

तेरी हरयाली इन आँखों में है वरना

तेरी हरयाली इन आँखों में है वरना

तेरी हरयाली इन आँखों में है वरना, दिल तो कल भी रेगिस्तान था और आज भी है »

उसके चेहरे से …

उसके चेहरे से …

उसके चेहरे से नजर हे कि हटती नहींवो जो मिल जाये अगर चहकती कहीं जिन्दगी मायूस थी आज वो महका गयीजेसे गुलशन में कोई कली खिलती कहीं वो जो हंसी जब नजरे मेरी बहकने लगीमन की मोम आज क्यों पिगलती गयी महकने लगा समां चांदनी खिलने लगीछुपने लगा चाँद क्यों आज अम्बर में कहीं भूल निगाओं की जो आज उनसे टकरा गयीवो बारिस बनकर मुझ पे बरसती गयी कुछ बोलना ना चाहते थे मगर ये दिल बोल उठाधीरे- धीरे मधुमयी महफिल जमती गयी आँ... »

एक मुलाकात की तमन्ना मे

आपकी यादो को अश्कों में मिला कर पीते रहेएक मुलाकात की तमन्ना मे हम जीते रहे आप हमारी हकीकत तो बन न सकेख्वाबों में ही सही हम मगर मिलते रहे आप से ही चैन ओ सुकून वाबस्ता दिल काबिन आपके जिंदगी क्या, बस जीते रहे सावन, सावन सा नहीं इस तनहाई के मौसम मेंहम आपको याद करते रहे और बादल बरसते रहे जब देखा पीछे मुडकर हमने आपकी आस मेंएक सूना रास्ता पाया, जिस पर तनहा हम चलते रहे »

यूं इकरार ए इश्क मे तू ताखीर न कर

यूं इकरार ए इश्क मे तू ताखीर न कर

यूं इकरार ए इश्क मे तू ताखीर न कर चले गये जो इकबार, फिर ना आयेंगे कभी »

कौन कहता है

कौन कहता है मुहब्बत की ज़ुबाँ होती है ये हक़ीक़त तो निगाहों से बयाँ होती है वो न आये तो सताती है ख़लिश सी दिल को वो जो आये तो ख़लिश और जवाँ होती है (ख़लिश = चुभन, वेदना) रूह को शाद करे, दिल को जो पुरनूर करे हर नज़ारे में ये तनवीर कहाँ होती है (शाद = प्रसन्न), (पुरनूर = प्रकाशमान, ज्योतिर्मय), (तनवीर = रौशनी, प्रकाश) ज़ब्त-ए-सैलाब-ए-मुहब्बत को कहाँ तक रोकें दिल में जो बात हो आँखों से अयाँ होती है (ज़ब्त-ए-... »

दर्द ए दरिया कैद है इस दिल में

दर्द ए दरिया कैद है इस दिल में

»

Page 60 of 60«585960