वाह रे दुनिया ! मै चीखा–चिल्लया तेरी बातों से। “हाँ” मै चीख रहा हूँ,चिल्ला रहा हूँ,मेरा कोई औकाद नही किसी पर अवाज उठाने की! केवल जख्मों के छालों से सदा सुने है,सिसक -सिसक कर सोई […]

हमे तो मालुम था, पतझड़ मे पत्ते भी साथ छोड़ देते है,देखकर मेरी तबाही को अपनो भी साथ छोड़ देते है!! बस तु तो चलती हुई मुशाफीर थी- ये मतलबी दुनिया बाप को भी छोड़ […]

अब मुझे मेरी जिन्दगी या श्मशान चाहिए!! गरीब हूँ मालिक मुझे मेरा सम्मान चाहिए । मै रोता रहता हूँ अमीर के अत्याचारो से,धिन जाती है मुझे अपने उपर हो रहे” मुझे समानता का अधिकार अपने […]

वस्ती की पुकार ———————————– डरावना–डरावना सी भय लगी इस वस्ती मे। चार–पाँच लफँगा हर मोड़ पर खड़ा इस वस्ती मे। कितना राज छुपाए डरा–डरा सा हूँ खादी पहने वाले के बच्चे बनकर लफँगा खड़े इस […]