हिन्दी के प्रथम तिलस्मी लेखक:-“देवकीनन्दन खत्री”

देवकीनन्दन खत्री जी की पुण्यतिथि:- जन्म:- (18 जून 1861) मृत्यु:- (1 अगस्त 1913) ************* हिन्दी के प्रथम तिलस्मी लेखक वा कहानीकार देवकीनन्दन खत्री जिनकी है…

दोस्त

मिलते हैं कुछ फ़रिश्ते ज़िन्दगी में, बना देते हैं रिश्ते ज़िन्दगी में, साथ निभाऍं हॅंसते-हॅंसते, ज़िन्दगी में। टूट जाए जब दिल, जिगर हो कर निराश,…

बारिश

बारिश की यह बूंदे बस गिरे जा रही हैं दिल के आग को सीए जा रही हैं रो हम रहे हैं यहां पढ़ सभी अनजान…

जिंदगी

सर्द इस मौसम मे बस जिए जा रहे हैं दामन मे बस सफा है इसी का घुमान किया तो तुम घमंड समझ लिए तू पाक…

बारिश

बारिश के बूंदों से याद आती हैं वोह सौंधी सी खुश्बू जो मन को भाती थी वोह गली वोह नुक्कड़ जिनमे ख्वाब देखा था जेब…

मां शारदे स्तुति

🌹🌹🌹🌹🌹🌹 वीणावादिनी मां पद्मनिलया, ज्ञान का दीप जला देना, तिमिर मिटे अज्ञानता का, मां पथ आलोकित कर देना। 🌹🌹🌹🌹🌹🌹 श्वेतवस्त्रा मां सुरवंदिता, आन कंठ सुर…

“कटार”

इल्ज़ामो की तलवार चली है हम पर बेबुनियाद मुकदमे चले हैं हम पर कोशिश बहुत की पर ना बचा पाये खुद को यार ने ही…

है एहसास मुझे

माशूम ज़िंदगी के तुम्ही तो सहारे थे भोले चंचल मन को कितने प्यारे थे नयनो के दर्पण में अक्स उभरता था मुझे और खिलोने की…

शिव भोलेशंकर

हे! महेश्वर शंभू दीनानाथ, कृपादृष्टि बरसाओ देना साथ, हम शरण तिहारी आए हैं, करूं विनती जोडूं दोनों हाथ। शशिशेखर विश्वेश्वर दिगंबर, तुम परमपिता हो परमेश्वर,…

साजिश

प्यार की जमीं साजिश के तहत तैयार की गयी ऊर्जा से भरे भारती संतान को बीमार कर गयी एक उम्र गुजरी अपनों से सीख कर…

गुरु वंदन

हे गुरुवर गुणशील आगारा। चरण कमल बन्दौं मैं तुम्हारा।। तेरी कृपा ने चलना सिखाया। जीवन के अंधकार मिटाया।। अग जग में किया उजियारा। चरण कमल…

आकलन

कहना है बहुत कुछ शब्द कम पड़ जाते अफ़सोस सदा रहता है काश पूरा कह पाते उनको कम कहना था अधिक शब्दों को गाते बात…

माँ

माँ का प्यार है बड़ा निराला मिले उसे जो किस्मत वाला माँ ममता करुणामय सागर धन्य हुआ जग तुझको पाकर वेद पुराणों की गाथा में…

आहट

इतना भिगो मत मुझको ओ बादल! दल-दल बन न डुबो दूँ, मुहब्बत। खाली-खाली लगूँ या हरी सी हरियाली को बिछा दूँ। चुप ही रहूँ या…

न जाओ

आंखें चुरा कर जाओ भले ही, दिल न चुरा कर जाओ। बिखरे हुए हैं मोती नयन के, उनको जुड़ा कर जाओ। बाहर बरखा बरस रही…

“रिश्वतखोर”

रिश्वत ————— रिश्वत लेकर ही काम करते हैं कुछ लोग और धर्मात्मा बनते हैं कुछ लोग यूँ उछल उछल कर अपने परोपकारों का गाना गाते…

रिमझिम बूंदें

रिमझिम बूंदे बहुत हैं बरसीं, अखियाँ तुझे देखन को तरसीं। बिजली चमक रही है चम-चम, बरस रहा है पानी छम-छम। नभ में काली बदली छाई,…

बुरा वक्त था…

अब कब तक तुम उसे यूँ ही याद करोगी अपने बेचैन दिल को और बर्बाद करोगी जिंदगी जीने का नाम है उसे यूँ ना गंवाओ…

बूंदें…

टिप-टिप करती हुई बूंदे मन को बहुत भा रही हैं बूंदों की बौछार के साथ तेरा पैगाम ला रही हैं बिजलियों की गड़गड़ाहट सता रही…

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