तबाह हो गए…

दुश्वार हो गया जीना अब तो काटों से छिल गए तलवे अब तो। मोहब्बत में हुए हम तबाह लोग कहते हैं, हम बन गए शायर…

चरित्रहीन

तड़पाने के अलावा और तुमने किया ही क्या है बार बार मुझको चरित्रहीन कहा है ये कैसी मोहब्बत है तुम्हारी ? जिससे प्यार किया उसी…

दिलजले

सोचती हूँ कल तुम क्या थे आज क्या हो गए हो पहले तो कहा करते थे चौदहवीं के चाँद हो तुम मेरी धड़कन की साज…

फुर्सत

एक सुबह चाय ने मुझ से कहा फुर्सत हो तो क्यों नहीं बैठ जाते। तुम्हारे मन मस्तिष्क को हम अंदरुनी ताजगी से भर देते।।

नूर महल

रौशनी से नहा रहा है आज नूर महल, मुद्दत बाद निकला है चाँद मेरे शहर मे । ए फीज़ा तुझे है काली घटा की कसम,…

भावनाओं के भवसागर में

सर्वस्व न्योछावर कर दिया तुझ पर मोती, माणिक्य पन्ना, हीरा हृदय की विक्षिप्त भावनाएं, क्रूर सम दृष्टियों से दृष्टिपात करके यौवन की प्रथम वर्षगांठ पर…

पिता

पिता एक ऐसा शब्द है जिसकी जितनी व्याख्या हो वह कम है, पिता जीवन का मूल है, हमारा जीवन उनके चरणों की धूल है, पिता…

पितृ दिवस

आपने बहुत किया हमारे लिए काबिल बनाया, जी सकूं, न सिर्फ़ अपने लिए काम आऊं, कुछ कर पाऊं मैं, आपके लिए सहारा बनके नहीं,साथ रहूं…

पिता दिवस

जीवन भर बिना थके,मुस्कुराते हुए अपने संघर्षरत बच्चे को कांधे पर उठाकर चलने वाले पिता का पर्याय बन सके, ऐसा बिंब, रचा ही नहीं गया…

अमृत

हलाहल मिला था तो, अमृत भी मिलेगा समुंद्र मंथन में, सब कुछ मिलेगा l घबराना नहीं है, हिम्मत है रखनी हमें ज़िन्दगी की जंग जीतनी…

समुंद्र मंथन

आसुरी शक्तियों का जोर है अभी, इनको मिटाना है शोर करें सभी करना है समुंद्र मंथन, हाँ, निकलेगा पहले हलाहल मगर बहेगी अम्रृत धारा भी…

मेरे बाबू जी

जिनके बिना मेरा नाम अधूरा जिनके साथ मेरा परिवार पूरा वो छत है बाकी सब दीवारें है एक उन्होंने पूरे घर के सपने सँवारे है…

तेरी यादें

ज़िन्दगी को जहर की तरह पी रही हूँ l रोज तिल-तिल मर रही हूँ, मगर जी रही हूँ l ज़िन्दगी की आधी ख़ुशियाँ छिन गई…

विरासत

विरासत जिन्दगी की मिली है जो हमको समझ पाने में अक्षम कैसे बतलाये तुमको। खुली हवा में जीना स्वचछ सांस लेना निर्मल था पानी उसे…

जीवनसाथी

इस बेरंग सी जिंदगी में मानो, रंग जो आप भर रहे कल की इस कोमल कली को हाथ थाम कर सिखला रहे जब बाहें हो…

धर्म के ठेकेदार

कविता-धर्म के ठेकेदार —————————— इस मुस्कुराहट में कौन सी जात छुपी है, चेहरे की कोमलता में कौन सा धर्म छुपा है, आज बता दो- धर्म…

रात भर

झील के आगोश में कल चाँद फिर ढ़लता रहा। एक सितारा चाँदनी में रात भर जलता रहा। रात भर इक शक़्ल मेरी आँख में पलती…

सावन

बदलती ऋतुओं से बदल रहा है मन देखते इन नजारों को बाबरा हो रहा है तन बादलों के टूटने की लड़ी आ रही है वह…

कहते मेरे है

एक छत है मगर अलग अलग कमरे है कही गम कही खुशी कही बेखबरी सभी अलग अलग चेहरे है कोई नही जानता रात किसकी कैसी…

New Report

Close