Master sahab

  • बहुत शानदार प्रस्तुति👏👏👏👏👏

    विजयादशमी के उपलक्ष में
    सावन द्वारा प्रायोजित फोटो प्रतियोगिता में इतनी सुंदर कविता लिखी है आपने अपने अंदर के रावण को मारने के बाद रावण दहन करने की सलाह काबिले तारीफ है आपकी कविता का कला पक्ष एवं भाव पक्ष प्रधान है साथ ही आपने बहुत ही साधारण प्रतीक भाषा का प्रयोग करते हुए कविता को लिखा है तथा रामराज्य स्थापि…[Read more]

  • Master sahab posted a new activity comment 1 month, 3 weeks ago

    जी सर
    आप बात को समझ गये हैं
    यह मेरा सौभाग्य है
    आशा करता हूँ की अब सावन पर आलोचना का उचित प्रतिमान स्थापित होगा।
    🙏🙏🙏🙏🙏

  • आधुनिक कविता की विधा लेकर आपने जिस प्रकार मनुष्य के अविश्वास की बराबरी अंधकारमय
    आकाश से की है
    वह अपने आप में नवीन उपमा है यह सत्य ही है मनुष्य को अपने ऊपर अडिग विश्वास होना चाहिए और तभी किसी पथ पर कदम बढ़ाना चाहिए जब उसे उस पथ का ज्ञान हो किसी ने कहा है

    पाना है मंजिल तो अपना रहनुमा खुद बन
    वो अक्सर भटक गये जिन्हें सहारा मिल गया।
    👍&#x1f44d…[Read more]

  • Master sahab posted a new activity comment 1 month, 3 weeks ago

    बिल्कुल सही कहा सतीश जी आपने कविता लिखने में या हिंदी साहित्य की किसी भी विधा को लिखने में बहुत मेहनत लगती है और कवि की सबसे बड़ी पूंजी होती है सराहना यदि उसे उचित सराहना ना मिले तो वह हतोत्साहित हो जाता है परंतु यदि उससे अच्छी सराहना मिलती है तो वहां अपना लेखन कार्य दोगुनी गति से करना शुरू कर देता है परंतु सतीश जी मेरा विचार सिर्फ और सिर्फ आचार्य…[Read more]

    • बिल्कुल उचित बात है सर।
      इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।

    • जी सर
      आप बात को समझ गये हैं
      यह मेरा सौभाग्य है
      आशा करता हूँ की अब सावन पर आलोचना का उचित प्रतिमान स्थापित होगा।
      🙏🙏🙏🙏🙏

  • सही कहा आपने गीता जी अनजान व्यक्तियों द्वारा उठाया गया उपहार हमारे ह्रदय को नहीं चुभता
    और जब कोई हमारी अच्छाइयों गुणों को तथा हमारी सीरत को जान जाता है तो वह वाकई में हम पर जान देता है आपने जिस प्रकार यमक अलंकार का प्रयोग किया है उसने आपकी कविता में चार चांद लग जाते हैं

  • यह तो बड़ी हास्यास्पद कविता हो गए आपने बिल्कुल सत्य कहा जिस प्रकार सुबह-सुबह किन्ही कारणों से आंख खुल जाते हैं और उनिदी आंखों से उठना पड़ता है Tu Hriday mein kuch ISI Prakar ki भावनाएं उठती है कचरा पार्टी के ऊपर बहुत ही अच्छी रचना और जैसा कि ऋषि जी ने कहा कि आपने कलम के द्वारा समाज में फैली अराजकता सांप्रदायिकता तथा संवेदनशील मुद्दो…[Read more]

  • आपकी रचना पढ़ कर काका हाथरसी की कविता हमें याद आ गए आपने जिस प्रकार
    आधुनिक युग के अमृत के बारे में बताया है तथा उसे शब्दों में पिरोया है साथ ही आपने अपनी काव्य प्रतिभा और आशु कवि की व्याख्या भी कर दी है इन सभी विषयों को आपने सम्मिलित करके अपनी कविता के शिल्प को बहुत मजबूत कर लिया है वाकई में आप बहुत ही आगे जाने वाले हैं

  • Aapki yah Kavita Aap Se Bhi Jyada Pyari Hai Shastri ji

  • जीवनसाथी की महत्ता को बताते हुए तथा शारीरिक सौंदर्य वासना को नकारते हुए जिस प्रकार आत्मीयता को तथा आंतरिक सुंदरता के बारे में वर्णन किया गया है प्रज्ञा जी आपके द्वारा वह आपकी प्रखरता को काव्य प्रतिभा को प्रदर्शित करता है यह काम बहुत ही दूभर था परंतु आपने जिस प्रकार कर दिखाया वहां अचंभित करता है

  • जिस प्रकार नायिका ने अपने नायक के बारे में बताया है और नायक की बुद्धि के व्यक्तित्व के गुणों का बखान किया है वह काबिले तारीफ है नायक के द्वारा कहे गए वचन पुरुषत्व की स्थापना करते हैं बहुत ही लाजवाब रचना
    👏👏

  • बेबस और गृहस्थ नारी अपने जीवन की विसंगतियों से जब बुझिल होकर टूटती है तो कुछ इसी प्रकार टूटती है उसे अपने आंचल से सभी को प्यार दुलार देना पड़ता है बच्चों को बड़ा करना पड़ता है और एक वृक्ष की तरह अपने हर रिश्ते को पुष्पित फलित करना पड़ता है परंतु जीवन की इस उधेड़बुन में उसकी स्वयं की ख्वाइश है उसका अस्तित्व नष्ट हो जाता है उसे तमाम प्रकार के…[Read more]

  • भावनात्मक रूप से आपकी रचना बहुत सुंदर है तथा जी मनसे और सोच से आपने इस कविता को सजाया है उसका कलापत उसका शिल्प बहुत ही मजबूत है आपकी यह चंद पंक्तियां गत्यात्मक है भाषा शैली सरल और सहज है तथा आपने जिस प्रकार सावन परिवार के बारे में तथा कविता के कुछ नाम चीनी प्रकारों के बारे में बातें की है और अपनी कविता को सजाया है वह आपकी दुर्लभ प्रतिभा को व्यक्…[Read more]

  • मैं सावन के मंच पर अपनी पहली पोस्ट डाल रहा हूं उम्मीद करता हूं आप सभी का प्यार मिलेगा।
    सावन पर सभी कवि अच्छा लिखते हैं कभी कुछ रचनाएं अच्छी होती हैं ।
    तो कभी कुछ गुणवत्ता और शिल्प की दृष्टि से कम गुणवान भी होती हैं।

    इतने समय से आप लोग एक दूसरे की कविताएं पढ़ रहे हैं और एक दूसरे को जानते हैं।
    तो आपके बीच में इतना प्रेम तो जरूर स्थापित हो गया…[Read more]

    • बहुत उचित लिखा है सर, बात का अनुसरण जरूर किया जाना चाहिए। हम तो कवित्त्व में ही रमे रह पाते हैं। हां आवश्यकतानुसार अपने साथी कवियों की कविताओं का आनंद लेकर अपनी अनुभूति के अनुसार प्रोत्साहन की टिप्पणी कर देते हैं।
      आपकी सलाह अनुकरणीय है।

      • बिल्कुल सही कहा सतीश जी आपने कविता लिखने में या हिंदी साहित्य की किसी भी विधा को लिखने में बहुत मेहनत लगती है और कवि की सबसे बड़ी पूंजी होती है सराहना यदि उसे उचित सराहना ना मिले तो वह हतोत्साहित हो जाता है परंतु यदि उससे अच्छी सराहना मिलती है तो वहां अपना लेखन कार्य दोगुनी गति से करना शुरू कर देता है परंतु सतीश जी मेरा विचार सिर्फ और सिर्फ आचार्य…[Read more]

        • बिल्कुल उचित बात है सर।
          इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।

        • जी सर
          आप बात को समझ गये हैं
          यह मेरा सौभाग्य है
          आशा करता हूँ की अब सावन पर आलोचना का उचित प्रतिमान स्थापित होगा।
          🙏🙏🙏🙏🙏

  • 4 पंक्तियों में आपने गहरी संवेदना व्यक्त की है सांझ और सवेरा के अंतर को जिस प्रकार आपने व्यक्त किया है वह उपमा
    बेहद सराहनीय है

  • निराशा को व्यक्त करती हुई आपकी यह पंक्तियां गागर में सागर भरने का काम करती हैं आप अपनी कविताओं में जिस प्रकार की शब्दावली का प्रयोग करते हैं वह सराहनीय है और आपको हर कवि से अलग रखती है आपकी या व्यक्तिगत प्रतिभा

  • बिरहा वर्णन करना सबके बस की बात नहीं होती महादेवी वर्मा जैसे प्रखर महिला कवित्री यों ने इसका वर्णन किया है आप उम्र में छोटे हैं परंतु आप का जज्बा सराहनीय है आपकी हर एक रचना काबिले तारीफ है

  • साँझ पढ़िए

  • सतीश जी जिस प्रकार आपने सांस का मानवीकरण करके उसका मनोरम चित्रण किया है वह काबिले तारीफ है प्राकृतिक सौंदर्य को व्यक्त करने का और लिखने का जो जिम्मा आपने उठाया है वह सार्थक सिद्ध हुआ है बहुत ही खूबसूरत और लाजवाब रचना है ऐसे ही लिखते रहिए

  • जब आपका प्रणब भीष्म प्रतिज्ञा के समान है तो आप अवश्य ही सफलता को हासिल करेंगी और सफलता आपके कदमों तले अवश्य ही होगी यह शुभकामना है मेरी

  • डोली अरमानों की या शीर्षक ही अपने आप में पूरे शिल्प को और कविता को समेटे हुए हैं कविता की एक खास बात होती है कि उसका शीर्षक है पूरी कहानी कह रहा हूं आपका यह शीर्षक ऐसा ही है की शीर्षक पढ़ते ही पूरी कविता पढ़ने को पाठक मजबूर हो जाता है वाकई में कभी-कभी जब विसंगत जीवनसाथी मिलता है तो ऐसे ही उठती है डोली अरमानों की शिल्प बहुत ही मजबूत औ…[Read more]

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