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सर्वश्रेष्ठ कवि व सदस्य : सतीश पांडेय



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Latest Activity

  • बेटियों का दर्द
    तो सब जानते हैं
    पर बेटों के दर्द को
    कहां किसी ने देखा है
    बेटियाँ चली जाती हैं
    घर छोड़ कर
    फिर उस घर की
    बेटा ही तो देख-रेख करता है
    प्यार वह भी करता है
    अपने माँ बाप से
    अकेले होने पर सि […]

  • भले ही सो रहा हूँ मैं
    थका-माँदा यहाँ
    फुटपाथ में
    मगर चलती सड़क है
    रुकती है बमुश्किल
    एकाध घंटा रात में।
    उसी में नींद लेता हूँ
    उसी में स्वप्न आते हैं,
    कभी जब राहगीरों के
    बदन पर पैर प […]

    • मगर असहाय हूँ
      घर से निकाला हूँ
      कमजोर हूँ मैं वृद्ध हूँ
      अब तो दिवाला हूँ।
      __________ असहाय वृद्ध व्यक्ति का बहुत ही मार्मिक चित्रण प्रस्तुत करते हुए कवि सतीश जी की बेहद संजीदा रचना, लाजवाब अभिव्यक्ति, उम्दा लेखन

    • बहुत गंभीर रचना

  • छोड़ दे छोड़ दे उदासी को
    कोई फायदा नहीं है चिंता से
    गम में मत रह बढ़ा न दर्द ए दिल
    कोई फायदा नहीं है चिंता से।
    दुःख तो होता है कुछ भी खोने से
    न कोई लौटता है रोने से
    कुछ नया सोच दूर पीड़ा कर
    ख्वाब ला मन में त […]

    • कैसे पायेगा लक्ष्य तू ही बता
      ऐसे मायूस पथ में होने से,
      तैर ले बाढ़ है दुःखों की अगर
      अपनी किस्मत को यूँ डुबोने से।
      ____________ पाठक को प्रोत्साहित करती हुई कवि सतीश जी की बहुत ही श्रेष्ठ रचना, उच्च स्तरीय लेखन

    • बहुत ही उत्तम रचना

  • कोरोना का कहर हुआ,
    गली-गली हर शहर हुआ।
    आ गई है दूजी लहर,
    कोरोना ने कितना बीमार किया।
    दर्द दिया लाचारी दी,
    बहुत बड़ी बीमारी दी
    परेशान बहुत किया इसने,
    कितनी बड़ी महामारी दी।
    फ़िर भी, किसी […]

    • समसामयिक रचना, सही बात, उत्तम काव्य

    • आपकी इस प्रेरक समीक्षात्मक टिप्पणी के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद इंद्रा जी, हार्दिक आभार

  • चन्दा की नगरी में ले चल प्रीतम,
    चुनरी में सितारे जड़वाऊॅंगी।
    चाॅंद की रौशनी में,
    तुम्हारे संग जश्न मनाऊंगी।
    दो-चार सितारे अलग से लूॅंगी,
    तुम्हारे कुर्ते में लगवाऊॅंगी।
    दोनों घूमेंगे चमचम करते,
    पायल की […]

    • चन्दा की नगरी में ले चल प्रीतम,
      चुनरी में सितारे जड़वाऊॅंगी।
      चाॅंद की रौशनी में,
      तुम्हारे संग जश्न मनाऊंगी।
      —- वाह बहुत ही सुन्दर रचना। अद्भुत भाव,

    • इस प्रेरक और सुंदर समीक्षा के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी

  • वफा तो वही करेगा
    वफा करना जिसका काम हैं,
    अक्सर वफादार है बेवफाई करते हैं
    बेवफा तो यूं ही बदनाम हैं।।

  • कई साल गुजर गए पर
    आज भी महसूस होता है
    जब भी तू इन गलियों से गुजरता है
    तेरा आना जाना लगा रहता है
    दिल की गलियों में
    आंखों की पुतलियों में तू घूमता रहता है
    इश्क करना है तो इश्क कर ले
    मिटा देना है तो मुझे दिल […]

  • Mehmoodazmi khan's profile was updated 1 day, 3 hours ago

  • एक दिन तो जाना है तुझको,आज तो साथ रहने दे,

    ये दर्द ज़फ़ा का तेरे संघ सहने दे.

    ऐसे न नज़रे चुरा मुझसे,हूँ मै आखिर तेरा दीवाना,

    है जब तक साँस बाकि,तब तक तो तेरे इश्क़ में मुझको जलने दे.

    ऐसे न जुदा […]

  • Jo bit gai so baat gai
    Chalo ek nai suruat karen

    Mera gham tu lele tera gham mailelun
    Chal baith ek duje se kuch naat karen

    Bhuli bisry yaado se dard k faoware uthte hain
    gujara jamana bit gaya q usse […]

  • मेघा आए रे आए रे,
    ऐसी पड़ी फुहार।
    भीगी मेरी कॅंचुकी,चुनरिया
    नीर गिरे भरमार।
    श्याम वर्ण के मेघा बरसे,
    खूब गिरी जल-धार।
    इतनी तो होली पर भी ना भीगी,
    जितनी भीगी बारिश में इस […]

    • बहुत ही उत्तम प्रस्तुति

    • बहुत-बहुत धन्यवाद इंद्रा जी

    • मेघा आए रे आए रे,
      ऐसी पड़ी फुहार।
      भीगी मेरी कॅंचुकी,चुनरिया
      नीर गिरे भरमार।
      —- कवि गीता जी की बहुत ही सुरम्य रचना । वाह

      • उत्साहवर्धन और सुंदर समीक्षा हेतु आपका बहुत-बहुत धन्यवाद सतीश जी

  • कर के आया था मजदूरी,
    था थकन से चूर।
    रूखा-सूखा खा कर सो गया,
    वह बूढ़ा मजदूर।
    ओढ़ी एक फटी थी चद्दर,
    उसके सूराख़ों से घुस गए मच्छर।
    हाथ पैर पटकता था,
    मच्छर भगाने को।
    एक पॅंखा भी नहीं था,
    उसके […]

  • ईश्वर का पता कहाँ है
    मन ढूंढता रहा है,
    कोई कहे यहाँ है
    कोई कहे वहाँ है।
    मगर जब गौर से देखा
    मुझे ईश्वर दिखा उसमें
    कि था जब भूख से व्याकुल
    खिलाई रोटियाँ जिसने।
    गिर पडूँ तो सहारा दे
    वही है देवता मेरा
    जरू […]

    • दिखा दे नेकियों का पथ
      प्रेरणा दे मुझे सत की
      मुझे उत्साह दे दे जो
      वही भगवान है मेरा।
      जहाँ नफरत न हो बिल्कुल
      मुहब्बत का रहे डेरा,
      _________ संपूर्ण कविता में एक सच्चाई और यथार्थ के दर्शन हो रहे हैं। जीवन के प्रत्येक दृष्टिकोण को अपने में समाहित करती हुई कवि सतीश जी की, बहुत ही श्रेष्ठ रचना, उच्च स्तरीय लेखन

    • बहुत ही उत्तम लेखनी

  • रोशनी कर दो ना
    जला दो बल्ब सारे,
    देखने हैं मुझे
    दिवस में चाँद तारे।
    अंधेरे से बहुत
    उकता गया हूँ,
    मन भरी पीड़ को
    लिखता गया हूँ।
    अब मुझे जूझना है,
    नया स्वर फूँकना है,
    बुलंदी है जगानी
    नहीं अब टू […]

    • जिन्दगी की कहानी
      सदा चलती रही है,
      छोड़ कड़वाहटें सब
      मधुर रस स्वाद चखना है।
      _________ जीवन की कठिनाइयों में ,उत्साहवर्धन करती हुई कवि सतीश जी की बहुत सुंदर और प्रेरक रचना, शिल्प और भाव का अनुपम संगम, लाजवाब अभिव्यक्ति..अति उत्तम लेखन

    • बहुत सुन्दर कविता लिखी है वाह

    • बहुत सुंदर कविता है

  • हर अवसर भुनाना होगा
    मौका मिलेगा तुझे भी
    एक दिन मुश्किल से
    उसे बस कस कर लपकना होगा।
    हो अगर कंटक युक्त झाड़ी तो
    बीच में फूल बनकर
    महक के साथ महकना होगा।
    उदासी फेंक कर
    कुछ दूर अपने से तुझे,
    जिगर […]

    • बहुत प्रेरक रचना

    • जिगर मजबूत कर हँसना होगा।
      राह भटका रहे कारक
      नजरअंदाज कर,
      तुझे मंजिल की सीढ़ी में
      युवक चढ़ना होगा।
      मैं नहीं हार मानूँगा
      __________ युवा वर्ग को प्रोत्साहित करती हुई कवि सतीश जी की बहुत ही श्रेष्ठ रचना। उत्तम शिल्प और भाव सहित अति उत्तम लेखन

    • उच्च स्तरीय रचना

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आधुनिक कवियों को एक मंच उपलब्ध कराना ही हमारा प्रयास है, जहां नवीन प्रतिभाओं को उपयुक्त पहचान और सम्मान दिया जा सके। इसके साथ ही हम आधुनिक साहित्य की बिखरी हुई अनमोल रचनाओ का संकलन करना चाहते है ताकि अगली पीढ़ी इस अनमोल धरोहर का आनंद और लाभ ले सके|

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