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सर्वश्रेष्ठ कवि : प्रतिमा चौधरी
सर्वश्रेष्ठ आलोचक : गीता कुमारी
सर्वश्रेष्ठ  सदस्य :  सतीश पांडेय



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Latest Activity

  • सच में बहुत बुरी हूँ मैं
    कमियां ही कमियां हैं मुझमें
    एक भी अच्छाई नहीं है
    पर कमियों के साथ ही
    जो स्वीकार करती है मुझे
    वो है मेरी माँ…
    हर गलती पर मुझे डाटती है
    और फिर माफ कर देती है
    वो है मेरी माँ…

  • जब तुम सामने आए
    हम कुछ ना बोल पाए
    होंठ सिल गये और
    हाथ थरथराये
    क्या हुआ मुझको अचानक
    यह समझ ना मैं सकी
    कहना जो था मुझको तुमसे
    हाय! क्यों ना कह सकी
    कुछ तो गलती थी तुम्हारी
    कुछ हमसे भी हुई
    नजर […]

  • बहुत आहत हूँ मैं
    यूं समझ लो टूट गई हूँ मैं
    मेरी सहेली की दी हुई आखरी
    निशानी भी टूट गई
    सालों पहले जो घड़ी दी थी उसने
    आज टूट गई
    रोई हूँ बहुत परेशान हूँ
    अपने दिल का हाल किससे कहूँ
    वो घड़ी थी मेरी प्यारी
    म […]

  • कई महीनों बाद
    आज अलमारी खोली
    तमाम तोहफे मिले
    कुछ किताबें और
    कुछ पुरानी तस्वीरें भी मिलीं
    उन तोहफों को घण्टों देखकर
    पुरानी यादें ताजा करती रही
    देखती रही मैं अपनी एक-एक तस्वीर को
    कित […]

  • आज बाजार में
    तुम्हें अचानक देखा !
    मानो कोई सपना देखा
    पता नहीं किन खयालों में खोई थी
    कल रात जरा देर से सोई थी
    मन ही मन सोंच रही थी
    काश! तुम्हारे साथ बाजार आती
    तुम्हारी बाइक की बैक सीट पर
    बैठकर इठलाती… […]

  • हिन्दी देवी गीत – भक्ति दान दे दो |
    हे प्रमेशवरी हे दुर्गेशवरी भक्ति दान दे दो |
    काली कपालिनी दैत्य दलिनी शक्ति दान दे दो |
    जगत जननी माँ अम्बे जगदम्बे तुम हो |
    दुख हरनी सुख करनी माँ अम्बे तुम हो | […]

  • तमाम ख्वाहिशें नहीं हैं मेरी
    बस ‘दो मुट्ठी आसमां’ की ख्वाहिश है
    पंख हों उड़ने का हौसला हो
    और हों बेहिसाब मंजिलें
    उड़ चलूं जिसमें मैं अकेली
    ना हो कोई मुश्किलें..
    चाहें जिस राह पर चलूं मैं
    मगर सफर कभी खत […]

  • हुआ है ज़िन्दगी में पहली बार,
    2020 ने रचा इतिहास
    किसी ने भी नहीं देखीं
    होली से दिवाली तक,
    स्कूल की.. छुट्टियां
    फकत हमने ही देखी हैं..

    *****✍️गीता

    • हां प्रज्ञा,और हमारी तो छुट्टी भी नहीं है बस आने जाने का समय ही बचता है, बाकी क्लासेज़ ,एग्जाम सब कुछ वही । घर के काम अलग से । …खैर, सराहना के लिए बहुत सारा धन्यवाद प्रज्ञा..

    • वाह क्या बात, यह इतिहास में दर्ज होगा और सभी को याद रहेगा। अति सुन्दर अभिव्यक्ति

      • हांजी बिल्कुल इतिहास में दर्ज तो होगा ये और सभी को याद भी रहेगा ।समीक्षा हेतु बहुत बहुत धन्यवाद सर..

  • कागज!!
    बड़े काम के हो आप
    युगों युगों से
    आप पर कलम
    अंकित करते आई है,
    तमाम तरह का साहित्य।
    आप में अब तक का
    दुख-सुख, उत्थान-पतन,
    आशा-निराशा,
    उत्साह-अवसाद,
    इतिहास,
    सब कुछ अंकित है।
    मानव क्य […]

    • वाह सर वाह

    • बहुत सुंदर

    • “कागज आपका होना हमारे लिए वरदान है आपकी महत्ता का
      हमें भान है।” “कागज़” पर कवि सतीश जी की बहुत ही सुन्दर रचना ।वाकई में कागज़ एक वरदान ही है । मां सरस्वती का आशीर्वाद ।पुरानी पीढ़ी की जानकारी और भावी पीढ़ी को ज्ञान देने के लिए कागज़ की महत्ता से किसको इन्कार है ।कागज़ पर ही तो अंकित ज्ञान और भावनाओं का भंडार है ।वाह , सर बहुत सुंदर प्रस्तुति

      • गीता जी आपकी समीक्षा शक्ति काबिलेतारीफ है। आपने इतनी सुन्दर टिप्पणी की है। आप विद्वान तो हैं, यूँ ही आपकी लेखनी की विद्वता बढ़ती रहे। सादर अभिवादन।

    • वाह सर कागज पर बेहतरीन कविता

    • वाह सर बहुत खूब

  • कतल कर दो मेरा तुम,
    ज़रा सी फुरसत निकाल के
    यूं इंतजार में तुम्हारे,
    हमसे तड़फा नहीं जाता…

    *****✍️गीता

  • फुरसत से करेंगे हम,
    कभी बातें मोहब्बत की
    लम्हे भी चुराए बहुत,
    ज़िन्दगी में फुरसत ही ना मिली

    *****✍️गीता

  • दोस्तों में उल्लास रहे जब हमारे,
    मुस्कुरा उठते हैं, तब लब हमारे
    व्यथित हो जाए कोई दोस्त गर,
    व्याकुल हो जाएं हम भी इधर
    कोई दुखी होता है गर उधर कहीं,
    कैसे खुश रहेंगे हम इधर हैं यहीं
    गर कोई बैरी बाहरी, दिल को […]

  • स्वारथ की खातिर दूजे का
    दिल नहीं दुखाना है,
    आज नहीं तो कल सबने
    मिट्टी में ही मिल जाना है।
    धुँवा धुँवा होकर उड़ना है,
    बचा हुआ जल में बहना है,
    शेष नहीं रहना है कुछ भी
    यादों को ही रह जाना है।
    यादें भी कु […]

  • लोग कहने है मुहब्बत किसी १ से होता है।
    क्या इस युग में भी किसी १ से ही होता है।।

  • मैं सोचती थी तुम
    बदल गये हो
    नये रंग, नए ढाँचे
    में ढल गये हो..
    पर ऐसा कुछ भी
    नहीं हुआ
    तुम जैसे थे वैसे ही हो..

    बस कुछ लोग पीठ पीछे
    तुम्हारी बुराई किया करते हैं
    मेरे पास बैठकर
    तुम्हारी बातें […]

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