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सर्वश्रेष्ठ कवि व सदस्य : प्रज्ञा शुक्ला



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Latest Activity

  • तुझे मैं भूल नहीं सकता
    तू मेरा पहला प्यार है
    तू ही मेरा इकरार है
    तू ही मेरा इज़हार है
    मैं तुझे भूल नहीं सकता
    तू मेरा पहला प्यार है
    तू मेरी मंजिल है
    तू ही मेरी राह है
    तू तो जानती ह […]

  • मेरी ख्वाहिशें समुंदर जैसी गहरी हैं,
    और तेरा प्यार आँखों के आँसू जितना छिछला।

  • मैं लिखता हूँ रात भर कविता
    तू सुबह पढ़ कर खुश होती है।
    मैं जब कभी हँसता हूँ खुशियों में
    मुझे तू हँसता देख कर रोती है।

  • ख्वाइशें पूरी करूंगा मैं
    तेरी आखिरी दम तक

    साथ निभाऊंगा तेरा
    धरती से फलक तक

  • बेफिक्र बचपन और जिन्दगी है न्यारी,

    थोड़ी शरारत और साँवली सूरत है प्यारी।

    मम्मी की गुड़िया और पापा की दुलारी,

    रहती उनके दिल में बनकर राजकुमारी।

    ख्वाहिशें हुई हैं पूरी चाहे जितनी हो गरीबी,

    भूल से भ […]

  • प्यारे बच्चों, प्यारे बच्चों आओ मेरे पास,
    दूर वहाँ क्यों बैठो हो तुम हो क्यों इतने उदास?
    आओ मिलकर पाठ पढ़ें कुछ सीखें नयी बात,
    मिल जुलकर हम साथ रहें और मन में हो विश्वास।
    प्यारे बच्चों …..
    सुबह उठो जल्दी से […]

  • सूरज की किरणें भी सुबह-सुबह कयामत ढा रही हैं,

    पूछ रही हैं, कैसे हैं वो? जिनकी तुम्हें याद आ रही है।

  • बुरा उन्हें कहूँ तो ये बिल्कुल गलत बात होगी…….

    शायद मैं ही बुरा हूँ तो उनसे मुलाकात क्यों होगी..?

  • जरूरत पड़ने पर आज मुकर गये हो तुम,
    जमाने की तरह कितना बदल गये हो तुम।

    दोस्त!ये मंजर भी गुजर जायेंगे किसी तरह से,
    पर आज चुप रहकर बहुत दर्द दे गये हो तुम।।

  • गरीब की कब्र पर कहाँ कब दीप जलते हैं ,
    रेगिस्तान में आसानी से कहाँ फूल खिलते हैं।

    चाँद-तारों की ख्वाहिश तो महल वाले रखते हैं

    हम जुगनू हैं अपनी फिजाओं के….हम तो खुद से ही खुद को रोशन रखते हैं।।

  • आरज़ू नहीं रखता कि पूरी कायनात में मशहूर हो शक्सियत मेरी।
    जनाब! आप जितना जानते हो सच में उतनी ही है पहचान मेरी।।

  • मोमबत्ती जलाने से अब कुछ न होगा,
    कोर्ट के चक्कर लगाने से कुछ न होगा।

    बलात्कारियों को एक बार जिन्दा जलाकर तो देखो…..

    फिर किसी ‘निर्भया’ और ‘आसिफा’ का बलात्कार नहीं होगा।।

  • संवर कर आऊँगा जब तुम्हारी महफिल में ,
    निगाहें तुम्हारी सिर्फ मुझ पर ठहर जायेगी।

    देखेंगे जब सब तुम्हारे होंठो पर हल्की-सी हँसी,
    महफ़िल में हमारी मोहब्बत ही चर्चा बन जायेगी।

  • उम्मीदों का दीया जलाकर
    इस आशा में बैठे हैं
    कल सूरज खुशियाँ लाएगा
    चाँद सजाकर बैठे हैं

  • तेरी सारी सच्चाई जानता हूँ मैं
    पर तेरी खुशी की खातिर मुझे
    अनजान बनना अच्छा लगता है।
    मैं चाहता हूँ तू अपने मुंह से
    अपनी सच्चाई बता!
    तुझे बेवफा बुलाना ना मुझे खराब लगता है।

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