Poems

कुबूल ह

किसी को दिन तो किसी को रात कुबूल है,
मेरे महबूब् की सुनो हमें हर बात कुबूल है,

जीतने का शौक तो हारने का खौफ भी है,
मगर प्यार की हो बात तो हमें मात कुबूल है,

मुमकिन न सही दिन के उजाले में मिलना,
ख्वाबों में हो जाये तो हमें मुलाकात कुबूल है,

अंजाना हूँ जवाबों की कैफियत से जान लो,
के उनसे हों दो चार तो हमें सवालात कुबूल है,

गुनाह के रंज ओ गम से कोई वास्ता नहीं है,
मोहब्बत में हो जाये तो हमें हवालात कुबूल है।।

राही अंजाना

कैफ़ियत – विवरण, समाचार

रिश्ता

बढ़ती रात के साथ रजनीगन्धा महकता है
बिन लिबास की खुशबू से सारा समा बहकता है।
आज जो तू ने बिताए खिलखिलाते पल,
वो आकर तुझे ज़रूर हँसाएँगे कल।
दुनिया की परवाह में अपना वक्त जा़या न करना;
लोग क्या कहेंगे इस ख़याल से आँखें न भरना।
कौन कहता है बादलों में छुपा चाँद खूबसूरत नहीं?
सच मान हर रिश्ते को नाम की ज़रूरत नहीं!

ओ रे कृष्णा

ओ रे कृष्णा
काहे सताये मोहे
पनघट पर पनिया भरत में
काहे छेड़े मोहे
मटकी फ़ोड़े
राहे रोके
निस दिन बरबस ही
आके टोके
जरा भी लाज शरम
न आये तोहे
ओ रे कृष्णा
काहे सताये मोहे

Kaha chupe ho mere syamre

ओ श्यामरे कहां छुपे हो मोरे श्यामरे,
तेरे दरस को अखियां तरस गई मोरे श्यामरे,
मेरे मन मंदिर में तू ही तू बसा मोरे श्यामरे,
मोहिनी सूरत लट घुघराले तेरे श्यामरे,
उस पर से यह मोर मुकुट बड़ा प्यारा लागे मोरे श्याम रे,
अधर पर मुरली शोभे तेरे श्यामरे,
और यह पितांबर बड़ा ही प्यारा लागे मोरे श्याम रे,
तेरी मुरली की धुन सुन राधा नाची मीरा नाची,
मैं भी तो नाचू मोरे श्यामरे,
ओ श्याम रे कहां छुपे हो मोरे श्याम रे,
तेरे दरस को अखियां तरस गई मोरे श्यामरे |

बशीधर

जब भी मनमोहन, श्याम सलोना, बंशीधर मुरली बजाने लगा,
ह्रदय तल के धरातल पे वो प्रेम की ज्योति जलाने लगा,

कभी गैयों और ग्वालों का प्यारा कन्हिया गोपियों संग रास रचाने लगा,
कभी माँ जसोदा का छोटा सा लल्ला फोड़ मटकी से माखन खाने लगा,

कभी बन्धन में जो बंधा ही नहीं वो ओखल में बन्ध कर मुस्काने लगा,
कभी गोपियों संग श्री राधे के प्रेम में वो प्रेम से प्रेम निभाने लगा॥
राही (अंजाना)

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