Poems

मुक्तक

उठो खड़े हो जाओ वीर तुम,
लड़ लड़ कर अपना अधिकार लो,
दुम दबाकर डर के मारे,
ज़िन्दगी भर लागान मत दो,

महेश गुप्ता जौनपुरी

सरकार

वाह री सरकार
क्या गजब बनाए है तूने ट्रेफिक रूल.
दिमाग मे बस चलता रहता हेलमेट, इंश्योरेंश, लाइसेंस कभी ना मै जाऊ भूल.
वाह री सरकार
सब्सिडी तो तूने give up करा दी
पर सिलेंडर-चूल्हा किसे मिला ?
इसकी तो तूने खबर भी ना दी.
वाह री सरकार
बिजली चोरी के छापे तो तो तूने खूब मारे
25%की रियायत दी…. बाकि सारा तू खा ले.
खा ले ले मर.

सारथी

सारथी

ना जीत में ना हार में
हैं मजा बस प्यार में
कदम कदम बढाये चलो
राह से ना तुम हटो
हे बलशाली हे दयावान
सत्य वचन पर‌ डटे रहो
कलयुग कि धारा को
अन्ततः खदेड़ दो
भाव बुध्दि के समर्थ से
वीर तुम लडे चलो

महेश गुप्ता जौनपुरी

Suraj chanda nabh ye tare

सूरज चंदा नभ ये तारे,
कितने लगते प्यारे ये नजारे ,
मन मारे हिलकोरे,
चलू सूरज चंदा तारों के द्वारे,

सूरज की चमक से चंदा चमके ,
अपनी ही चमक से चमके ये तारे.
नीला रंग ये आसमान के ,
लगता समुद्र हो आसमा में ,

जब जब रिमझिम बारिश बरसे ,
मन मयूरा छम छम नाचे,
पूनम की रात में चंदा ये तारे,
ऐसे चमके जैसे दिवाली हो आसमां में |

Dosti

दोस्ती भगवान का प्रसाद है,
दोस्ती अल्लाह की इबादत है ,
दोस्ती बारिश की फुहार है,
दोस्ती फूलों का हार है,
दोस्ती तितलियों की रंगत है,
दोस्ती फूलों की महक है,
दोस्ती झरनों का संगीत है ,
दोस्ती हर गम की दवा है,
दोस्ती खुशियों की बारात है ,
दोस्ती के बिना जीवन अधूरा है ,
दोस्ती के लिए हम कर देते अपनी खुशियों का कुर्बान,
दोस्ती के लिए हम कर देते हाजिर अपनी जान|

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