अब तो धब्बों की भी नुमाइश होती है
बस चर्चे में रहने की खवाइश होती है
ज़िक्र उसका भला क्यों करता जमाना
यहाँ तो सुर्खिओं की परस्तिश होती है
राजेश’अरमान’
अब तो धब्बों की भी नुमाइश होती है
बस चर्चे में रहने की खवाइश होती है
ज़िक्र उसका भला क्यों करता जमाना
यहाँ तो सुर्खिओं की परस्तिश होती है
राजेश’अरमान’