हिन्दी-उर्दू कविता

वे बेजुबान

नवजात बच्चे दूध पी रहे थे, भूख उसे भी लगी थी, दूध पिलाने में भूख भी बहुत लगती है दूध पिलाने में। उर जल रहा था आमाशय के तेजाब से, बच्चों को छोटी सी झाड़ीनुमा गुफा में छिपाकर चल पड़ी वह घास चरने, पलकें झपका कर मासूमों से कह गई जल्द आऊँगी। शिकारी को पता था, कब जानवर चरने निकलते हैं, ऐसा ही हुआ, थोड़ी देर में लगा शिकारी का निशाना, गोली लगी, गिर पड़ी वह हिरणी। दो बच्चे झाड़ियों में उसका इंतजार करते रह गए धी... »

सुबह सुबह सूरज की किरणें

सुबह सुबह सूरज की किरणें लगती हैं कितनी मनभावन, नई लालिमा युक्त चमक है, लगती हैं निखरी सी पावन। खुश होकर चिड़िया बोली है उठो सखी सुबह हो ली है, एक झाँकती है बाहर को दूजी ने आँखें खोली हैं। छोटे-छोटे पौधों भी तो देख रहे गर्दन ऊँची कर आओ पास आ जाओ किरणों बोल रहे हैं उचक उचक कर। सूरजमुखी उस ओर मुड़ रही बन्द कली इस वक्त खिल रही, ओस बून्द को आत्मसात कर किरणें धरती के गले मिल रहीं। »

आज वह मुरझा गया…!!!

इतना छोटा था उसे सेवा करके बड़ा किया था सोंचा और फले-फूले, चारों दिशाओं में फैले इसी नीयत से, उसे बड़े गमले में लगाया खूब खाद डाली खूब जल पिलाया बच्चों की तरह जिसे रोज नहलाती थी, वक्त पड़ने पर उसे सहारा देती थी दिशा दिखाती थी आज वही मुरझा गया हाय ! दिल दु:ख रहा हाय ! अब क्या करूं!! मेरा वर्षों से लगाया मनी प्लांट मुरझा गया…!!!😭😭 »

मेरा हृदय बोला….

किसी ने कहा लिखा करो किसी ने कहा पढ़ा करो यूं वक्त ना जाया करो कविता तो बाद में भी लिखी जा सकतीं हैं वक्त रहते पढ़ा करो.. मेरा हृदय बोला दुनिया की कब तक सुनोगी कुछ अपने मन की भी किया करो… »

होगा कोई लोभी

कविता-होगा कोई लोभी ——————————- होगा कोई लोभी, होगा कोई ना समझ, जो तुम्हें खरीदे रुपयों में वरना तुम्हारी कीमत चवन्नी से भी कम है, अरे…. होगा कोई आंख का अंधा, जो तुम्हारी सूरत को ,उगता चांद कहे, मेरी नजर में तुम बदसूरत सूरत हो, क्योंकि कवि बिन देखे कुछ नहीं कहता। होगा कोई कामी पुरुष, दिल में जगह पाने के लिए, सच्चाई ना कहके के बढ़ाई ... »

खूबसूरत है हिमालय पर्वत

कुछ है बात निराली सी मेरे भारत की बात अद्भुत है। खूबसूरत है हिमालय पर्वत, जहाँ से मीठी हवा आती है, ऐसी लगती है जैसे हो शर्बत। गंगा जमुना व नर्मदा जैसी बह रही हैं पवित्र नदियां यहां ये मेरा देश इतना पावन है, देवताओं का वास भी है यहाँ। एक छोर में खड़े पर्वत दूसरे छोर में समुंदर हैं, एक से एक पुरातन हैं भवन साथ में गांव बड़े सुन्दर हैं। सबमें है प्रेमभावना सी भरी एकजुटता निराली ताकत है, मेरे भारत की शा... »

साहित्य लिखो

साहित्य लिखो क्यों तुम आपस में लड़ते रहते हो कभी तुम जीतो कभी वो हारे क्यों जीत-हार में रोते हो पैसे कमाने के साधन तो दुनिया में हैं बहुत पड़े साहित्य लिखो क्यों पुरस्कार की खातिर लड़ते रहते हो… »

लेखनी को दूषित करते हैं

बड़ी बात करते हैं लोग पर बड़ा ह्रदय ना रखते हैं कुछ अभिलाषा मन में जागे तो फिर कुबड़ाई करते हैं लेखनी को दूषित करते हैं अपनी कुत्सित सोंच से दूसरे की ना सुनते बस अपनी ही कहते रहते हैं »

ममता

ममता किसने भर दी मन में गाय को बछड़े से ममता है माँ को बेटे से। ये ममता किसने भर दी मन में। ममता जिसने पैदा की वह ईश्वर सबसे ऊपर है, ममता का गुण सारे गुण से ऊपर है बस ऊपर है। पैदा होता है जब बच्चा होता है असहाय, निर्भर पूरी तौर वो माँ पर ममता रखे ख्याल ये ममता किसने भरी मन में। थोड़ा सा भी बालक रोये विचलित हो जाती है, कब है भूख प्यास कब है सब कुछ समझ जाती है। ये ममता किसने भरी मन में। ममता काफी कुछ ... »

कहे कवि! परीक्षा की अब करो तैयारी

हंसी आ गई मुझको कि अब आया तुमको होश, जब यहां अवसान पड़ा था तब ना आया यह जोश अपना यह जोश संभालो करो परिश्रम यदि पड़ जाओ अकेले तो देंगे साथ हम देंगे आपका साथ अगर पड़ गये अकेले यह मंजिल पाने की खातिर कितने पापड़ बेले अब तुमको भी पढ़कर आगे बढ़ना है असफलताओं से हार कर ना पीछे हटना है कहे कवि ! कि परीक्षा की अब करो तैयारी है चुनाव आने वाला, आईं हैं बैकेंसी भारी….. »

नाच रहा मन मोर क्यों

नाच रहा मन मोर क्यों, आज बिना बरसात, है यह आहट प्रेम की, या है कोई बात। या है कोई बात, उमड़ क्यों नेह रहा है, साजन पर है गीत तभी यह गेय रहा है। कहे सतीश कभी न आये कोई आंच प्रेमी करता रहे मन ही मन प्यारा नाच। »

बेटा बीमार है….

बेटा बीमार है ना होश है ना करार है कल से एक निवाला तक गले ना उतरा बेटे को बहुत बुखार है क्या करूं ? कैसे जियूं ! यही तो मेरे जीवन का आधार है »

हरियाली और खुशहाली रहे

मेरा भारत मेरा देश उन्नति को बढ़े, हर तरफ हरियाली और खुशहाली रहे। दूध की नदियां बहें खेत सोना उगल दें, मेघ जल वर्षा करें, वृद्धजन हर्षा करें, युवा मंजिल को पायें हर घड़ी मुस्कुराएं, धर्म पथ पर चलें सब कर्म पथ पर चलें सब। न भूखा कोई सोये सभी के तन वसन हों न टूटें दिल किसी के सभी के सब मगन हों। पेड़ फल से लदे हों स्रोत जल से भरें हों नैन हों झील जैसे नील जल से भरे हों। मेरा भारत मेरा देश उन्नति को बढ़े,... »

करार

किसी की जीत या किसी की हार का बाजार शोक नहीं मनाता। एक व्यापारी का पतन दूसरे व्यापारी के उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। सत्यनिष्ठा, ईमानदारी, प्रेम इत्यादि की बातें व्यापार में खोटे सिक्के की तरह हैं, जो मूल्यवान दिखाई तो पड़ती है , परन्तु होती हैं मूल्यहीन । अक्सर बेईमानी , धूर्त्तता, रिश्वतखोरी, दलाली और झूठ की राह पर चलने वाले बाजार में तरक्की का पाठ पढ़ाते हुए मिल जाएंगे। बाजार में मुनाफा से ब... »

अच्छा ही होने लगता है

पवन मनोहर झौंका लाई साथ में उसके खुशबू आई, सद्कर्मों का अच्छा ही तो फल मिलता है मेरे भाई। अच्छी सोच रखो मन में तो अच्छा ही होने लगता है, बिना स्वार्थ के रब की सेवा होती है निश्चित फलदाई। मन में स्वार्थ रहे तो कुछ भी करने का फायदा ही क्या है अपना पेट सभी भरते हैं, पशुता का कायदा ही क्या है। »

बालपन मोबाईल में

खो गए खेल आज बचपन के, रम गया बालपन मोबाइल में, आँख का सूख रहा पानी है टकटकी आज है मोबाइल में। वक्त है ही नहीं बचा जिससे संस्कारों को सीख लें बच्चे, कुछ रहा बोझ गृहकार्यों का बाकी सब खो गया मोबाईल में। न रहा सीखना बड़ों से कुछ न रही चाह सीखने की अब न रहा शिष्य गुरु का नाता अब गुरु तो अब भर गया मोबाईल में। खेल क्रिकेट के कब्बडी के हो रहे खेल सब मोबाईल में, तनाव बढ़ रहा मोबाईल में शरीर घट रहा मोबाईल मे... »

माँ और कवि

कविता – मां और कवि —————————- मां और कवि में , अंतर इतना, सीता और बाल्मिकी में, अंतर जितना, मां सुधा अगर है, कवि पारस पत्थर है, मां सरिता गर है, कवि सागर की गहराई है, मां गंगा सी निर्मल, या मानस की चौपाई है, कवि ब्रह्म समान, कवि ने ही मां की महिमा बतलाई है, यदि मां प्रेम की मूरत है, कवि मां की महिमा की सूरत है, मां बच्चों की जरूरत है, कवि... »

आलसी तू आलसी है

कविता- आलसी तू आलसी है ————————————– आलसी तू आलसी है तू बेरोजगार नही है आलस छोड़ काम कर वरना तेरी खैर नही है, डिग्री हैं डिप्लोमा हैं है पास तेरे कोई हुनर, कुछ नहीं है तो क्या कर सकता भैंस चरा और खेती कर, वक्त नहीं बिगड़ा है वक्त नहीं गुजरा है, बात मेरी मान कुछ सीख अभी समय बहुत है, बाल काटना सीख अभी, वाहन चलाना सीख अभी, ... »

प्रेम भावना बढ़े

ऐसी बातें क्यों करें, जो देती हों पीड़, सबसे अच्छा बोल दें, अपनों की हो भीड़। अपनों की हो भीड़, सभी अपने हो जायें, बेगानापन छोड़, सभी अपने हो जायें। कहे लेखनी छोड़, चलो सब ऐसी वैसी, प्रेम भावना बढ़े, बात कर लो अब ऐसी। »

सब ओर खुशी छा जाये

सब ओर खुशी छा जाये दुख की छाया पड़े न किसी में। मन मानव का होता है कोमल आशा होती है मन में, आशा टूटे कभी न किसी की, दिल टूटे न कभी भी, इच्छा आधी रहे न किसी की। इच्छा ऐसी रहे न किसी में जिससे चैन हो छिनता, पूरा हो प्रयत्न पाने का भीतर रहे न भीतर चिंता। भीतर चिन्ता खा देती है बाहर है संघर्ष कड़ा अतः मनोबल रख कर मन में हो जा मानव आज खड़ा। »

कश्मकश

समझाना चाहते थे हम उनको क्या और वे समझे हैं देख लो जी क्या ये देख के लगता है यूं कश्मकश में चुप रहना ही बेहतर है इस जगत में शब्द का उत्तर शब्द ही‌ तो होता है भावना विलग हो तो कोई क्या करें प्यार की शुरुआत संवाद से होता है संवाद ही विवाद हो तो कोई क्या करें सत्य का प्रचलन है पूरे विश्व में आखिर शायद न रहा हो किसी आंगन में प्राचिर सत्य से परेशान हैं लगभग ही आदमी सत्य खुद को समझ लें तो कोई क्या करे »

युद्ध से एक सैनिक जब घर आया

युद्ध से एक सैनिक घर आया, बिटिया को द्वारे पर पाया। एक हाथ में थैला था उसके, दूजा पीठ पीछे छिपाया। पांच साल की छोटी बिटिया के, चेहरे पर आई मुस्कान। उसने सोचा पापा के हाथ में, खाने-पीने का है कुछ सामान। चाॅकलेट, टाॅफी, बिस्किट सब कुछ, उसके ख्वाबों में आया। पीठ पीछे भाग कर आई, तो पापा का एक हाथ नहीं पाया। जंग में उसके पापा ने , अपना एक हाथ गॅंवाया था। रोई पापा के गले मिल, उसको चैन न आया था। आंखें भर... »

प्रेम की दास्तान

प्रेम…. किसी को समझाया नहीं जा सकता। यह तो केवल एक अनुभूति है, जो स्वयं ही होती है। प्रेम स्वार्थहीन है, सागर सी गहराई लिए हुए , एक खूबसूरत एहसास!! इन्तजार में और भी वृद्धि करता है और मिलन में होता है ख़ास। प्रेम पूर्णत: है एक एहसास, प्रेम को आवश्यकता नहीं है समझाने की उसको आंखें कर देती हैं बयान। और प्रेम करने वाले, स्वयं ही कर लेते हैं आभास। यही है प्रेम की दास्तान॥ _____✍गीता »

नाश, वासना छोड़ तुझे

ओ नवोदित पीढ़ी मेरे भारत की, उठ जा तू धूम मचा दे हर क्षेत्र में हर विधा में भारत को मान दिला दे, तू है वह पौध जिसमें कल के फल लगने हैं, तूने ही राष्ट्र सजाना है तूने ही नाम बनाना है। पुरखों ने जो मार्ग दिया या उन्नति की जो दिशा बनाई, तूने उसको आत्मसात कर थोड़ा सा कुछ नया रूप दे आगे बढ़ते जाना है। भारत का मान बढ़ाना है। नशा, वासना छोड़ तुझे ज्ञानी-विज्ञानी बनना है, अच्छे लोगों की संगति अपना। अच्छा तुझको... »

अपने अपने कर्मक्षेत्र में

नफरत केवल खून सुखाता प्यार उजाला देता है। मेहनत का परिणाम अंततः हमें निवाला देता है। दूजे से ईर्ष्या रखने से नहीं किसी का भला हुआ, अपने ही संघर्ष से साथी सबका अपना भला हुआ। आमंत्रण देता कीटों को मधु भर पुष्प खिला हुआ ले जाओ मकरंद मधुर रस अपनी किस्मत लिखा हुआ। लेकिन उड़ने का प्रयास तो उनको ही करना होगा पाने को मकरंद मधुर मधुमक्खी को उड़ना होगा। प्यार मुहब्बत दया भाव से हम सबको रहना होगा, अपने अपने कर... »

कोमल आभा बिखर रही है ( चौपाई छन्द)

चमक रही है नयी सुबह सूरज की किरणें फैली हैं, बन्द रात भर थी जो आंखें, उनमें नई उमंग खिली है। गमलों के पौधों में देखो, नई ताजगी निखर रही है, फूलों में कलियों में प्यारी कोमल आभा बिखर रही है। आँखें मलते गुड़िया आयी, सुप्रभात कहने को सब से, शुभाशीष लेकर वह सबका प्रार्थना करती है रब से। बिजली के तारों में बैठी चिड़ियाओं की बातचीत सुन, ऐसा लगता है दिन भर के रोजगार की है उधेड़बुन। राही थे आराम कर रहे अपनी-... »

प्रा:त काल में सुन्दर नज़राना

हरी दूब पर सुबह सवेरे, किस के बिखर गए हैं मोती। किस जौहरी का लुट गया है, देखो सुबह-सुबह खजाना। पुष्प और पल्लव सब मुस्काए, ये किसने हीरे बिखराए। देखो प्रकृति लुटा रही है, प्रा:त काल में सुन्दर नज़राना। स्वर्ण बरसा रही हैं देखो, सुबह-सुबह सूरज की किरणें। अभी तलक क्यों सो रहे हो, उठो सवेरा हो गया है॥ ______✍गीता »

“बेदर्द से इश्क”

क्यों कोई मोहब्बत के काबिल नहीं होता ? क्यों हर किसी के सीने में दिल नहीं होता ? क्यों होता है उसी बेदर्द से इश्क ! जो इस दिल के काबिल नहीं होता…!! »

अब फिर से उस तरफ से खत आ रहे हैं….

अब फिर से उस तरफ से खत आ रहें हैं वो अपने नुमाइन्दों से मेरी खैरियत पुंछवा रहे हैं…. हमारी फिक्र है या हमारी आरजू हम कैसे हैं ? बस वो यह जानना चाह रहे हैं… भूल बैठे थे हम उन्हें कल परसों ही आज फिर हम बीमार हुए जा रहे हैं… शायद उन्हें एहसास हो आया है अपनी खताओं का या वो बस हमें यूं ही सता रहे हैं… मुद्दतों बाद हमनें जीना सीखा है उन बिन और अब वो लौटना चाह रहें हैं…. अब ... »

आराध्य:- हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ

हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ || कि अब ना बजती बंशी की धुन कहीं गइयों को ठौर नहीं माखन चुराने आ जाओ… हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ || दुर्योधन यहां अब बड़े निर्भीक हैं द्रौपदियों का ना अब बढ़ता चीर है कौरवों को मिटाने आ जाओ… हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ हे कृष्ण ! पुन: तुम आ जाओ || मीरा की भक्ति का कोई मोल नहीं अब वो राधा, अब वो प्रेम नहीं निश्छ... »

कोरोना को दूर भगा लो

*कोरोना को दूर भगा लो* ********************* मन का भय सब दूर करो वैक्सीन लगा लो आप सभी कोरोना को दूर भगा लो वैक्सीन लगा लो आप सभी। डरो नहीं कुछ दर्द नहीं है, नहीं कोई डरने की बात, रोग प्रतिरोधकता बढ़कर होगी सब अच्छी ही बात। आसपास में सबसे कह दो पैंतालीस से ऊपर हैं जो लगवा लो जी टीका खुद को कोरोना को दूर भगा दो। सभी व्यवस्थाएं पक्की हैं स्वास्थ्य सेवा जुटी हुई है, आओ आप लगा लो टीका कोरोना को दूर भगा... »

एक बूँद भी टपक न पाई

स्टैंड पोस्ट का नल बेचारा खड़ा रहा बस खड़ा रहा, एक बूंद भी टपक न पाई, ऐसा सूखा पड़ा रहा। प्यासों के खाली बर्तन जब देखे उसने रोना चाहा, मगर कहाँ से आते आँसू, ऐसा सूखा पड़ा रहा। पिछली बारिश के मौसम में ठेकेदार ने खड़ा किया था, तब पानी था स्रोतों में भी, इस कारण से खड़ा किया था, जैसे ही बीती बरसातें क्या करता बस खड़ा रहा, एक बूंद भी टपक न पाई आशा में बस खड़ा रहा। परेशान है टोंटी उसकी आते-जाते घुमा रहे हैं, य... »

सुबह होगी:- स्वर्ण रश्मियों को झोले में लेकर….

सुबह होगी हाँ, सुबह होगी लेकर स्वर्ण रश्मियों को अपने झोले में कुछ खंगालेगी गेहूं की अधपकी बालियों को लहलायेगी उलझी हुई वृक्षों की लटों को सुलझाकर नदियों को काला टीका लगाकर कुछ गुनगुनाएगी समुंदर में स्नान कर अपनी भीगी जुल्फों को पुष्पों पर झटक कर इतराएगी…. कुछ इस तरह से कल सुबह होगी….. »

पेट में हैं दांत…!! मैं मजदूर कहाऊं

नही हाथ में उंगलियां पर पेट में हैं दात जितना कमाती है किस्मत उतना खाती आंत उतना खाती आंत करूं क्या मुझे बताओ मेरी हालत पर तुम ना हमदर्दी दिखाओ काम कराओ फिर मुझको दो हक का दाना मजदूर हूँ पर मजबूर ना हमें बतलाना कर्म करके भरता हूँ पेट मुफ्त की मैं ना खाऊं हूँ मजदूर इसी कारण मैं मजबूर कहाऊं… »

मीराबाई

ना राधा ना रुक्मणी, वो कान्हा की मीरा बनी। हरि नाम ही जपती थी, ऐसी उसकी भक्ति थी। विष का प्याला पी गई, जाने कैसे वो जी गई। भरी जवानी जोग लिया, मीरा ने सब कुछ छोड़ दिया। बस हरि भजन ही गाती थी, कब सोती कब खाती थी। रत्न सिंह की आत्मजा, सीधी सरल रही मीरा। राजपाट सब छोड़े थे, कान्हा की दीवानी थी। असीम प्रेम और भक्ति गाई, ऐसी ही थी मीराबाई॥ _____✍गीता »

मानव की पहचान

आँख का जल एक है, मानव की पहचान, अगर न हो संवेदना, फिर कैसा इंसान। फिर कैसा इंसान, जानवर भी रोते हैं, मानव में तो दया भाव के गुण होते हैं। कहे कलम विचरते, हैं भू में प्राणी लाख, दया की मूरत है, प्यारी मानव की आंख। »

भोर

भोर होती है हर रोज बहुल के लिए आशा की एक किरण लेकर नऐ विचार नई ख्वाहिशें नई चाह नई भूख जो होती है पद-प्रतिष्ठा धन- दौलत वस्तुओं संबंधों को समेटने की… बहुल के होती है भोर बस वही प्राचीन एक चिर-परिचित भूख लिए रोटी की….. »

मत खोना विश्वास

खो जाये सब कुछ मगर, मत खोना विश्वास, गया भरोसा बात का, होता है परिहास। होता है परिहास, सभी हल्का कहते हैं, बिना पूर्ण विश्वास सभी दूरी रखते हैं। कहे लेखनी बीज, भरोसे का तू अब बो, उगा भरोसा आज, भरोसा अपना मत खो। »

पानी बरसा ही नहीं (कुंडलिया)

पानी बरसा ही नहीं, सूख चुके हैं मूल, अब कैसे जीवन चले, हिय में उठते शूल। हिय में उठते शूल, जंग पानी को लेकर, जनता में छिड़ रही, पड़े बर्तन को लेकर। कहे सतीश अब है, हमको प्रकृति बचानी। पेड़ लगाओ ताकि, मेघ बरसाये पानी। »

असामान्य समय

घड़ी तो घड़ी है साधारण हो या फिर असामान्य। पर समय बड़ा हीं होता जग में सदा से असामान्य।। टिक – टिक करती सूई वाली। अपने हीं चाल में चलने वाली।। डिजिटल घड़ी में अंकों का मेल। जिसे चलाए व दर्शाए विद्युत सेल।। चाभी वाली हो या विद्युतवाली जग में दोनों है अतिमान्य। । घड़ी तो घड़ी है……… भरके सिक्ता काँचपात्र में पूर्वकाल में घड़ी बनाया। उलट – पुलट कर यंत्र हमारा सतत समय सबको... »

उषा काल की मॅंजुल बेला

उगते सूर्य की रश्मियाँ, जब-जब पड़ी हरित किसलय पर सुनहरी पत्तियाँ हो गईं, देख सुनहरी आभा उनकी, आली, मैं कहीं खो गई। वृक्षों के बीच-बीच से, रश्मियाँ छन-छन कर आती थीं उषा काल की सुन्दर बेला में, मेरे मन को भाती थीं। उषा काल की सूर्य रश्मियाँ, सबके भाग जगाती हैं। कोयल भी कुहू-कुहू कर, मीठे राग सुनाती है। उषा काल की मॅंजुल बेला, मन को बहुत लुभाती है। ठॅंडी-ठॅंडी पवन बहे जब, याद किसी की आती है॥ ____✍गीत... »

मेरी बेटी, मेरी है, सिर्फ मेरी है

मेरी बेटी, मेरी है, सिर्फ मेरी है मेरी है, मेरी है, सिर्फ मेरी है, तुम सिर्फ मेरी है, मेरे बिना कोई दूसरा तुम से ज्यादा प्यार नहीं कर सकता मेरी जान, तेरे सिवा किसी ओर से प्यार नहीं करुँगी, तेरे नाम ही होगी मेरी आखिरी सांस, तेरे साथ ही ये ज़िन्दगी जीना चाहती हूँ मेरी गुड़िया, मुझे ताने तब देना जब मैं तेरे साथ नहीं होगी, जीते जी तुझे छोड़ नहीं सकती मेरे बच्चे और मरुँगी मैं उस समय, जब तुम मेरे साथ नही... »

वृक्ष

दो पत्ती के रूप में, उगता है नन्हा बीज, धीरे-धीरे एक दिन, विशाल वृक्ष बनता है। जो सैकड़ों प्राणियों का बसेरा बनता है। छांव देता है, प्राणवायु देता है। फल देता है, फूल देता है, बरसात बुलाता है, सावन में झूले झुलाता है। जोड़े मिलाता है। वृक्ष लेता कुछ नहीं बस देता है देता है। »

दो रूप न दिख पाऊँ

हाथी की तरह दो दांत मत देना मुझे प्रभो कि बाहर अलग, भीतर अलग। दो रूप न दिख पाऊँ। दो राह न चल पाऊँ। जैसा भी दिखूँ एक दिखूँ, नेक रहूँ। न किसी से ठेस लूँ, न किसी को ठेस दूँ। बिंदास गति में बहती नदी सा चलता रहूँ। हों अच्छे काम मुझसे, उल्टा न चलूँ सुल्टा रहूँ, धूप हो या बरसात हो, उगता रहूँ, फूल बनकर बगीचे में खिलता रहूँ। महक बिखेरता रहूँ, प्रेम सहेजता रहूँ। »

सखी चली ससुराल

मेरी एक सखी चली ससुराल, आशीष लेकर बुजुर्गों का। गले मिलकर सखियों के, भावी जीवन के सपने लेकर अपनी अंखियों में सखी चली ससुराल। सखियों की भी दुआएँ, लेती जाना तुम। साजन सॅंग मिलकर, नव-सॅंसार बसाना तुम। पर भूल ना जाना हमको आली, बतियाॅं वही पुरानी वाली। याद हमें तुम आओगी ज्यादा, भूल न जाना अपना वादा। प्रेम-प्रीत हमारी तुम्हारी, साजन संग मिल भूल न जाना। अरे !अरे! रोना नहीं है, अच्छा अब हॅंस दो ना थोड़ा य... »

चले चल मस्त राही मन

चले चल मस्त राही मन नहीं काम है घबराना। जहाँ मिलती चुनौती हो उसी पथ में चले जाना। जहाँ हो प्रेम का डेरा वहाँ थोड़ा सा सुस्ताना जहाँ हरि भक्ति पाये तू जरा उस ओर रम जाना। न करना तू गलत कुछ भी न कहना तू गलत कुछ भी जहां संतोष सच्चा हो, वहां डेरा जमा लेना। न कोई डर न कोई भय न दबना है न पिसना है, अगर डरना है मेरे मन तुझे ईश्वर से डरना चाहिए। »

उसका बनना चाहिए

जितना खुद से हो सके सेवा करनी चाहिए, कष्ट झेलते मानव की सेवा करनी चाहिए। इसी बात के लिए हमें मानव बोला जाता है, मानव हैं, मानवता का परिचय देना चाहिए। स्याह पड़े असहाय की आशा बनना चाहिए, जिसका कोई हो नहीं उसका बनना चाहिए। बन जाएं कितने बड़े उड़ें हवा के संग, लेकिन हमको मूल से मतलब रखना चाहिए। दुःखी आंख के आंसुओं को सोखे जो साथ, वैसा ही कमजोर का साथ निभाना चाहिए। »

स्नेह बढ़कर दीजिये

स्नेह कोई दे अगर तो स्नेह बढ़कर दीजिये जंग को ललकार दे तो जंग पथ पर कूदिये। सीधा सरल रहना है तब तक जब तलक समझे कोई अन्यथा चालाकियों में मन कड़ा सा कीजिये। गर कोई सम्मान दे तो आप दुगुना दीजिये, गर कोई अपमान दे तो याद रब को कीजिये। गर कोई सहयोग दे तो आप भी कुछ कीजिये, हो उपेक्षा भाव जिस पथ त्याग वह पथ दीजिये। देखिए उस ओर मत मुड़कर जहाँ हो दर्द भारी, ना भले की ना बुरे की चाह ही तज दीजिये। »

*कर्म पथ*

टूटे सपनों की सिसकियाँ, नहीं सुनता है ये ज़माना। इसलिए कर्म पथ पर, मुझको है कदम बढ़ाना। यदि मैं कभी भटक जाऊँ, चलने से, सच्ची राह पर तब तुम मेरा हाथ पकड़ कर, ले आना साथी सत् मार्ग पर। राहों में यदि आएं, कॅंटक या अवरोध कोई तब पीछे नहीं हटूॅं मैं, उसका विरोध करने को कभी। है प्रार्थना यही प्रभु से, ऐसी शक्ति देना सदा कर्म पथ पर चलती रहूॅं, सत्कर्म करती रहूॅं सदा ______✍गीता »

हाथ में जीवन

हाथ में रेखा रेखा में जीवन जीवनt रेखा हाथ में। पर है जीवन और मरन एक ईश्वर के हाथ में।। हाथ मिलाने से पहले सोच लो एक बार। वायरस और बैक्टीरिया है बीमारी के आधार।। गर मिलाया फिर सेनिटाइज करो। हाथ मूंह छूने से पहले पहले यही रिभाइज करो।। महामारी है कोरोना अपना खुद बचाव करो। हाथ में है जीवन तेरे अच्छा नित बरताव करो।। »

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