राहें

जब राहें कंटकित व वीरान हो, और कोई ना तेरे साथ हो, तब तुम व्यथित होना नहीं, हिम्मत मन की खोना नहीं, जब होता कोई…

बहना की पाती

प्रिय भैया लिवा ले जाओ न आकर तुम्हारी याद आती है यहाँ खुश हूं बहुत लेकिन मुझे खुशियां रुलाती है जबसे आई हूं रोती हु…

टक्कर

हम भी एक महल बनाए है उलफत के सरज़मीं पे महफूज रहे मेरा महल इसीलिए वफा की चादर ओढा़या है हमने महल पे । देखें…

अस्तित्व

“ख्वाहिश ना ऐसो आराम की, चाहत ना दौलतो के शान की, जरूरत तो है बस, खुद के पहचान की” हर एक के लिए उसका शान…

ज़ौक में

अब आ ही गए हो तुम तो दुश्मन की जरूरत ना रहेगी बैठे बैठे बहुत वक़्त गुजर गया लगता है अब फुरसत ना रहेगी नाम…

नन्हें सुमन हैं

“बाल श्रम निषेध दिवस” —————— नन्हे सुमन हैं इनसे क्यों करवाते हो मजदूरी पढ़ने दो स्कूल में इनको ना करवाओ अब मजदूरी खिलेगे नन्हे पुष्प…

सुकून

सुकून!! तू मेरे पास कब होता है, तुझे ही मालूम है, या मुझे ही पता है, यही तो तेरी अदा है, जब मैं कर्तव्य पथ…

बसंत बहार

बरसेगी धरती पे कब सावन के फुहार। बता ए घटा कब आएगी बसंत बहार।। मोर पपीहा भी मिलन के गीत गुनगुनाने लगे। मन के बगिया…

मेरे अपने

हम गिरें भी तो वहीं जहां इर्द-गिर्द मेरे अपने थे। शायद ना थी खबर हमें रेत पर बने मेरे सपने थे। वीरेंद्र

पहचान

होना था तेरा, पर तेरा होना ही सिर्फ मेरा पहचान नहीं | तू था जरूरी, पर एक जरुरी ख्वाब नहीं | सिर्फ तेरा होना ही,…

विचार

हम तुम पले बढ़े अपने ही देश की छाँव में। फिर क्यों दरार पड़ी आज अपने ही विचार में।। अपनी इनसानियत को तो चंद सिक्के…

गीत नया गाता हूँ

तेरी कल्पनाओं का कायल हुआ जाता हूँ भावनाओं में तेरी बहता-सा जाता हूँ शब्द तुम्हारे फूटते हैं अंकुरित होकर तेरी स्मृतियों में खोया सा जाता…

अहंकार

प्रजापति दक्ष हो या हिरना कश्यप सा राजा विद्वान रावण हो या हो कौरव वंश का कुनबा इनके हनन का भी अहंकार ही बना संघारक…

दो गज़ ज़मीन

अश्कों के समंदर में ए खुदा मुझे सिर्फ दो गज ज़मीन दे दे। गर करने लगे वह अपनो से बेवफ़ाई तब,ज़माना मुझे उसी में दफ़ना…

विडम्बना

जिम्मेदारों!! यूँ उलझ कर आप आपस में भुला देते हो जनहित को। बिता देते हो ऐसे ही समय। खींचातानी गजब की है आपकी जो भूल…

“बन्धन में होना बाध्य नहीं”

बन्धन में होना बाध्य नहीं अपितु एक स्वतंत्रता है विचारों की स्वतंत्रता, भावों की स्वतंत्रता, जीवन के अद्भुत अनुभवों की स्वतंत्रता, सागर के विशाल गर्भ…

वादा

जब ज़िन्दगी कर रही होगी अंत निर्धारित हमारी कहानियों का जब वक्त की धुंध छँट जायेगी और साफ़ नज़र आने लगेगा चेहरा मौत का..!! जब…

नियत

काली मुलायम उड़ती जुल्फें तेरी, इश्कबाज़ों पे कयामत ढाती है। जब चले तू खुली वादियो में, घटा की नियत भी बदलती है।।

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