प्रेम की दीवानी

मन हर्षित तन पुलकित रोम रोम नैनन से नीर की फुहार जैसे हो रही भोलीभाली मतवाली राधारानी गली गली मोहन के नेह में निहाल जैसे…

श्रृंगारी

लिखा था नाम जो दिल की जमीं पर पढ़ रही हूं मैं कि उनका रूप ही हर आईने में गढ़ रही हूं मैं मेरी हर…

हमारे ही हो तुम

हमारे ही हो तुम हमारे रहोगे मेरी प्रीत को तुम संभाले रहोगे। तुम्हारी हथेली में अपनी लकीरें न पाकर विधाता से मैं लड़ रही हूं।…

इंतेहां

तेरे इश्क की इंतेहां चाहता हूं, बड़ी मुद्दत हुवी बिछड़े तुझसे, अब मिला है तो राह-ए-सफ़र में, तुझसे फिर रूबरू होना चाहता हूँ। ता उमर…

कभी आना था यहाँ

कभी आना था यहाँ तुम्हारा अब विराना सा हो गया है जहाँ राह तकते थे तुम्हारे वहा बेगाना सा लगने लगा है जिसके पीछे भागते…

दिल बहलता नहीं था

दिल बहलता नहीं था बहलाए रखा रात भर तेरी यादों में दीपक जलाए रखा रात भर। अंधेरा छटते ही तुझसे मुलाकात करेंगे इसी उम्मीद में…

मुखौटे

मुखौटे लगा कर घूम रहे बहुत आदमी हैं। किसी ने मुखौटा लगा कर हॅंसाया, किसी ने मुखौटा लगा कर डराया। कोई रो रहा है मुखौटा…

चाहत

तू ही तो है चाहत,तू ही तो है राहत, पंछी मैं तू, भोर की पहली किरन. तुझे न देखूं तो, दिल में उदासी, जो देखूं…

हास्य, व्यंग्य

वोट लेने आए नेता हमको जीता दो अपनी भी समस्याएँ सारी हमको बता दो लाऊँगा मै विकास आप सबके घरों में मुझको उस विकास का…

महाशिवरात्रि

महादेव शिव भोले की है, महारात्रि भक्तों आई, पावन दिन माँ गौरी जी हैं, अपने पति शिव को पाई, शिवत्व शिखर चेतना का है, क्यों…

मजबूरियाँ

कभी कसमें खिलाती थी मुझे ना दूर जाना तुम सदा ही साथ में रह के महक बन फूल जाना तुम मगर मजबूरियाँ कैसी जुदा जो…

शीत ऋतु

शीत ऋतु की घटा धरा पर धुंध गगन पर छाई है ओस की नम बूंदे पत्तों पर प्रेम का सार लाई है झाँके भास्कर जब…

नववर्ष

नये वर्ष में नये तराने गाएंगे। खुशियों की चहुँओर बहारें लाएंगे। सुखता,संपन्नता व्याप्त हो चहुँ दिस में कष्ट न वाणी से हम अब पहुँचाएंगे।। नूतन…

प्रदूषण का कहर

हवा में जहर है, प्रदूषण का कहर है। सांसों पर बंधी हैं बेड़ियाँ जी हाँ ये दिल्ली शहर है। अरुणिमा मद्धम हुई है, कौमुदी कुम्हलाने…

वर्णों से सुशोभित आखर

ज़रा ध्यान से देखो हिंदी हमारी भारतीयता की गौरव की कहानी स्वयं माथे बिंदिया चुनरिया ओढ़कर भारतीय सभ्यता संस्कृति दर्शाती दिन प्रितिदिन की बोलचाल में…

वर्णों से सुशोभित आखर

ज़रा ध्यान से देखो हिंदी हमारी भारतीयता की गौरव की कहानी स्वयं माथे बिंदिया चुनरिया ओढ़कर भारतीय सभ्यता संस्कृति दर्शाती दिन प्रितिदिन की बोलचाल में…

अज़ीयत

आसान नहीं है हर दर्द को सीने से लगा कर ज़िंदा रहना, हमने खुद अपना गरेबान चाक किया है तब जाके ये हुनर ​​पाया है

सावन

गूँज उठा है ये संसार चारों ओर है जय जयकार मग्न हो करके थिरक रहे हैं शंकर शम्भू के शिवगण आज जाते हर वर्ष हरि…

मेरी तुम

दुनिया के सब सितारे तुम्हेँ देख जगमगाते हैं, दुनिया की सब नदियों में तुम्हारी आवाज़ बहती है फूल कोई भी हों मुझे उनमें तुम्हारे देह…

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