शिव स्तुति

Listen Shiv Stuti मुक्ति स्वरूप अनंत अनादि समर्थ शाश्वत सर्वत्र व्यापी निर्गुण निरीह निर्विकल्प नमामि जटा में सुशोभित मोक्ष प्रदायिनी मैं उस ईश्वर को नमन…

जब शागिर्द-ए-शाम

जब शागिर्द-ए-शाम तुम हो, ख़्याल-ए-ख़ल्क़ 1 क्या करें, जुस्तुजू 2 ही नहीं किसी जवाब की जब, सवाल क्या करें। 1. दुनिया की परवाह; 2. तलाश।

ज़िंदगी मेरी

ज़िंदगी मेरी आज ज़िंदगी से परेशान है, बात इतनी है, लिबास 1 रूह 2 से अनजान है। तारीकी3 है मगर, दीया भी जला नहीं सकते,…

शोक-ए-हिज्र

शोक-ए-हिज्र1 करूँ या फिर आज जश्न-ए-वस्ल2 करूँ उनके पलभर के आने-जाने में, जिंदगीभर का रसद3 था।   1. विरह का दुख; 2. मिलन का उत्सव;…

अँधेरी बस्ती में

अँधेरी बस्ती में रोशनी राशन में बाँटी जाती है, लोहे के हार पहनकर, ज़िंदगी काटी जाती है। आजकल आफ़ताब1भी आता नहीं है नज़र, हुकूमत चाँद-सितारों…

मेरी नज़्म को

मेरी नज़्म को अपने ज़ेहन 1 में उतर जाने दे, अहसासों को मेरे ज़रा सा असर कर जाने दे। भटकता रहा हूँ ताउम्र अजनबी दुनिया…

आपकी बेरहम यादें

आपकी बेरहम यादें और मैं, बहुत सारी फरियादें और मैं। चुप रहेंगी खींचकर आज साँसें, मेरी बेबस निनादें 1 और मैं। इंतज़ार कर रही हैं…

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