हिन्दी-उर्दू कविता

हिंदी गजल- अब सफा कीजिये |

हिंदी गजल- अब सफा कीजिये | टूटे रिश्तो मे जान बाकी हो अगर , प्यार से सींचकर अब वफा कीजिये | काँच के जैसा होता है दिल का रिस्ता यहा | टूट न जाये दील अब बचा कीजिये | लाखो मिल जाएँगे सबको सबकी जवानी मे | ढल जवानी हमसफर अब ढूंढा कीजिये | तेरी दौलत के खातिर है चाहने वाले कई | करता कौन मोहब्बत अब पता कीजिये | हुशनों जवानी के है सब भूखे यहा | जल जाये जवानी जुल्मो न खता कीजिए | दिल की बात दिल मे न रखिए जन... »

हिन्दी गजल- मुझको भुलाए है |

हिन्दी गजल- मुझको भुलाए है | दिल मे क्यो मेरे आप समाये है | ख्वाब आंखो क्यो आप दिखाये है | जिधर भी देखिये आप का नजारा है | क्या बताए कैसे मैंने रैन बिताए है | होके बेखबर आप चैन से सोते है | रातो को जाग आँसू मैंने बहाये है | अंजुमन मे हम तन्हा नजर आते है | दिल लगा क्या खोये क्या पाये है | हुआ रुसवा तेरे खातिर जमाने मे | तेरे नाम लोगो ने कितना सताये है | तड़पता है दिल आपकी नजर को | कर लूँ दीदार पलके ... »

मेरे जैसी मैं

मैं कहाँ मेरे जैसी रह गयी हूँ वख्त ने बदल दिया बहुत कुछ मैं कोमलांगना से काठ जैसी हो गई हूँ मैं कहाँ मेरे जैसी रह गयी हूँ समय के साथ बदलती विचारधारा ने मेरे कोमल स्वरुप को एक किवाड़ के पीछे बंद तो कर दिया है पर मन से आज भी मैं वही ठहरी हुई हूँ मैं कहाँ मेरे जैसी रह गयी हूँ पहले मैं सिर्फ घर संभाला करती थी वख्त आने पे रानी रानी लक्ष्मी बाई बन दुश्मन को पिछाडा करती थी आज मैं एक वख्त में दो जगह बंट गई... »

हिन्दी गीत- क्यो हुआ

हिन्दी गीत- क्यो हुआ मुझे पहली बार प्यार हुआ | यार क्यो हुआ | झूठा ही कोई दिलदार हुआ | यार क्यो हुआ | मैंने चाहा नहीं मैंने सोचा नहीं | हुआ क्या मुझको पता नही | क्यो उसका मुझे इंतजार हुआ | यार क्यो हुआ | था मै बेपरवाह कितना मजा था | होगी उसकी चाह किसको पता था | मै क्यो इतना लाचार हुआ | यार क्यो हुआ | धड़कने नाम उसका लेती है | बिना उसके न जागती न सोती है | मै उसका बड़ा तलबगार हुआ | यार क्यो हुआ | हर ... »

करम

मेरे महबूब का करम मुझ पर जिसने मुझे, मुझसे मिलवाया है नहीं तो, भटकता रहता उम्र भर यूं ही मुझे उनके सिवा कुछ भी न नज़र आया है लोग इश्क में डूब कर फ़ना हो जाते हैं पर मैंने डूब करअपनी मंजिलों को रु ब रु पाया है मेरे महबूब का करम मुझ पर जिसने मुझे मुझसे मिलवाया है कब तक हाथ थामे चलते रहने की बुरी आदत बनाये रखते क्योंकि, इस आदत के लग जाने पर कोई फिर,खुद पर यकीन न कर पाया है मेरे महबूब का करम मुझ पर जिसन... »

पिया बिना

पिया बिना ——- सुनो प्रिय! मेरा हृदय करे स्पंदन आंखों से फैला ये अंजन भूख प्यास सब लगते झूठे पिया बसंती तुम जो रूठे। सूखे पत्ते सी में कांपू तेरे बिना शापित सी नाचू पल पल तेरी राह निहारु द्रवित हृदय से तुझे पुकारू। मरुभूमि सी तपती देह प्रेम सुधा बरसादे मेंह तेरे दरस की प्यासी हूं बिन तेरे महज उदासी हूं। अंजुरी भर-भर पीना है हो प्रेम बाबरी जीना है इस जग में प्रेम का चलन यही बिन पिया किसी... »

मोहब्त

किसी से इतनी भी मोहब्त ना कर की सिर्फ तू ही सौगात भरता जाए मै से हम की दुरी दोंनो को तय करना है »

गया था उस गली

गया था उस गली जहा से निकाला गया था मोहब्बत थी इस लिए चुप था तेरे हर सितम का जवाब मौजूद था यह तोह तहज़ीब आरे आ गया »

विप्लब

जनता के बारूद को आग से मत ललकार शमा को बुझने ना देंगे ज़ुल्मी रात जितनी भी कोहराम मचाए माना विपक्ष धनवान बलवान है पर इतिहास साक्षी है जब भी सब जन विप्लब का रास्ता लेते है उनके एक आवाज़ ही तख्तता पलट करने मे शक्छम होती है »

वो खिलोनवाली

वो खिलौने वाली ——————— एक पैर से लाचार वो स्वाभिमानी लड़की, याद है मुझे आज भी कल ही की बात सी। चेहरा नहीं भूलता उसका तीखी खूबसरत सी नाक थी। रूखे सूखे से बाल तन से वो फटे हाल थी। चेहरे पर उसके जीने की चमक , कांधे पे झिंगोला लिए लाठी के साथ थी। हां वो खूबसूरत लड़की बड़ी बेमिसाल थी। गाड़ीयों के बीच में सड़कों पर दौड़ती, एक लाठी के सहारे, खिलौने वो बेचती। गर्म... »

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