Hindi-Urdu Poetry

Teri bewafai

न रात को नींद न दिन को चैन है, तेरी वेरूखी से दिल बडा बेचैन है, जब तक चाहा दिल से खेला तुमने, भर गया जी तो पलटकर देखा भी नहीं तुमने, तेरी बेवफाई बहुत ही तड़पा गई मुझे, औरो ने तोरा दिल तेरा तो मेरी वफा तुझे याद आई, कैसी ये प्रीत निभाई तुमने, कैसी ये रीत निभाई तूमने, टूटे हुए दिल को जोड़ने में लगी हूं मैं, तेरी याद को मिटाने में लगी हूं मैं, रास्ते से गुजरो कभी तो देखूंगी भी नहीं तेरी तरफ मैं, सोचूं... »

तकदीर

हर पल आँखों में रहती तेरी तस्वीर है। माने या ना माने, तू ही मेरी तकदीर है। गर बन जाओ तुम, मेरी सदा के लिये, ये सुहाने पल हो सकती मेरी जागीर है। देवेश साखरे ‘देव’ »

वंदेमातरम

मां तुझ से है मेरी यही इल्तज़ा। तेरी खिदमत में निकले मेरी जां। तेरे कदमों में दुश्मनों का सर होगा, गुस्ताख़ी की उनको देंगे ऐसी सजा। गर उठा कर देखेगा नजर इधर, रूह तक कांपेगी देखके उनकी कज़ा। कभी बाज नहीं आते ये बेगैरत, हर बार शिकस्त का चखकर मज़ा। दुश्मन थर – थर कांपेगा डर से, वंदे मातरम गूंजे जब सारी फिज़ा। देवेश साखरे ‘देव’ »

Ghazal

जिसे देख देख कर मैंने पुरी ग़ज़ल लिख डाली, वहीं रूबाई में औरों का नाम ढुंढता है। मेरी हर रात गुजरी इंतजार में झरोखे पर, वो है कि मिलने को कोई शाम ढुंढता है। चांद की खुबसूरती उसके दाग में है, वो दीवाना सबकुछ बेदाग ढुंढता है। कुछ कहने सुनने का अब मौसम कहां रहा, वो समझे ना समझे , मेरा दिल भी अब आराम ढुंढता है। »

कवि

कवि बनना आसान नहीं, हृदय के उद्वेगो को माला में पिरोना कोई खेल नहीं। झुरमुटों के जंगल से जज्बातों को एक-एक करके बाहर लाना कोई खेल नहीं। जिंदगी खुली किताब ना बन जाए संभल कर लिखना कोई खेल नहीं । लिखे गए हर शब्द की गहराइयों में जाकर, हर शब्द का मतलब खोजते है, लोग हर शब्द को तराजू में तोलते हैं। आखिर इतना दर्द क्यू छलक रहा है लेखन में?? लगता है कोई रोग पल रहा है जेहन में!! शब्द दर शब्द प्रेम घुला है!!... »

छलांग

गिर गया तो क्या हुआ पाना मुकाम अभी बाकी है जान भर ली है पैरों मे मैंने आसमां तक ऊँची छलांग अभी बाकी है. »

जो भी मिली

जो भी मिली

जो भी मिली रातें ग़ज़ब रोशन वो बेहया सब बेनक़ाब निकली उजलें इमलों में है ख़ुशी मतलबी ख़ामोश वफ़ाई बेचिराग निकली कोई जुदा हुई तोडा दम किसीने हर आरज़ू कमनसीब निकली लगी मेहंदी वो हाथों की लकीरों को आँखों से ख़ुशी बेहिसाब निकली बन के आशिक़ भरी ज़ेबों को मिले बाजारेग़म की अर्थी तन्हा निकली »

Ghazal

जिनके अल्फाज़ आईने के तरह साफ होते हैं, जमाने की हवा उनके खिलाफ होते हैं। औरों के काम को वहीं आग का नाम देते, जिनके आवाजों में अक्सर उबलते भाप होते हैं। जंगल का नाग हो तो रास्ता बदल लू, वो कितना बचें जिनके घर विषैले सांप होते हैं। जमाने से सच बोलने के लिए कसमें वहीं उठवाते, जो अपने एक झूठ पर कई झूठ का हिजाब देते हैं »

कामना

हे अहोई अष्टमी माता अपने पुत्र के लिए मै करती हूँ तुमसे यही कामना रक्षा उसकी सदा करना मुश्किलों से हो जब भी उसका सामना हे अहोई अष्टमी माता अपने पुत्र के लिए मै करती हूँ तुमसे यही कामना. सदा सुखी वो रहे कमी ना हो खान पान की राह उसे उज्वल देना जग ख्याति हो मान सम्मान की. हे अहोई अष्टमी माता……… ……………… लम्बी उम्र वो जिये देना उसे अच्छा स्वास्थ्य मा... »

चौदहवीं का चाँद

मेरे महबूब के हुस्न की जो बात है। चौदहवीं के चांद तेरी क्या बिसात है।। चांद भी देख गश खाएगा, मेरे महबूब को देख शर्माएगा। मेरे महबूब से हंसीन ये रात है। चौदहवीं के चांद तेरी क्या बिसात है।। ले अंगड़ाई, दिन निकल आए, खोल दे गेसूं, शाम ढल जाए। झटक दें जुल्फें तो होती बरसात है। चौदहवीं के चांद तेरी क्या बिसात है।। चांद तू क्यों उखड़ा उखड़ा है, मेरे महबूब की चूड़ी का टुकड़ा है। खनकती चूड़ियां तो मचलते ज... »

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