हिन्दी-उर्दू कविता

:कुछ पल

कविता :कुछ पल नीला आकाश ,आकाश में उड़ते पंक्षी सागर की लहरें ,लहरों पर चलती नाव रिमझिम बरसता पानी ,वो ओस की बूंदे मानो सब कुछ कह देती हों ऐसा लगता है रख लूँ ,समेट लूँ सबको अपने पास कहीं खो न जायें डरता हूँ ,बहुत किस्मत से मिलते हैं ये पल कभी कभी लगता है इन पलों में ऐसे खो जाऊँ किसी भी चीज की रहे न कोई खबर सचमुच कितने सुहाने होते हैं ये पल ये पल कितने अपने होते हैं कितनी ख़ामोशी होती है इन पलों में फ... »

मीलों का सफर

‘तुमसे तो चंद कदम तय भी हो सके ना कभी, मैंने मीलों का सफर चलके ही गुज़ारा है.. कम से कम तुम पर किसी कत्ल का इल्ज़ाम नही, मैंने तो उम्र भर ही ख्वाहिशों को मारा है..’ »

शुरुआत की खातिर

गम-ए-हयात की खातिर या किसी बात की खातिर, हम तो खामोश रहे इक नई शुरुआत की खातिर.. कुछ रहे पास, खुदा से ये भी बर्दाश्त ना हुआ, उसने आंँसू भी ले लिए मेरे, बरसात की खातिर.. मायने : गम-ए-हयात – ज़िन्दगी के गम »

आज देखा फिर से उनको

आज देखा फिर से उनको अजनबी से लग रहे थे, बात तो कुछ की नहीं लेकिन मजे में लग रहे थे। वे तो हमसे दूरियां रख दूसरों के हो लिए हैं, हम निरी तन्हाइयों खूब सारा रो लिए हैं। जब भी उनको देखते हैं याद आ जाते हैं पल जिन पलों को आज हम अपनी वफ़ा से खो दिए हैं। »

राम हैं जनगण के नायक

राघव भक्तों के सदियों तक के बलिदान, संघर्ष और तपस्या का परिणाम अयोध्या की पावन भूमि का शिलान्यास और फिर भव्य मन्दिर का निर्माण । कितने भक्त मन में निर्माण की आस लिए कर गये इस अवनी से प्रस्थान अब जाके उन अतृप्त आत्माओं को मिला परित्राण । नमन है उन वीर व्रतधारियो को सनातन – निर्माण के कठिन विरासत को संजोये रखा मन्दिर निर्माण के,कठिन व्रत को, निर्भिक नेतृत्व से जनगण में जगाये रखा । रघुनन्दन है ... »

करें तैयारी राष्ट्र पर्व की

मातृभूमि के चरणों में जिन वीरों ने है लहू चढ़ाया उन वीरों को नमन हेतु यह पंद्रह अगस्त का शुभ दिन आया। करें तैयारी राष्ट्र पर्व की अति उत्साह सजाकर मन में, चलो कलम से जागृत कर दें देशभक्ति की भावना मन में। जन-मन में उल्लास जगे राष्ट्र प्रेम की आग जगे युवा शक्ति जाग्रत होकर उत्थान के पथ पर कदम रखे। »

तन्हाई

इस मायूस दिल को कौन समझाये मोहब्बत में बस तन्हाई ही मयस्सर है »

पहला प्यार

कविता- पहला प्यार ————————– ना शीतल मे चांद अजोरी, ना खुशबू मे बेला है| प्यास लगी पानी की जहर मिल गया | मांगा जिसे दुआ में, वही मुझपे कहर होगा गया| दिल दुख रहा है, होठ रो रहा है| आखों मे आंसूए भी, आखों मे चुभ रहा है| मिल जाय मुझे चाहत नहीं, खो जाय मुझे चाहत नहीं| आकर मेरे दिल को समझा दे, मत रो मै तेरे किस्मत मे नही| देने का मैंने वादा कर लिया, ... »

भारत मां की जय बोलो

राष्ट्रीय पर्व आने वाला है भारत मां की जय बोलो पंद्रह अगस्त आने वाला है भारत माँ की जय बोलो। यह हम सबकी जन्मभूमि है मातृभूमि पावन भारत वीरप्रसूता जननी है यह भारत माँ की जय बोलो। ऋषियों-मुनियों की धरती है यह गंगा- यमुना की कल-कल सब धर्मों का संगम है यह भारत माँ की जय बोलो। अलग- अलग बोली भाषाएँ संस्कृति के सुन्दर रंग, विविध रूप में एकरूप हैं भारत माँ की जय बोलो। राष्ट्रीय पर्व आने वाला है भारत मां क... »

इश्क करना

जीता था, खुश था मैं तेरे बिन भी तूने आकर मुझे इतना बदल दिया.. अब तेरे बिन एक पल नहीं है कटता आखिर तूने इश्क करना सिखा दिया.. »

प्रियतम

प्रियतम की बस एक झलक पर हर आशिक जी जाता है आंखों की मदहोशी में वह जाने क्या-क्या पी जाता है अधखिली कली जब गालों पर ठहर ठहर मंडराती है मन के अंतर्द्वंद से मिलकर आंख खुली शर्माती है प्रिय का चुंबन लेकर भंवरा मदमस्त हुआ फिर मचल गया मेघों के संग घूम रहा मन कभी गिरा कभी संभल गया तुम बिन क्यों कटती नहीं जीवन की अब रात प्रिये क्या सचमुच तुम में जादू है कर दो पूरी मुराद प्रिये । वीरेंद्र सेन प्रयागराज »

बेटी

मैं भी तो नन्ही कली हूँ, तेरे अंदर ही पली हूँ तू ही तो ज़रिया है माँ, मैं तेरे कदमों से चली हूँ बस मुझे इतना बता माँ, क्या मैं बेटे सी नही ? माँ क्या मैं बेटे सी नही ? मैंने तेरे पेट में दुनियांं समझकर जी लिया, जो मिला तुझसे वही खाया वही था पी लिया.. क्या हुई मुझसे खता माँ, क्या मैं बेटे सी नही ? माँ क्या मैं बेटे सी नही ? मैं बड़ी होकर भी तुझ पर बोझ न बनती कभी, साज़ बन जाती तेरा मैं, सोज़ न बनती कभी.... »

हर हाल में…

हर हाल में मुस्कुराना हमें आता है, अपने .गम भी छिपाना हमें आता है। छोटी सी कश्ती में घूम कर भी ख़ुश हो जाती है”गीता,” और, बड़े- बड़े सागर भी पार करना हमें आता है। »

धड़कनें

सामने देखकर हमें बढ़ जाती हैं धड़कनें जिनकी जीवन को सही दिशा में ले जाने को हमें जरुरत है उनकी। सामने देखकर हमें बढ़ जाती हैं धड़कनें जिनकी उन्हें हम प्यार करते हैं हमें जरूरत है उनकी। प्रतिक्रिया प्यार की हो या भले नफरत भरी हो दूसरा दे तो रहा है हमें जरूरत है जिनकी। »

ऐतबार

वो कफन था जो दामन-ए-यार बना फिरता था, मेरा वहम मेरे अंदर ऐतबार बना फिरता था.. कुछ दिखा नही ज़माने में सिवाए मतलब के, एक मैं ही था जो दिलों में प्यार बना फिरता था.. »

झूठ भीतर छुपाए हुए हैं

एक चेहरे से पहचान मत हम मुखौटा लगाए हुए हैं, सच नहीं है हमारा दिखावा झूठ भीतर छुपाए हुए हैं। »

एक – दूजे के सहारे

हम तुम्हारे तुम हमारे खुशियां हमारी गम हमारे जिंदगी जी लेंगे तुम-हम एक – दूजे के सहारे। यात्रा इस जिंदगी की है कठिन, मुश्किल भरी है, लेकिन फतह कर लेंगे मंजिल एक-दूजे के सहारे। »

एहसास-ए-मोहब्बत

कभी उनको भी मेरी कमी सताती तो होगी अपने दिल में मेरे ख़्वाब सजाते तो होंगे वो जो हर वक़्त बसे हैं ख़्यालों में मेरे कभी मेरी यादों में वो भी खो जाते तो होंगे वो जिनकी राहों में हमेशा पलकें बिछीं रहती हैं मेरी कभी मुझे भी अपने पास बुलाते तो होंगे वो जो शामिल हैं मेरे हर गीत और नग़मों में कभी तन्हाई में मुझे भी गुनगुनाते तो होंगे मैं जिनसे इज़हार-ऐ-मोहब्बत हरपल करना चाहूँ कभी इकरार-ऐ-मोहब्बत वो भी क... »

ज़िन्दगी का सार

हुआ .गर विरोध तो क्या बिखर जाऊंगी? रफ़्तार करूं मैं दुगनी, और निखर जाऊंगी। जीवन में जीत हैं तो हार भी हैं, यही तो जीवन है, ज़िन्दगी का सार भी है। सागर है विशाल, लहरें भी ऊंची, तो क्या हार जाऊंगी? खेती रहूंगी नैया, उस पार जाऊंगी ।। »

मीठी बातें

मीठी- मीठी बातें करते, मन में रखें बैर। ऐसे अपनों से दूर भले, उनसे अच्छे .गैर। »

पहचान

कविता- पहचान ——————– सुन्दरता मे सुन्दर हो, खुदा की बनाई मूरत हो, खुद पे इतना निर्भर हो, जब जब कोई समझाये अपने बच्चों को, बस आप ही उनके लिए उदाहरण हो| बिन चोट सहे, पत्थर मूरत बन नहि सकती, बिन अग्नि मे तप ,सोना कगना बन नहीं सकती| व्यर्थ जवानी होगी तुम्हारी, यदि गैरो के लिए मिसाल नहीं बन सकती| सोचो कल संग क्या ले जाओगी, चिता पर कफ़न छोड़ कुछ ना पाओगी| सारी म... »

Kanhaiya

माखन निकाल रही यशोदा मैया ध्यान में है सिर्फ श्याम कन्हैया भूखे जब होंगे बाल गोपाल तब दूंगी उन्हें माखन निकाल अभी रख देती हूं इसे संभाल मन में है हरदम उन्हीं का ख्याल हरि भी देख रहे मां को छुप-छुप के माखन तो प्रिय मेरे सारे सखाओं के देर लगेगी मां को अभी थोड़ा इसलिए चल दिए पड़ोस में चुपके दही की कमी नहीं है गोकुल में श्याम बसे जन-जन के मन मन में मनमोहक कृत्य सखा संग माधव के मन में गोपियां रख सकी न ... »

मजदूर

वो आसां ज़िंदगी से जाके इतनी दूर बनता है, कई मजबूरियाँ मिलती हैं तब मजदूर बनता है । वो जब हालात के पाटों में पिसकर चूर बनता है, कई मजबूरियाँ मिलती हैं तब मजदूर बनता है.. कसक ये बेबसी की ज़ख्मी पैरों में दिखाई दी, कभी लथपथ लहू से बिखरे कपड़ों में सुनाई दी.. जहाँ पर वेदना-संवेदना के तार बेसुध थे, वहाँ पटरी पे बिखरी रोटियों ने भी गवाही दी । कहीं जब बेबसी का ज़ख्म भी नासूर बनता है कई मजबूरियाँ मिलती हैं त... »

बिछुड़े दिलों में उनके

रात हो गई है बात हो गई है वर्षों से जिन में काफी दूरी बनी हुयी थी बिछुड़े दिलों में उनके मुलाक़ात हो गई है। दिन भर रही थी गर्मी उमस भरी हुई थी फिर शाम होते होते बरसात हो गई है। रस्साकशी चली थी आरोप मढ़ रहे थे छोटी बात पर वे नफरत उगल रहे थे पर प्यार भी था उनमें नफरत से लड़ रहा था, संघर्ष में, शाह-मात में यह बात हो गयी है शह प्यार की व नफरत की मात हो गई है। बिछुड़े दिलों में उनके मुलाक़ात हो गई है। »

बेगुनाह

बेगुनाही में अपने पास रख असर इतना, आसमाँ खुद कहे कि हाँ ये सही है बंदा.. »

हृदय महल

बहुत भीड़ है मन्दिर में, मस्जीद में शोर-शराबा है, मेरा हृदय महल बहुत खाली-सा यहां विराजमान हो जाओ, प्रभु! फिर मेरे लिए यहीं अयोध्या और यहीं है काबा । »

भारत देश

सारे जहां से प्यारा है आसमान से न्यारा है । गोदी में ममता का आंचल पैरों में नदियों की पायल । राम-कृष्ण के कर्मों का इतिहासों के वर्णों का । यह भारत देश निराला है यह सब देशों से प्यारा है । हर धर्म के लोग यहां हर धर्म को आजाद हैं । सती सीता की जीवन गाथा भारत में विख्यात है । बच्चों की मनमानी का इंदिरा की कुर्बानी का । यह देश चमकता तारा है यह भारत देश हमारा है। वीरेंद्र सेन प्रयागराज »

पर्यावरण को है सजाना

मानव जाति पर प्रहार करते नित नए रोगों को देखो किस तरह बर्बाद करने पर तुले हैं जिंदगी को। झकझोर करके रख दिये हैं सैकड़ों परिवार देखो ला खड़ा करके सड़क पर रख दिया है जिंदगी को। रोग जो यह आ रहे हैं जिंदगी पर काल बनकर प्रकृति से छेड़छाड़ ही है, इन सभी का मूल कारण। इसलिए पर्यावरण पर ध्यान देना है जरुरी, पर्यावरण में संतुलन हो ध्यान देना है जरुरी। पेड़ – पौधों को न काटो, बल्कि खाली भूमि पर विकसित करो तु... »

भारतीय सैनिक

लिखने को आज क्या है, मन तो आज उदास है, तेरी खामोशियों का एहसास है, तू है बड़ा,हिम्मतवाला, सीमाओं का है तू रखवाला, देश उड़ने को तैयार है, तेरे हाथ में परवाज है। देशप्रेम की बात है, आंखों में तेरे आस है, तिरंगे का मान है, तू देश का अभिमान है। तेरी जो ललकार है, युद्ध का शंखनाद है, तेरा जो तेज है, दुश्मन फिर बेहोश है, माँ भारती का सपूत है, तू युद्ध का शूरवीर है। »

क्यों

रक्त रंग जब एक सा है है सूरत सबकी एक सी फिर क्यों बाँटी है मानवता ,क्यों सरहद की लकीरें खींची हैं क्या ईश्वर ने बनाया है जाति-पाति यह सब मानव की करनी है एक ही धर्म है दुनियां में भिन्न भिन्न अज्ञानियों ने मानी है क्यों द्वेष ,अहिंसा और नफरत से ये प्यार की दुनिया बाँटी है आज इतिहास चित्कार रहा हमें लिख दो इतिहासकार सही सही हम सब हैं भारत देश के वासी फिर क्यूँ किसी धर्म के अनुयायी हैं सर्वधर्म आदर भ... »

चूड़ी की खनक

मैं जब कभी कहीं मायूसियों में घिरता हूँ, तेरी उम्मीद मेरा हाथ थाम लेती है.. तेरी मौजूदगी का इल्म इसलिए है मुझे, तेरी चूड़ी की खनक मेरा नाम लेती है.. »

कुछ मुझमे सीरत है तेरी

‘कुछ मुझमे सीरत है तेरी, कुछ तुझमे अब है असर मेरा.. तू रह गुज़र सी है मुझमे, सब तुझसे ही है बसर मेरा.. कभी सफर हुआ है मंज़िल सा, कभी हमसफर ही सफर मेरा.. कुछ मुझमे सीरत है तेरी, कुछ तुझमे अब है असर मेरा..’ ‘मीलों तक सन्नाटा सा कुछ, चादर जैसा था बिछा देखा.. तू एक हलचल का मंज़र थी, जिसे न देखा तो क्या देखा.. कुछ मैं भी मुअत्तर हूँ तुझसे, कुछ तुझमे भी है अत्तर मेरा.. कुछ मुझमे सीरत है त... »

हिंदुत्व

झुकने नही देंगे देश का सर, बस धुन ये रमाकर बैठे हैं माथे पर सादा तिलक नही, हिंदुत्व लगाकर बैठे हैं.. »

हिंदुत्व

झुकने नही देंगे देश का सर, बस धुन ये रमा कर वैठे हैं, माथे पर सादा तिलक नही, हिंदुत्व लगाकर बैठे हैं.. »

इंदौरी सर को समर्पित

इंदौरी जी को समर्पित:- कुछ हस्तियों के फसाने बरकरार रहते हैं, कुछ किरदारों के किस्से बेशुमार होते हैं। आसमां में ही नहीं होते तारे सभी, कुछ सितारे धरती को भी नसीब होते हैं।। इंदौरी जी🙏🙏🙏🙏🙏🙏 भगवान उनकी आत्मा को शान्ति से।। »

पूरा का पूरा भीग जाऊं

रिम झिम बर्षा बरसे जा भीतर का सारा जल उड़ेल दे , ऐसे उड़ेल दे कि ऊपर की परत छिन्न-भिन्न न होने पाये तेरा प्रवाह मेरी नाजुक परत को छिल कर दूर बह न जाए, बल्कि मेरे भीतर समा जाए गहरे, पूरा का पूरा भीग जाऊं बाहर से अंदर तक, फिर नयी कोमल कोपल उगे मेरे भीतर से तेरे प्रेम की। ……. »

गल न जाये मन भरी बरसात में

रोज बारिश हो रही है प्यार की तब भी क्यों नफरत उगी है सब तरफ, चाहते हैं एक होना आप हम तब भी क्यों दूरी बनी है हर तरफ। दिल की निर्मल सी सड़क के इस तरफ भांग उग आई है इस बरसात में इसलिए हम यूँ उलझते रह गए ढूंढ कर कोई कमी हर बात में। रास्ते टूटे हुए हैं किस तरह आप तक पहुंचेगा मन बरसात में जब तलक बारिश रुकेगी तब तलक गल न जाये मन भरी बरसात में। »

खिलौने वाला

जी, खिलौने वाला हूँ मैं, खिलौने बेंचता हूँ गुड़िया,हाथी,घोड़े,और ग़ुब्बारे बेंचता हूँ मुझे बचपन की यादों का सौदागर ना समझना चंद ज़रूरतों की ख़ातिर तमाम ख़ुशियाँ बेंचता हूँ पर अपने ख़ुद के बच्चों को खिलौने नहीं दिला पाता बर्फ़ का गोला, ठेलें की चाट नहीं खिला पाता बहरहाल,बच्चें समझदार हैं मेरे, मेरी मजबूरी समझ लेते हैं गूँधे आटे से चिड़ियाँ बना के जों दूँ, उसको ही खिलौना समझ लेते हैं मेरे संग साइकल ... »

हिंदुत्व

साधु नही आधार स्तंभ थे जो हिंसा की बलि चढ़े, हिन्दू धर्म की लाज ये कैसी निर्ममता स्थली चढ़े । है कैसा इंसाफ कि जिसने संस्कृतियों को पाला हो, वही भीड़ के हाथों ऐसी बर्बरता का निवाला हो । जुड़े हुए थे हाथ संत के दिया वास्ता भिक्षा का, जाने कितनी उम्मीदों से थामा हाथ सुरक्षा का । कैसे एक निरीह साधु का हाथ यूँ तुमने झटक दिया, कैसे दिव्य सनातन को यूँ भीड़ के आगे पटक दिया । वो साधु जिसकी रक्षा पर मर जाते मिट... »

तस्वीर

लगाकर सीने से फिरता हूँ मैं तस्वीर तेरी, ये वो वजह है जिससे दिल मेरा धड़कता है.. ‘प्रयाग धर्मानी’ »

आपकी नींद में हम

आपकी नींद में हम स्वप्न बन के आ न जाएँ इसलिए दिल किवाड़ों को हमेशा बंद रखना। गर कभी हम राह में मिल जाएँ तुमसे यूँ अचानक तब समझना अजनबी हैं याद को ही बंद रखना। »

रक्षाबंधन

कुछ इस तरह रिश्ते का मान रह जाए, तेरी राखी में बंधके मेरी आन रह जाए.. तेरे बाँधे हुए धागे की गाँठ जो छूटे, मुद्दत्तों बाद भी उसका निशान रह जाए.. रेत के टीले पर बचपन में घर बनाया था, आज इस उम्र में भी वो मकान रह जाए.. बड़े गिलास में शर्बत के लिए लड़ते थे, काश वैसा ही आज भी गुमान रह जाए.. दौड़ते दौड़ते साईकिल सिखाई थी तुझको, गुजरते वक्त को शायद ये ध्यान रह जाए.. तूने बचपन में ली है मुझसे कई दफा रिश्वत, ... »

याद आता है गांव

याद आता है मुझको अपना गांव, वो बड़ा सा आंगन, वो नीम की छांव। बारिश के पानी में, चलती थी कागज़ की नाव, ख़ूब खेलते थे, धूप हो या छांव। जब से आई है ये बैरन जवानी, ख़तम हो गई बचपन की कहानी। एक – एक करके सखियां ससुराल चली, मुझे भी जाना होगा अब पी की गली। शहर से आया एक दिन एक कुमार, मुझसे शादी करने को हुआ तैयार। मां – पापा को था बस यही इंतजार, बाबुल की गलियां छूटी, आ गई पिया के द्वार। फ़िर भ... »

दो डॉक्टर बर्ताव के

दो डॉक्टर बर्ताव के ! एक कड़वी दवा खिलाएं, दूजा मीठी दवा पिलाएं, ‘मानुष’ मीठी से करें परेहज नीम ही नीरोगी होए। »

नशा

ये नशा जो युवाओं के रक्त में घुल रहा है चलती फिरती लाशों का ये जहान हो रहा है जीवन की बगिया में खिलते पुष्पों को दबा रहा है कंकालों और हड्डियों की दुनिया बसा रहा है अपराध बढ़ रहे हैं ,गृह कलह हो रही है असमय सुहागिनें विधवा हो रही हैं बच्चे अनाथ हो रहे हैं, बेवक्त बुढ़ापा आ रहा है माँ बाप का सहारा ,बोझ बनता जा रहा है ये रक्त पी रहा है ,खोखला जिस्म कर रहा है मौत अँधेरे की ओर ,जिंदगी ले जा रहा है मान स... »

jeet unaki

Jeet unaki hui lab mere muskuraaye.. Ye mohabbat hai ya fir hone ko hai.. »

बचपन की यादों से नोक झोंक

चाशनी सी मीठी है ये बचपन की यादें ये अक्सर लिपट जाती है सीने से आके और खिलखिला के पूछती है की ऐसा क्या पाया ? मुझको खोकर भी ख़ुद को ना पाया, तो क्या कमाया? बहुत जल्दी थी ना तुमको बड़े होने की ? पैसा कमाने की,ख़ुद के पैरों पर खड़े होने की? तो फिर क्यूँ आज भी सिर्फ़ मुझको ही याद करते हो ? काश मैं लौट आऊँ बस यही फ़रियाद करते हो अफ़सोस, बीता वक़्त कभी लौट के नहीं आता अब इस सच्चाई के कड़वे घूँट पीना सी... »

जन्मदिन कन्हैया का है

जन्मदिन कन्हैया का है आज सबको बधाई बधाई अष्टमी भाद्रपद की सुहानी व्रत लेकर कन्हैया का आई। कंस की कैद में जन्म लेकर रात ही रात गोकुल पधारे, माँ यशोदा की गोदी में खेले नन्द बाबा के प्यारे दुलारे। ब्रज में कर अनेकों लीलाएं लौट मथुरा नगर में पधारे, अपने करतब दिखा कर निराले कंस पापी को पल में पछाड़े। »

तक़रीब ए इश्क

कोई तरकीब हो अगर तो जरूर बतायें तक़रीब ए इश्क कैसे हो हम »

कान्हाजन्म की बधाई

बधाई हो यशोदा मैया आयो कान्हा तेरे द्वार सुर नर मुनि करते स्वागत है बारम्बार । जन्म लियो मथुरा जेल गृह में पोषित भये देवकी के गर्भ में आये दुष्ट कंश के करन संघार बधाई यशोदा मैया आयो कान्हा तेरे द्वार । यशोदा के लाल कहाये देखो कैसे सबखा मन हर्षाये यशोदा के गोद खेलत है जग के पालनहार यशोदा मैया आयो कान्हा तेरे द्वार । कभी ग्वालन संग माखन चुराये यमुना तट पर वस्त्र छिपाये गोपियन संग रास रचाये सृजनहार य... »

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