Hindi-Urdu Poetry

मैं हर बात पर रूठ जाता हूं

जरा सी बात में टूट जाता हूं , गुस्से से आकर फुट जाता हूँ। लोग समझते है आदत है मेरी मैं हर बात पर रुठ जाता हूँ। हृदय पर हल्की घाट होती है, बिना बात की बात होती है। बढ़ जाता है द्वेष का किस्सा, फिर मन मे खुराफात होती है।। गलतफहमी धीरे से बढ़ जाती है। गुरुर दिमाग में गढ़ जाती है। मन मे बनती है ख्याली पुलाव, कुछ और ब्यथा बढ़ जाती है।। बुराई का मैं सरताज नही हूँ। बुझदिलों का आवाज नही हूँ। प्रलयकारी होता है... »

तस्वीर बनाने बैठा हूँ।

बहुत दिनों के बाद नई तस्वीर बनाने बैठा हूँ, मुझसे रूठी थी जो मेरी तकदीर बनाने बैठा हूँ, इल्जामों की सबने जो फहरिस्त लगाई है मुझपे, कोरे कागज़ पे मैं अपनी तहरीर बनाने बैठा हूँ, कोई नहीं है पास मेरे सब वयस्त नज़र ही आते हैं, मैं मन ही मन में ख्वाबों से तकरीर बनाने बैठा हूँ।। राही अंजाना तकरीर – बातचीत तहरीर – लिखावट »

मैं तेरे साथ हुँ

मुश्किल हैं , थोडी राह कठिन हैं , पर कोई नहीं, मैं तेरे साथ हुँ । खुद पर भरोसा रख तू , कुछ न सही , पर कुछ सीखा हैं । यहीं बस यकीन रख तू , मैं तेरे साथ हुँ । आज जो हुआ , वो कल न होगा , कल जो होगा , वो आज से बेहतर होगा । यकीन खुद पर रखना होगा , इसीलिए मैं तेरे साथ हुँ । कल जहाँ मैं थी , आज वहाँ तू है, मेरे संग कोई न था , अकेली मैं ही थी , पर इस बार मैं तेरे साथ हुँ ।। »

मैं तेरे साथ हुँ

मुश्किल हैं , थोडी राह कठिन हैं , पर कोई नहीं, मैं तेरे साथ हुँ । खुद पर भरोसा रख तू , कुछ न सही , पर कुछ सीखा हैं । यहीं बस यकीन रख तू , मैं तेरे साथ हुँ । आज जो हुआ , वो कल न होगा , कल जो होगा , वो आज से बेहतर होगा । यकीन खुद पर रखना होगा , इसीलिए मैं तेरे साथ हुँ । कल जहाँ मैं थी , आज वहाँ तू है, मेरे संग कोई न था , अकेली मैं ही थी , पर इस बार मैं तेरे साथ हुँ ।। »

बस! अलविदा न कह सके ।

कुछ कहा नहीं, पर रूके भी कहाँ ! कहना था अलविदा , पर समय कहाँ ! इस वक्त की रहमत कि हम न कह सके , न उनसे मिल सके , बस ! अलविदा न सके ।। वो पास था , वो कोई करीबी था , बस ! नज़रें झुकाए मेरे सामने खडा था । फिर भी, क्यों नहीं कहा था , उनसे अलविदा ? यादें ही उसकी अब साथ हैं, कोई साथी ही नहीं , कि दिखा दु अपनी नज़रों से तस्वीर उसकी । रहना था साथ उसके , पर सफर वो अधूरा रह गया ! बस ! अलविदा ना कहा गया ।। क... »

कविता :- वो अकेला हैं

वो अकेला हैं , इसलिए साथ चाहिए , जो समझ सके , उसके हालत, उसकी पीडा । वो किसान हैं, वो अन्नदाता हैं , कोई और नहीं वो एक पेड पर फिलहाल लटकता हुआ , आज एक शव है ! वो तरसता हैं हर बूँद को , जिसे हर घडी हम नलों से बहाते हैं , वो अकेला हैं , इसलिए साथ चाहिए । शहर हुआ विकसित , गांव भी हुआ विकसित , कोई किसान से तो पूछो , वो कितना हुआ विकसित । कर्ज में डूबा हैं वो, पहनने के लिए दो जोडी , आज भी फकीर बना हैं ... »

ख्वाहिश

ख्वाहिशों का काफिला भी अजीब ही है ग़ालिब अक्सर वहीँ से गुज़रता है जहाँ रास्ता नहीं होता »

घर

अब घर भी नहीं घर की तमन्ना भी नहीं है मुद्दत हुई सोचा था कि घर जाएँगे इक दिन »

दुश्मन

तुम लोगों से अच्छे दुश्मन है कम से कम दोस्त होने का दावा तोह नहीं करते »

अभिमान

जो छूले मन कोई मेरा मुझे अभिमान हो जाये, क्या होती है हृदय धड़कन मुझे भी ज्ञान हो जाये, किसीकी बात सुनकर मैं भटक जाऊँ नमुमकिन है, वो दे आवाज़ तो मैं ज़िंदा हूँ मुझे भी भान हो जाये, आसमां से गिरा धरती पे जो वो टूटा एक सितारा हूँ, वो देखे एक नज़र मुझको मुझे मेरी पहचान हो जाये।। राही अंजाना »

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