हिन्दी-उर्दू कविता

सर्दी के मौसम में..

इस सर्दी के मौसम में, दिन कितनी जल्दी ढलता है। जिसके घर में प्रतीक्षारत हो कोई, उसका पग घर की ओर, जल्दी-जल्दी चलता है। इस सर्दी के मौसम में, दिन कितनी जल्दी ढलता है। जो है तनहा इस जगत में, कोई प्रतीक्षारत भी ना हो घर में, उसे कौन सी जल्दी जाने की, वो धीरे-धीरे ही चलता है। इस सर्दी के मौसम में, दिन कितनी जल्दी ढलता है।। _____✍️गीता »

कोहरा

रविवार की छुट्टी थी, पर कोहरा कर्तव्य निभाने आ गया सर्दियों के मौसम में, और सर्दी बढ़ाने आ गया। धूप भी डर कर छुप गई है, ठंड का डंडा चलाने आ गया। घूम रहा है बेधड़क राहों पर, देखो सितम ढ़ाने आ गया। अवकाश है हम भी बैठे हैं घर में, वो कर्तव्य निभाने आ गया। ____✍️गीता »

लड़कियाँ

घर आँगन में फूलों सी खिलती हुई लड़कियाँ! फ़ीकी दुनिया में मिसरी सी घुलतीं हुई लड़कियां!! उदासियों की भीड़ में हँसती हुई मिलती हैं! ज़िम्मेदारी के बोझ तले पिसती हुई लड़कियाँ!! ढल जाती हैं पानी सी हर बार नए आकार में! रिश्ते निभाके ख़ुद से बिछड़ती हुई लड़कियाँ!! लड़ रही हैं आज ख़ुद को बचाने के लिए! मंदिर में देवियों सी पुजती हुई लड़कियाँ!! निकल रही हैं खोल से अब पंख नए ले कर! तितली बन आकाश में उड़ती हुई लड़कियाँ!!... »

द्रौपदी की प्रतिज्ञा

# द्रौपदी की प्रतिज्ञा द्रौपदी का परिचय- आ खींच दुशासन चीर मेरा, हर ले मेरा सौंदर्य सजल । आ केश पकड़ कर खींच मुझे, अपना परिचय दे ऐ निर्बल । मैं राजवंशिनी कुल कीर्ति हूँ, गांधारी हूँ मैं कुंती हूँ । अतुलित हूँ मैं अभिमानी हूँ, ना भूल अरि मैं रानी हूँ ।। है अग्निकुण्ड मेरा उद्भव, मुखमण्डल का ये तेज देख । सौंदर्य ना मुझसा जग में द्वय, नैंनो में रति का वेग देख । जग में मुझसा सौंदर्य कहाँ, है मुझसा अतु... »

*राष्ट्रीय बालिका दिवस की बधाई*

बेटियों का कल बेहतर बनाने को, आओ उनका आज संवारें। बेटी पर अभिमान करो, जन्म लेने पर उसका सम्मान करो। बेटी को शिक्षा का अधिकार दो, बेटी को भी बेटों जैसा ही प्यार दो। उसकी शिक्षा में करो कोई कमी नहीं, विवाह करने की कोई शीघ्रता नहीं। बेटी से घर में रौनक है, मनता हर त्यौहार है बेटी प्रभु का दिया एक सुंदर उपहार है। तो आओ मिलकर कलंक हटाएं, भारत भूमि से बेटी की भ्रूण हत्या का। बेटी ही ना होगी तो बहू कहां ... »

प्रमाण

अनुभव  के अतिरिक्त कोई आधार नहीं , परमेश्वर   का   पथ   कोई  व्यापार  नहीं। प्रभु में हीं जीवन कोई संज्ञान  क्या लेगा? सागर में हीं मीन भला  प्रमाण क्या  देगा? खग   जाने   कैसे  कोई आकाश  भला? दीपक   जाने  क्या  है  ये  प्रकाश भला? जहाँ  स्वांस   है  प्राणों  का  संचार  वहीं, जहाँ  प्राण  है  जीवन  का आधार  वहीं। ईश्वर   का   क्या  दोष  भला   प्रमाण में? अभिमान सजा के तुम हीं हो अज्ञान में। परमेश्... »

*कला*

एक ऐसी ज़िन्दगी, जो किसी कला के साथ, एकान्त में जीना सिखा दे, स्वयं के लिए कुछ वक्त देना सिखा दे। प्रभु ने किया मुझे सम्मानित, एक ऐसी ही कला से जिसे लोग प्रभु का उपहार भी कहते हैं, लिख लेती हूं कुछ शब्द, कुछ वाक्य.. इसी आशा के साथ, कि कदाचित कभी किसी का कर जाए भला प्रभु की दी हुई मेरी यह कला।। ____✍️गीता »

धन उतना हो पास में

धन उतना हो पास में जितने से हो शांति, उस धन से क्या फायदा मन में रहे अशांति। शांति नहीं गर जिगर में खो जाती है कांति उल्टा-सीधा धन कमा आ जाती है क्लान्ति। जीवन भर संचित करे खाऊंगा कल सोच, खाते समय उदर नली ले लेती है लोच। धन ही जीवन लक्ष्य है, इतना भी मत सोच, कमा स्वयं की पूर्ति को और शांत रख चोंच। »

*कागज़ की कश्ती*

कागज़ की कश्ती लेकर, दरिया पार करने चल दिए। हम कितने नादान थे, अरे! यह क्या करने चल दिए। बचपन तो नहीं था ना, कि कागज़ की कश्ती चल जाती, भरी दोपहर में यह क्या करने चल दिए। दरिया बहुत बड़ा था, आगे तूफ़ान भी खड़ा था, तूफ़ानों में कश्ती उठाकर, कागज़ की चल दिए। हम भी कितने नादान थे, अरे! यह क्या करने चल दिए।। ____✍️गीता »

साथ

कौन हमसे आगे निकल गया, कौन हमसे पीछे रह गया, केवल यही ना देखना मानव, देखना है तो यह भी देखना कि, कौन हमारे साथ है, जुड़ना बहुत बड़ी बात नहीं, जुड़े रहना बहुत बड़ी बात है। कौन छोड़ गया बीच राह, और किसने थामे रखा हाथ है, कौन है हमारे साथ और, हम स्वयं किसके साथ हैं।। _____✍️गीता »

तबाही ज़िन्दगी की

दिल ही तो मांगा था कौन सी कायनात मांंग ली जो शब्दो में उलझा कर मेरे दिल को ताार तार दिया गुनाह तो नही प्यार करना जो मुुुझे तबाह कर दिया »

पैदा कर लो आग

अपनी आदत बदल कर, पाओ खूब सुकून। रोज सीखना है नया, ऐसा रखो जुनून। सोते समय नहीं कभी, हो उलझन में ध्यान, कभी कभी तलवार को दे दो उसकी म्यान। गुस्सा छोड़ो आप भी नींद निकालो खूब कभी कभी आनन्द लो तुम सपनों में डूब। छोड़ो सारी झंझटें रातों को लो नींद, वरना उलझन में समय जायेगा फिर बीत। कोशिश कर उम्मीद रख बदलो खुद का भाग, ठंडे-ठंडे मत रहो पैदा कर लो आग। »

पैदाइशी समझदार तो

पैदाइशी समझदार तो हम भी न थे, मगर परिस्थिति ने समझने लायक बना दिया पैदाइशी जिम्मेदार तो हम भी न थे, मगर छोटी सी उम्र में आई जिम्मेदारी ने जिम्मेदारी उठाने लायक बना दिया। हमारी उम्र के बच्चे गुड्डे-गुड़ियों से खेलते हैं औऱ हम बचपन में ही सयानी बन गई अपनी किस्मत से खेलते हैं। छाती से चिपका कर छोटे से भैया बहनों को फुटपाथ पर हम ठंड झेलते हैं। सुना है बच्चे एक गिलास सुबह एक शाम, दूध पीते हैं, हम दूध कह... »

जनवरी की ठंड है

जनवरी की ठंड है पर ढल रही सी ठंड है कम हुआ है कोहरा लेकिन अभी भी ठंड है। बढ़ रहे हैं दिन घट रही हैं रात कटकटाना कम हुए हैं ठंड से अब दांत। सूर्य की किरणें में अब बढ़ने लगा है ताप, थम गई है निकलती साँस से अब भाप। »

मुझे वरदान दो

कविता -मुझे वरदान दो —————————- वरदान दो वरदान दो मुझे वरदान दो, उठी है जो लहर मुझ में हो विकट रूप जैसा गति तेज सुनामी जैसा साकार हो आकार हो प्रकार हो ,मेरे ना विपरीत हो, वह काम दो ,जिससे नाम हो मेरे काम से पहचान हो, ईश्वर तुझ से ही आशा है ऐसा मुझे वरदान दो, वरदान…… तूफान के वेग जैसा चिड़ियों के उड़ान जैसा हमें दो ताकत ऐसी गिद्ध में... »

अभिलाषा

ये सृष्टि हर क्षण अग्रसर है विनाश की ओर… स्वार्थ, वासना और वैमनस्य की बदली निगल रही हैं विवेक के सूर्य को..!! सुनो! जब दिन प्रतिदिन घटित होतीं वीभत्स त्रासदियाँ मिटा देंगी मानवता को जब पृथ्वी परिवर्तित हो जाएगी असंख्य चेतनाशून्य शरीरों की भीड़ में…!! जब अपने चरम पर होगी पाशविकता और अंतिम साँसे ले रहा होगा प्रेम… जब जीने से अधिक सुखकर लगेगा मृत्यु का आलिंगन…!! तब विनाश के उन ... »

आलस अब तो नैन से

आलस अब तो नैन से, दूर चले जा दूर, आने दे अब ताजगी, आने दे अब नूर। आने दे अब नूर, बिछी सूरज की किरणें, नई रोशनी आज, ला रही मेरे मन में। कहे लेखनी नींद, अभी तू दूर चले जा, रात मिलेंगे अभी कहीं तू दूर चले जा। »

जख़्म

जख़्म तुझको मैं दिखा देता हूँ, दर्द अपना मैं भुला लेता हूँ। पास आकर जो बैठ जाते हैं, उनको अपना मैं बना लेता हूँ। कहते हैं मुझसे मन की अपनी, मैं भी मन उनसे लगा लेता हूँ। करते हैं खुल के बातें मुझसे, तो खुल के मैं भी सुना लेता हूँ। हैं नहीं जानते दिल की मेरे, दिल में जिनको मैं छुपा लेता हूँ। बैठ ख़ामोशी से देखो मुझको, आँख परिंदों से मिला लेता हूँ। घर है ना छत है सर पर मेरे, राही खुद से ही खफ़ा रहता हूँ... »

सच का चिमटा साथ हो

आप इतने निडर बनो, डर डर से भग जाय, सच का चिमटा साथ हो, भूत स्वयं भग जाय। आगे ही बढ़ते रहो, पीछे मुड़ो न आप, सच की माला हाथ में, राम नाम का जाप। जोर लगाओ रगड़ में, दो पाथर के बीच, पाथर का पानी करो, पथ को डालो सींच। चलती चींटी मारकर, मत लेना तुम पाप, साईं करते न्याय हैं, नहीं करेंगे माफ। »

कर क्षण का उपयोग तू

क्षण में जीना सीख ले, क्षण जाता है बीत। रुकता नहीं एक भी क्षण, चलना इसकी रीत। कर क्षण का उपयोग तू, पीछे की सब भूल, अभी अभी है जिन्दगी, आगे पीछे शूल। क्षण मत खोना बावरे, नशे-नींद में चूर, जग जा पल पल भोग ले, जी ले तू भरपूर। आते रहते दिन सदा, जाती रहती रात, बचपन यौवन बन रहे, बस बीती सी बात। जो है सब कुछ अभी है, अभी आज में खेल, अभी सजी है रोशनी, है दीपक में तेल। कल का किसको ज्ञान है, दीपक रहे कि तेल,... »

कविता : हौसला

हौसला निशीथ में व्योम का विस्तार है हौसला विहान में बाल रवि का भास है नाउम्मीदी में है हौसला खिलती हुई एक कली हौसला ही है कुसमय में सुसमय की इकफली हौसला ही है श्रृंगार जीवन का हौसला ही भगवान है हौसले की ताकत इस दुनियां में सचमुच बड़ी महान है || हौसले की नाव में बैठ जो आगे बढ़ा मुश्किलों के पर्वतों पर वो चढ़ा हौसला नव योजनाओं का निर्माण है हौसला विधा का महाप्राण है हौसले से ही उतरा धरती पर आकाश है हौस... »

खूबसूरत है नजारा

पास बैठे हो बहुत ही खूबसूरत है नजारा कैद करना चाहता है इन पलों को मन हमारा । जिन्दगी की खुशी सबसे बड़ी तो आप हो आज आई है खुशी जब आप बैठे पास हो। थे कहाँ अब तक रहे क्यों, दूर दिल की वादियों से अश्क की नदियों में रखकर क्यों छुपे थे कातिलों से। हम भी क्या बातें पुरानी कर रहे हैं आज फिर से ये नहीं लम्हें हैं ऐसे हाथ से जाने दें फिर से। आज आंगन खूबसूरत लग रहा है खूब सारा, खिल गये हैं फूल गुलदस्ता हुआ है... »

हिन्दी गीत- तुम झूठी या मै झूठी

हिन्दी गीत- तुम झूठी या मै झूठी चलो दोनों बात आज सच कहते है | तुम झूठी या मै झूठा चलो दोनों बात आज तय करते है | मुझको आता नही है चैन तुझको देखे बिना | क्यो कर लिया है प्यार तूने मुझको परखे बिना | एक दूजे के दिल क्यो हम रहते है | चलो दोनों बात आज सच कहते है | तुम झूठी या मै झूठा चलो दोनों बात आज तय करते है | जब आती है याद मेरी तुम क्यो तड़प जाते हो | हो के बेचैन मेरी बांहों मे क्यो मचल जाते हो | क्य... »

यौवन की तकदीर (दोहा छन्द)

सच्चा सच में रह गया, ठगा ठगा सा आज, आशा चोरी कर गये, अपने धोखेबाज। जिनके मन में जम रहा, काले धन पर नाज, वे भी आज सफेद से, खूब दिखे नाराज। भूखा चूहा रेंगता, देख रहा है बाज, सोच रहा है चैन से, पेट भरूँगा आज। आर्थिक हालत मंद है, यही सुना है आज, बेकारी से गिर रही, है यौवन पर गाज। पढ़ा-लिखा भूखा रहा, और खा रहे खीर, कौन लिख रहा इस तरह, यौवन की तकदीर। ——— डॉ0 सतीश चन्द्र पाण्डेय मात्रागत... »

संदेश

पुराने मित्र मेरे! जिंदगी की, हर ख़ुशी तुझको मिले, तेरी खुशियों से निकल कुछ तार मुझ तक भी जुड़े हैं, ठण्ड से सिकुड़े हुए से, बेरहम यादें संजोये, गाँठ बांधी हो किसी ने संवेदनाओं के गले में, सिर्फ सांसें ले रहा कुछ बोल पाता हो नहीं, बोलने की भी जहाँ कुछ आवश्यकता हो नहीं, बिन कहे बस सांस से सन्देश कहता जा रहा हो , पुराने मित्र मेरे! जिंदगी की, हर ख़ुशी तुझको मिले। ……………̷... »

यौवन की तकदीर (दोहा छन्द)

सच्चा सच में रह गया, ठगा ठगा सा आज। आशा चोरी कर गए, अपने धोखेबाज।। जिनके हृदय में रहा, काले धन पर नाज। वे क्यों ऐसे श्वेत से, आज हुए नाराज।। भूखा चूहा रेंगता, देख रहा है बाज। सोच रहा है चैन से, पेट भरूँगा आज।। अर्थव्यवस्था मंद है, यही सुना है आज। बेकारी से गिर रही, है यौवन पर गाज।। मेहनतकश हैं भटक रहे, और खा रहे खीर। कौन लिख रहा इस तरह, यौवन की तकदीर।। »

खुद को कमतर आंक मत(कुंडलिया)

खुद को कमतर आंक मत, खुद पर रख विश्वास, दूर रह उन चीजों से, जो देती हों त्रास, जो देती हों त्रास, मार्ग तेरा रोकें जो, उनसे मत कर नेह, तुझे कमतर मानें जो। कहे कलम तू प्यार, कर ले पहले खुद से मुश्किल सारी दूर, रहेंगी खुद ही तुझसे। ************************* करना हो विश्वास जब, खुद में कर विश्वास। बिना कर्म के फल खाऊँ, ऐसी मत कर आस। ऐसी मत कर आस, कर्म ही सर्वोपरि है, कर्म बिना इंसान, स्वयं का ही तो अर... »

*हिन्दी की परीक्षा*

**हास्य रचना** हिन्दी की परीक्षा थी उस दिन, चिंता से हृदय धड़कता था बूंदा-बांदी भी हो रही थी, रह-रहकर बादल गरजता था। भीगता-भागता विद्यालय पहुंचा, पर्चा हाथों में पकड़ लिया, फ़िर पर्चा पढ़ने बैठ गया, पढ़ते ही छाया अंधकार, चक्कर आया सिर घूम गया। इसमें सवाल वे आए थे, जिनमें मैं गोल रहा करता, पूछे थे वे ही प्रश्न कि जिनमें, डावांडोल रहा करता छंद लिखने को बोला था, मेरी बोलती बंद हो गई। अलंकार के प्रकार... »

भलाई याद रखो

भलाई याद रखो बुराई भूल जाओ डिगो मत सत्यता से भले सौ शूल पाओ। कभी खुशियों के झूले आप भी झूल जाओ, अहो, चिंता की बातें कभी तो भूल जाओ। नजरअंदाज करना कला है सीख लो तुम आजमा कर इसे भी निकलना सीख लो तुम। कई मुश्किल मिलेंगी कई दुश्वारियां भी मगर मुश्किल समय में निखरना सीख लो तुम। कटो मत दोस्तों से घुसो महफ़िल में उनकी जिगर में दोस्तों के चिपकना सीख लो तुम। »

खुद की गलती देख ले(कुंडलिया छन्द)

खुद की गलती देख ले, गर अपनी यह आंख, तब सुधार होगा सरल, खूब बढ़ेगी साख। खूब बढ़ेगी साख, कमी खुद दूर रहेगी, गलत दिशा में न जा, हमेशा यही कहेगी। कहे लेखनी अगर, देख लो खुद की गलती, तब पाओगे स्वयं , आप चारित्रिक बढ़ती। »

गठबंधन

तीन छात्र थे केवल कक्षा में। आ बैठ गए तीनों परीक्षा में।। प्रथम श्रेणी में पास किया एक दूजा द्वितीय दर्जे को पाया। तीजा तेतीस फीसदी लाकर तीजे दर्जे तीजे स्थान पे आया।। अफसोस कि तीनों आखिर छात्रवृत्ति से कुछ दूर रह गए। बासठ पर पहला अटका है छप्पन पर मगरुर रह गए।। सोच में देख दोनों को तीजा लगा ठहाका जोर से बोला। मिले वजीफा पच्चासी पर फिर क्या मुश्किल है भोला।। बारी -बारी तुम दोनों से गठबंधन आ मैं करत... »

इश्क़ वाला लव

डायरी के हर पन्ने पे तेरा नाम लिखती हु   लिखती हु मिटाती हु फिर याद करती हूं लिखते लिखते हर पल भूल जाती ह   इस मोहब्बत में इतनी मसरूफ होती हूं जब भी पन्ना खोलती हूं तुझको करीब पाती हूँ   इस इश्क़ में खुद को मैं डावांडोल करती है मोहब्बत में खुद को इतना खुद से दूर करती हूं हा जी हाँ दूर करती हूं खुद को दूर करती हूं जान लो इतना कि जान से ज्यादा    हा जी जान से ज्यादा मै तुमको हां तुमको प्यार करती हूं ... »

इश्क़ वाला लव

डायरी के हर पन्ने पे तेरा नाम लिखती हु   लिखती हु मिटाती हु फिर याद करती हूं लिखते लिखते हर पल भूल जाती ह   इस मोहब्बत में इतनी मसरूफ होती हूं जब भी पन्ना खोलती हूं तुझको करीब पाती हूँ   इस इश्क़ में खुद को मैं डावांडोल करती है मोहब्बत में खुद को इतना खुद से दूर करती हूं हा जी हाँ दूर करती हूं खुद को दूर करती हूं जान लो इतना कि जान से ज्यादा    हा जी जान से ज्यादा मै तुमको हां तुमको प्यार करती हूं ... »

गज़ल – प्यार की महक |

गज़ल – प्यार की महक | तुम्हारे प्यार की महक अभी बाकी है | दूरिया ही सही तेरी याद अभी बाकी है | रहे जहा बनके चाँद तू चमकता रहेगा | तू पास रहे न रहे धमक तेरी बाकी है | जिंदगी रेत सही बना लो घरौंदा मुझे | मै जुगनू ही सही चमक अभी बाकी है | याद करोगे जब भी पास मुझे पाओगे | मचल कर आओ चाहत अभी बाकी है | बिरान जिंदगी तेरी गुलशन बना दूंगा | जहां हो चर्चा तेरा ललक अभी बाकी है | तेरे सिवा नजरों मेरे कोई टिकता... »

गोदामों में अनाज न सड़े

गोदामों में अनाज न सड़े बल्कि जरूरतमंद को मिले गरीब के भूखे बच्चों को पेट भरकर खाने को मिले। सरकारी स्कूलों में तगड़े नियम लगें, गरीब के बच्चे भी उच्चस्तरीय पढ़ें। मध्याह्न भोजन योजना तक सीमित न रहें सरकारी विद्यालय बच्चों के भविष्य को दिखावटीपन न कर सके घायल। गरीबों की ओर प्राथमिकता की दृष्टि रखी जाये, गरीब गृहणी की भी खनकती रहे पायल। »

बेरोजगार की हालत कब सुधरेगी

बेरोजगार की हालत कब सुधरेगी, कैसे सुधरेगी, कब बनेंगी नई नीतियाँ। कब खुलेंगी खूब भर्तियां। कोचिंग कर चुके नौजवान को कब मिलेगा परीक्षा देने का मौका कब चलेगा उनका चूल्हा चौका। परीक्षा कोई पास कर पाए या नहीं कर पाये लेकिन पद तो आएं परीक्षा तो हो, निजी क्षेत्र की हो या सार्वजनिक क्षेत्र की हो लेकिन रोजगार की नीति तो हो। परम्परागत शिक्षा के स्थान पर आम आदमी की पहुँच तक तकनीकी शिक्षा तो हो। कुछ न हो लेकि... »

*वन प्रकृति की आभा*

प्रकृति से दूर हो रहा मानव दु:खों से चूर हो रहा मानव, वन प्रकृति की आभा बढ़ाते , शुद्ध पवन दे उम्र बढ़ाते वृक्ष बचाओ वृक्ष लगाओ वरना एक दिन पछताओगे, ना खाने को भोजन होगा, शुद्ध पवन भी ना पाओगे। देख कुल्हाड़ी कांपा तरुवर, रोता है चिल्लाता है, उसकी चीख ऐ लोभी मानव, तू क्यों ना सुन पाता है मात्र मृदा और जल देने से, तरु हमको क्या-क्या दे जाता है फ़ल-फ़ूल तरकारी देता, प्रकृति सुरम्य बनाता है, उसकी रक्ष... »

बाबा मेरी पहचान है

नही था कोई एहसास उसके होने का घर मे क्यों क्योंकि वो एक बेटी थी नही थी कोई एहमियत उसकी ओर न थी उसके मुंह मे ज़ुबाम छीन ली थी जन्म से पहले ही उसकी आवाज़ क्या नही था हक़ उसको मां बाबा बोलने का या नही है उसका कोई वजूद इस जहां से बेटी है तो क्या वो भी तो इंसान है उसकी भी तो एक पहचान है उसको भी तो मिलनी चाहिए पहचान है बनना उसको भी तो अपने बाबा की जान है पर कोई होता नही पूरा उसका अरमान है फिर भी वो कहती है... »

बम्बई मिठाई वाला

टन- टन टन- टन करते वो फेरीवाला आता था। गदा के जैसे डब्बा अपने काँधे पर ले आता था।। सिर पे टोपी गले में गमछा नाक पे ऐनक बड भाता था। बम्बई मिठाय,,लड़का सब खाय बूढ़ा ललाय गाते गाते आता था।। खड़ा हो गया घर के आगे हम बच्चों की टोली आई। आजा बाबू पास हमारे लेकर आया बम्बई मिठाई।। दस पैसे में माला ले लो घड़ी मिलेगी चार आने में। मात्र अठन्नी काफी है एक मोटरसाइकिल बन जाने में।। पूरा रुपया लेकर आओ तुम्हें दिल... »

बम्बई मिठाई वाला

टन- टन टन- टन करते वो फेरीवाला आता था। गदा के जैसे डब्बा अपने काँधे पर ले आता था।। सिर पे टोपी गले में गमछा नाक पे ऐनक बड भाता था। बम्बई मिठाय,,लड़का सब खाय बूढ़ा ललाय गाते गाते आता था।। खड़ा हो गया घर के आगे हम बच्चों की टोली आई। आजा बाबू पास हमारे लेकर आया बम्बई मिठाई।। दस पैसे में माला ले लो घड़ी मिलेगी चार आने में। मात्र अठन्नी काफी है एक मोटरसाइकिल बन जाने में।। पूरा रुपया लेकर आओ तुम्हें दिख... »

*ज़िन्दगी में एक अच्छा मित्र*

किस्मत से ही मिलती है जगह किसी दोस्त के दिल में, यूं ही तो कोई शख्स, जन्नत का हकदार नहीं होता। अच्छे दोस्त मिलते हैं, अच्छे नसीब से ही, यूं ही तो किसी को किसी का, इन्तज़ार नहीं होता। ज़िन्दगी में मिल जाए गर, एक भी अच्छा मित्र.. फ़िर ज़िन्दगी से कभी कोई, शिकवा नहीं रहता।। ____✍️गीता »

परहित

चोट दूजे को लगी हो आपको यदि दर्द हो तब समझना आप सचमुच में भले इंसान हो। आजकल सब को है मतलब बस स्वयं के दर्द से औऱ का भी दर्द देखे यह मनुज का फर्ज है। फर्ज अपना भूलकर हम बस स्वयं में मुग्ध हैं चाहना खुद जा भला ही आजकल का मर्ज है। वे हैं विरले जो स्वयं के साथ परहित देखते हैं, खुद के अर्जन से गरीबों का भला भी सोचते हैं। »

मुश्किलें हार जाएं

दर्द का घमंड चूर करो दर्द में खूब हँसो तोड़ पाये न हौसला अब यह खूब हंसकर कर इसे तुम दूर करो। मुश्किलों से न घबराओ कभी बल्कि आ जाओ जिद में मुश्किलें हार जायें उन्हें मजबूर कर दो। समय विपरीत हो जब हौसला साथ हो तब बुरे हालात के भी घमंड चूर कर दो। »

दिया बनकर लड़ो अंधेरे

दिया बनकर लड़ो अंधेरे से खुद भी रोशन रहो सभी को रोशनी दो, किसी की जिन्दगी में अगर हों स्याह रातें, आप बनकर सहारा उन्हें भी रोशनी दो। प्रेम ही है उजाला उसे बांटो सभी को, और बदले में पाओ मुस्कुराहट का उजाला। अगर आंगन में घर के कोई पशु भी खड़ा हो मिटाने भूख उसकी दान कर लो निवाला। जहाँ पर हो रही हो निरीहों की मदद कुछ वहीं अल्लाह बसते वहीं सच्चा शिवाला। बनाओ तन का दीपक बनाओ मन की बाती जलो बिंदास होकर बां... »

दिया बनकर लड़ो अंधेरे

दिया बनकर लड़ो अंधेरे से खुद भी रोशन रहो सभी को रोशनी दो, किसी की जिन्दगी में अगर हों स्याह रातें, आप बनकर सहारा उन्हें भी रोशनी दो। प्रेम ही है उजाला उसे बांटो सभी को, और बदले में पाओ मुस्कुराहट का उजाला। अगर आंगन में घर कोई पशु भी खड़ा मिटाने भूख उसकी दान कर लो निवाला। जहाँ पर हो रही हो निरीहों की मदद कुछ वहीं अल्लाह बस्ते वहीं सच्चा शिवाला। बनाओ तन का दीपक बनाओ मन की बाती जलो बिंदास होकर बांट लो ... »

भाई खुश हो

कविता-भाई खुश हो ————————– भाई खुश हो, आज तुम्हारा जन्मदिन है, मैं तो तुमसे दूर हूं मेरा आशीष तुम्हारे साथ है, प्यार मिले , सत्कार मिले, सम्मान मिले, मिले जगत से – खुशियों का सार मिले, खुदा से बस इतना कहती हूं हर सुख तुम्हें आज मिले, हर बाधा तुमसे दूर रहे- बनो सदा हिमगिरी जैसे रक्षक बनकर खड़े रहो, विशाल बनो अंबर जैसे सूरज जैसा तेज रखो, क्... »

ऐसी होती हैं बेटियां

नव वर्ष की उमंग सी होती है बेटियां, संगीत की तरंग सी होती है बेटियां मां-बाप के हर दर्द में रोती हैं बेटियां, सागर से निकले मोती सी होती है बेटियां सुमधुर काव्य-गायन सी होती है बेटियां, ब्रह्म मुहूर्त सी पावन होती है बेटियां वह घर प्रभु के आशीष से युक्त है, इस जहां में,जहां जन्म लेती है बेटियां.. ।। ___✍️गीता »

*दिनकर आए हैं कई दिनों के बाद*

दिनकर आए हैं कई दिनों के बाद, विटामिन डी ले लो। बांट रहे हैं मुफ्त में सौगात, विटामिन डी ले लो। बातें करो धूप संग कुछ देर बैठ कर, किरणों को बैठाओ देकर आसन दिनकर होंगे बहुत प्रसन्न, विटामिन डी ले लो। दिनकर आए हैं कई दिनों के बाद, विटामिन डी ले लो। अकड़ा सा बदन खुल जाएगा, सर्दी में थोड़ा ताप मिल जाएगा, आज है दिवस सुनहरा, विटामिन डी ले लो। दिनकर आए हैं कई दिनों के बाद, विटामिन डी ले लो। पवन भी मंद-मं... »

लौट आओ

अंधेरी रात में यूँ छोड़कर रूठ कर चल दिये थे तुम अचानक सोचते रह गए हम कि आगे क्या होगा, मगर देखा सुबह तो रोज की ही भांति सूरज उग आया। उड़गनों ने सदा की तरह ही गीत गाया। जहाँ कल तक थी किरणें अब भी हैं, जहाँ रहती थी अब भी है छाया। नलों में आज भी पानी आया उदर की पूर्ति को है आज भी खाना खाया। धड़कनें आज भी हैं सीने में जिन्दगी आज भी है जीने में। चल रही हैं घड़ी की सुइयां भी रोज की ही तरह तुम नहीं हो कमी है... »

खूब निराश हो ना

हार गए इसलिए उदास हो ना खूब निराश हो ना दिल टूट गया है ना उत्साह रूठ गया है ना सब तरफ से हताश हो ना, हाथों में माथा टेककर सोच रहे हो ना क्या करूँ तो सुनो, सबसे पहले उदासी छोड़ो, निराशा की कड़ी तोड़ो, जीवन की दिशा को आशा और उत्साह की तरफ मोड़ो। जो हुआ सो हुआ, अब करो दुआ खुद के लिए भी दूसरों के लिए भी। ऐसे मथो माखन कि उपजे सुगन्धित घी, मन की हार है अन्यथा कुछ नहीं है, जन्म लेते समय कुछ नहीं लाये थे साथ,... »

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