जब भी मै अकेलेपन का बोझ,
महसूस करता हूँ दिल पर अपने
तो कलम खुद ब खुद बन कर साथी
हाथ में मेरे आ जाती है,
और वो बोझ उतर कर दिल पर से ,
कागज़ पर सिमट आता है,
और उसका यह सिमटना ही,
आगे चल कर “कविता” कहलाता है.
जब भी मै अकेलेपन का बोझ,
महसूस करता हूँ दिल पर अपने
तो कलम खुद ब खुद बन कर साथी
हाथ में मेरे आ जाती है,
और वो बोझ उतर कर दिल पर से ,
कागज़ पर सिमट आता है,
और उसका यह सिमटना ही,
आगे चल कर “कविता” कहलाता है.