कागज़ की कश्ती भी पार लगाई है हमने,
लहरों को चीर कर मन्ज़िल पाई है हमने,
बहुत मुश्किल था तैर कर उस पार जाना,
हौंसलों के बाज़ुओं से जीत पाई है हमने।।
राही (अंजाना)
कागज़ की कश्ती भी पार लगाई है हमने,
लहरों को चीर कर मन्ज़िल पाई है हमने,
बहुत मुश्किल था तैर कर उस पार जाना,
हौंसलों के बाज़ुओं से जीत पाई है हमने।।
राही (अंजाना)