दाने दाने को तरसे क्यों जो बीज यहाँ पर बोए,
अपने ही बच्चों की खातिर क्यों वो भूखा सोए,
अपनी मेहनत का वो क्यों न उचित मूल्य पिरोये,
सपनों में रंग भरने को वो क्यों अपने जीवन को खोए।।
राही (अंजाना)

दाने दाने को तरसे क्यों जो बीज यहाँ पर बोए,
अपने ही बच्चों की खातिर क्यों वो भूखा सोए,
अपनी मेहनत का वो क्यों न उचित मूल्य पिरोये,
सपनों में रंग भरने को वो क्यों अपने जीवन को खोए।।
राही (अंजाना)