कविताएं गढ़ना जानते हो,
भावनाएं पढ़ना कैसे भूल गए?
कुछ शब्द उधार ही मांगे थे,
तुम उन्हे चूकाना भूल गए।
लिखनी बराबर चलती रही,
पर दोस्त बनाना भूल गए।
हमने तो हंसी बस मांगी थी,
तुम हंसना हंसाना भूल गए!
निमिषा सिंघल
कविताएं गढ़ना जानते हो,
भावनाएं पढ़ना कैसे भूल गए?
कुछ शब्द उधार ही मांगे थे,
तुम उन्हे चूकाना भूल गए।
लिखनी बराबर चलती रही,
पर दोस्त बनाना भूल गए।
हमने तो हंसी बस मांगी थी,
तुम हंसना हंसाना भूल गए!
निमिषा सिंघल