टूटते ख्वाबों के अफसाने बहुत से हैं!
मयकशे-जाम के भी बहाने बहुत से हैं!
एक तू ही नहीं है तन्हा गम-ए-हालात से,
शमा-ए-हुस्न के भी परवाने बहुत से हैं!
Composed By #महादेव
टूटते ख्वाबों के अफसाने बहुत से हैं!
मयकशे-जाम के भी बहाने बहुत से हैं!
एक तू ही नहीं है तन्हा गम-ए-हालात से,
शमा-ए-हुस्न के भी परवाने बहुत से हैं!
Composed By #महादेव