शेर-ओ-शायरी

शायरी

साहित्य के वो योद्धा तलवार नहीं उठाते । लड़ते जरूर हैं पर लड़ाकू नहीं कहाते।। »

आर्यन सिंह की बेस्ट शायरी

1. हम जमाने से बेहद सताए हुए हैं मगर अपनी इज्जत बचाए हुए हैं मार डालेगा दुश्मन जमाना तेरा इसलिए तुझको दिल में छुपाए हुए हैं भले जुल्म कर ले ये सारा जमाना मगर फिर भी हम दिल लगाए हुए हैं 2. सच बता दो मुझे आप आओगे कब टूटे रिश्तों को फिर से निभाओगे कब हैं खयालात दिल में छुपाए बहुत वो हकीकत कहानी सुनाओगे कब पूछता हूँ बता दो जरा सच मुझे फिर से रंगीन रातें मनाओगे कब 3. मैं सागर की गहराई हूं तुम नहीं किना... »

आर्यन सिंह अहीर की शेर ओ शायरी

1. जो कल था वही आज हूं थोड़ा खफा हूं थोड़ा नाराज हूं 2. जिस दिन किस्मत के सितारे बदल जायेंगे देखते ही देखते नजारे बदल जाएंगे नाव क्या चीज है खरीद लेंगे समुंदर बस थोड़ा सा रिस्क है किनारे बदल जायेंगे 3. निकले हैं घर से तो मंजिल जरूर पाऊंगा कसम खाई है वो करके दिखाऊंगा 4. झूठी शान का परिंदा ज्यादा फड़फड़ाता है जिसमें जान होती है ना वह कहता नहीं करके दिखाता है 5. हम कहते नहीं करके दिखाते हैं वक्त आने ... »

उस दिन नया साल है

हर वक्त बदलती जिन्दगी, हर वक़्त बदलती ग्रहों की चाल है, अंकों के बदलने से कुछ नहीं होगा, बदलेगें जिस दिन हम उस दिन नया साल है »

अलविदा २०२०

अलविदा २०२० तू बहुत याद आएगा… तूने गुरू बनकर बहुत कुछ सिखाया अफसोस है अब तू कभी लौटकर ना आएगा.. »

ऐसे मत नववर्ष मनाओ

ऐसे मत नववर्ष मनाओ जीवों को ना मार के खाओ, भूंख मिटाने के हैं और भी साधन शाकाहार तुम बनाकर खाओ.. »

तुझे याद नहीं करूंगी

सोंचती हूँ नये साल में कुछ बड़ा करूंगी ———————————————— चल ठीक है, तुझे याद नहीं करूंगी…..❤❤ »

वक्त ने समझा दिया

खामोंश रहना जज्बात बयां करने से अच्छा है दिल की बातें दिल में छुपाना अच्छा है काश ! ये पहले ही समझ जाते हम, चलो वक्त ने समझा दिया ये भी अच्छा है…. »

अच्छा नहीं लगता

तुम जब बात-बात पर झगड़ा करते हो मुझसे सच कहूं तो बुरा नहीं लगता, पर जब तुम नाराज होकर बात करना बंद कर देते हो तो कुछ भी अच्छा नहीं लगता… »

कोशिश करूंगा

कोशिश करूंगा तुम्हे भूलने की, पर जानता हूँ मैं नाकाम ही रहूंगा. ——————❤❤ By Vivek singhal »

यह साल रहेगा यादगार

यह साल हमेशा रहेगा यादगार, ज्यादा ना सही पर कुछ तो दे गया, यह साल बहुत सारे सबक दे गया… ——————❤❤ By Vivek singhal »

उम्मीद

यह जो नाजुक सा दौर है आहिस्ता आहिस्ता खत्म हो जाएगा बस उम्मीदों का दीपक तुम यूं ही आगे भी जलाए रखना। वीरेंद्र सेन प्रयागराज »

रमेश पाल आने वाले है

मुह्हबत में तुम्हे आशु बहाना तक नहीं आया बनारस में रहे और पान खाना तक नहीं आया ये कैसे राश्ते से लेकर चले आये तुम मुझको कहा का मयकदा एक चाय खाना तक नहीं आया तेरे सीने में दम है दिल नहीं है तेरा दम गर्मी ए महफ़िल नहीं है निकल जा अक्ल के आगे की ये नूर की ये चरागे राह है मंजिल नहीं है अब चराग बज्म के सब जगमगाने वाले है क्यों की अदब से बैठ जाईये रमेश पाल आने वाले है डॉ रमेश सिंह पाल वैज्ञानिक, लेखक, आध... »

ज़िन्दगी के इस खेल में

तेरी परछाई को देख लेता हूँ चेहरे को देखने का मौका कहाँ मिलता। ज़िन्दगी के इस खेल में दौड़-दौड़ दौड़ लेता हूँ चौका कहाँ मिलता।। »

वह था ईश्वर अवतार

ज़िन्दगी भर सहा जिसने अत्याचार, नारी और दलित का किया जिसने उध्दार , कलम था, जिसका हथियार वास्तव में वह था , साक्षात् ईश्वर अवतार »

आत्मा की संतुष्टि

सुख की तलाश में हम अनगिनत इच्छाओं की पूर्ति करते रहे आशाओं के अम्बार लगाते रहे परंतु सुख तो केवल आत्मा की संतुष्टि से ही मिलता है… »

दिल दुःखाने लगे हैं लोग

बेगाने हो गये हैं लोग अब कतराने लगे हैं लोग अपने साये से भी अब कोई उम्मीद ना रही जाने क्यूं इतना दिल दुःखाने लगे हैं लोग… »

आंधी

मेंने आशियाना बनाना छोड़ दिया। जब से, आंधी के मौसम आ गया।। »

याद ए उल्फत

कुछ दिन संभालो जरा, अपनी याद- ए -उल्फत तुम, कि पुरानी चोट सर्दी में दर्द बहुत देती हैं।। AK »

दम टूटता गया उम्मीदों का…

सिलसिले वार दम टूटता गया उम्मीदों का अब क्या करेंगे हम सुनहरे सपनों का अब तो अपना जीवन भी किराये का लगता है क्या करेंगे अब हौसलों के पंखों का ??? »

डर

बहक ना जाएं कहीं कदम हमारे डरते हैं इसी बात से हम क्योंकि गुजरते हैं हर रोज हम भी मैखानें के करीब से। वीरेंद्र सेन प्रयागराज »

तेरा जवाब

ऐ खूबसूरत बहारों की मलिका कहां से लाऊं ढूंढ कर तेरा जवाब आसमां में चमकता है जो चांद लगा है उसमें भी दाग। वीरेंद्र सेन प्रयागराज »

शायरी

कलम भी वही है दावात भी वही है। दिल में भरे मेरे जज़्बात भी वही है ।। लिखना चाहूँ मै एक गजल आप पर पर क्या करे अपनी मुलाकात नहीं है।। »

समवेत स्वर में जय हिंद

समवेत स्वर में जय हिंद बोल दो कभी प्यार के पट खोल दो कभी ये मुल्क तुम्हारा ही है दोस्त! इसे प्यार और सम्मान से देख तो कभी… ***************************** »

“थपकी प्यार की”

मेरा गम तेरे दर्द से ज्यादा है मेरी आँख में आँसू तुझसे ज्यादा है एक बार देकर प्यार की थपकी सुला दे साथी ! मेरे दिल में जख्म़ तुझसे ज्यादा है… »

ताश के पत्तों की तरह

ताश के पत्तों की तरह बिखर गई मैं जब तूने कहा मैं तेरा नहीं किसी और का हूँ…!! »

*किस्मत*

किस्मत से ही बनते हैं, दिलों के रिश्ते वरना चंद मुलाकातों से, कहां रिश्ते बना करते हैं.. *****✍️गीता »

“सपने”

कुछ ख्वाब भी झूठे हैं, और ख्वाहिशें भी अधूरी हैं पर खुश रहने के लिए, कुछ सपने भी जरूरी हैं *****✍️गीता »

तुम्हारे नाम की मेंहदी…

तुम कहते रहे और हम सुनते रहे आख़री वक्त तक सपने बुनते रहे, उठ गई डोली मेरे अरमानों की फिर भी हम तुम्हारे नाम की मेंहदी रचते रहे… »

‘आज तुमने मुस्कुराकर बात की’

आज तुमने मुस्कुराकर बात की कुछ रोने वाली और कुछ हँसने वाली बात की, अच्छा लगा मुझको तुम्हारा झगड़ा करना भी खुशी इस बात की है कि तुमने हमसे बात की… »

दामन छोंड़कर चल दिये

इल्जाम पर इल्जाम लगाता ही रहा वो हम चुपचाप सहते रहे, जब हद हो गई सहने की तो हमने कुछ ना कहा बस दामन छोंड़कर चल दिये…. »

सरहद

सौ दफा मैं हारा बेशक जिद है फिर भी जीत की सरहद नहीं होती कोई परिंदों और प्रीत की। वीरेंद्र सेन प्रयागराज »

कहानी

जिसकी जैसी थी कहानी, वो वैसा किस्सा कह गया कोई चुनता रहा तिनके यहां, कोई मोती चुराकर ले गया *****✍️गीता »

अच्छी किस्मत

अच्छी किस्मत वाले लोग आसानी मिल जाते हैं पर दिल के अच्छे लोग बड़ी मुश्किल से रहते हैं… »

स्वाद मोहब्बत का

वो हमें छोंड़कर गैरों के हो गये चलो स्वाद ले लेने दो उन्हें भी गैरों की मोहब्बत का, जब वो हमारे नहीं हुए तो किसी और के क्या होंगे ?? »

इजाजत

आपकी आंखों में खोना चाहता हूं आपकी जुल्फों में सोना चाहता हूं । अर्जी डाल रखी है हमने भी इजाजत की मंजूरी मिल गई, तो आपका होना चाहता हूं। वीरेंद्र सेन प्रयागराज »

तेरी मोहब्बत में

तेरी मोहब्बत में, इस कदर मसरूफ़ रहे तेरी मोहब्बत ने, तन्हाई में भी तन्हा रहने ना दिया *****✍️गीता »

*आधा चांद*

आज चांद आधा है, पर उसकी याद पूरी आ रही सितारे हंस रहे मुझ पर, मेरा ख्वाब अधूरा रह गया *****✍️गीता »

*अपने नसीब की*..

आह ! ना लेना कभी, किसी गरीब की हर किसी को मिल जाती है, अपने नसीब की.. *****✍️गीता »

मोहब्बत की कहानी

धीरे-धीरे लौ जलती रही, धीरे-धीरे शमा पिघलती रही परवाना दूर से ही मचलता रहा, हर मोहब्बत की कहानी है यही *****✍️गीता »

*एहसास*

तू जब हुआ करता था मेरे करीब तो एक अलग एहसास हुआ करता था आज जब दूर है मुझसे तो कोई एहसास ही नहीं होता…!! »

मैं वो चट्टान हूँ

कोशिश बहुत करता है वो मुझे तोड़ने की, मगर मैं वो चट्टान हूँ जो पिघल तो सकती है मगर टूट नहीं सकती… »

मोहब्बत

ये पता है कि दुश्वारियां बहुत हैं मोहब्बत की पथरीली राहों में । न जाने फिर भी क्यों बेचैन रहता है दिल सिमटने को किसी की बाहों में। वीरेंद्र सेन प्रयागराज »

दायरा

कुछ इस तरह से बढ़ता गया दायरा मोहब्बत का कि हम जान भी ना पाए कि दिल ने कब करवट बदल ली। »

जाने क्यूँ..

जाने क्यूँ तुम मुझे इतना चाहते हो ना चाहते हुए भी प्यार जताते हो हम किसी और की अमानत हैं साहब! क्यों हम पर इतना प्यार लुटाते हो ? »

गुज़रे पल..

गुज़रे पलों को याद ना कर, ख़ुदा से उनकी फ़रियाद ना कर जो नसीब में है वो होकर रहेगा, तू कल के लिए… अपना आज बरबाद ना कर.. »

*वही एहसास*

थकान नहीं मुझे,आराम चाहिए तू दूर नहीं, मेरे पास चाहिए आंख लग जाए आज जी भर के मेरी, मां, तेरी गोदी का वही एहसास चाहिए.. *****✍️गीता »

दिल का दीप

न होती हर रात अमावस की न होती हर रोज दिवाली है। जब दीप जले दिल का दिलबर समझो उस रोज दिवाली है।। »

दीदार

अब चलें काफी रात हो गई । आपसे मेरी दो बातें हो गई।। वक्त और ठंड के तकाजा है। चलो आप से दीदार तो हो गई।। »

मैं भी चौकीदार!

इश्क़ ने हमें बर्बाद किया; फिर भी दिल ने; खुद को आबाद किया।-२ अरे! ना आती है , तो ना आए ! नींदें रात को, मैं भी चौकीदार ! गर्व से! मोदी जी को याद किया। »

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