Sher-o-Shayari

क्यों तुम मेरा पता पूछते हो

नहीं है कोई खबर मुझे खुद की क्यों तुम मेरा पता पूछते हो »

उम्मीदों का ठेला

उम्मीदों का ठेला लेकर रोज निकल जाता है कोई, कागज़ कोरे जेब में लेकर रोज निकल जाता है कोई।। कलम कीमती है कितनी ये भटक राह में जाना है, तभी बैग में स्याही लेकर रोज निकल जाता है कोई।। राही अंजाना »

उम्मीदों का ठेला

उम्मीदों का ठेला लेकर रोज निकल जाता है कोई, कागज़ कोरे जेब में लेकर रोज निकल जाता है कोई।। कलम कीमती है कितनी ये भटक राह में जाना है, तभी बैग में स्याही लेकर रोज निकल जाता है कोई।। राही अंजाना »

ज़िद्दी

ये दिल बहुत ज़िद्दी है मेरा! ग़मों की दौलत जमा करता है; चोट दिल पर हो या जिस्म पर हर ज़ख्म पे ग़ुमांं करता है। »

आँखे

बन्द कर लो बेशक ऑंखें मर्ज़ी तुम्हारी सही, तुम्हारी आँखों से मुतासिर आँखें हमारी सही।। राही अंजाना मुतासिर – प्रभावित »

Kaabil-e-taareef h wo log

Kaabil-e-taareef h wo log… Jo meri buraayi mere aage krne ki himmat rkhte h…… Peeth piche buraayi krne walon… Tumhari soch or nazariye ki mujhe parwaah takk nahi……. #Sheetal »

घर

अब घर भी नहीं घर की तमन्ना भी नहीं है मुद्दत हुई सोचा था कि घर जाएँगे इक दिन »

कारीगर

दिलों को सिलने वाला कारीगर ढूंढ निकाला, हार कर जितने वाला बाज़ीगर ढूंढ निकाला, »

इश्क़ की इलायची

कब इश्क़ की इलायची जिंदगी में घुलती है जिंदग़ी में महक तभी ताउम्र ठहरती है »

जब होगा दीदार रब का

जब होगा दीदार रब का तो पूछुंगी मैं की तेरी इबादत मोहब्बत में इतनी अड़चने क्यों हैं »

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