तकलीफें

हम अपनी तकलीफें किसी को बता नहीं सकते, कोई तमाशा ना बना दे मेरी बेबसी का इसलिए किसी को दिल के छाले दिखा नहीं सकते।

नासमझ

मेरी शराफत को लोग मेरी कमजोरी समझते हैं नासमझ है वह लोग जो मुझे नासमझ समझते हैं।

कातिल

जिंदगी जिस राह पर चल रही है, उसकी कोई मंजिल नहीं है, कश्ती साहिल पे थी सही, मजधार में डूब रही है, कत्ल हुआ है…

कातिल

जिंदगी जिस राह पर चल रही है, उसकी कोई मंजिल नहीं है, कश्ती साहिल पे थी सही, मजधार में डूब रही है, कत्ल हुआ है…

मन

मन को सम्भाल कर रखा है तेरी यादों को सहेज कर रखा है आँख में आँसू रोज आने लगे हैं, क्योंकि जो कल मेरा था…

दुनियादारी

पियक्कड़ों के शहर में शरबत ढूंढ रहा हूं खारे सागरों से मीठा पानी पुकारता रहा हूं अपने हाथों से अंजुली भर के पानी पिलाती हो…

मेरे लिए

कब से उठाए बैठी हूँ अपनी घूंघट उनके दीदार के लिए । एक वो है ख्वाबों में आशियाना तलाशते है मेरे लिए।।

फुर्सत

एक सुबह चाय ने मुझ से कहा फुर्सत हो तो क्यों नहीं बैठ जाते। तुम्हारे मन मस्तिष्क को हम अंदरुनी ताजगी से भर देते।।

नूर महल

रौशनी से नहा रहा है आज नूर महल, मुद्दत बाद निकला है चाँद मेरे शहर मे । ए फीज़ा तुझे है काली घटा की कसम,…

ज़ौक में

अब आ ही गए हो तुम तो दुश्मन की जरूरत ना रहेगी बैठे बैठे बहुत वक़्त गुजर गया लगता है अब फुरसत ना रहेगी नाम…

मेरे अपने

हम गिरें भी तो वहीं जहां इर्द-गिर्द मेरे अपने थे। शायद ना थी खबर हमें रेत पर बने मेरे सपने थे। वीरेंद्र

दो गज़ ज़मीन

अश्कों के समंदर में ए खुदा मुझे सिर्फ दो गज ज़मीन दे दे। गर करने लगे वह अपनो से बेवफ़ाई तब,ज़माना मुझे उसी में दफ़ना…

नियत

काली मुलायम उड़ती जुल्फें तेरी, इश्कबाज़ों पे कयामत ढाती है। जब चले तू खुली वादियो में, घटा की नियत भी बदलती है।।

तूफान

आते नहीं तूफान तो कश्ती पार हो जाती जीत जाते जंग नहीं हार हो जाती आते रहे तूफान अब तैर जाएंगे सोचा नहीं था दुनिया…

शब्द

सम्हाल कर बोले शब्द वापस नहीं आएंगे पता है आपको कितना दिल दुखाएगे बोलो गे अगर मीठे शब्द तो घाव भरने वाला मरहम बन जाएगे

कपूत

सब कुछ मान कर जो पालते रहे बीपत्तियों का काँटा निकालते रहे बुढ़ापा मे वो असहाय हो गए कपूत घर से बाहर निकालते रहे

मधुशाला

मधुशाला में ताला न लगाइए अभी नशा चढ़ा ही नहीं। कुछ यादें और ताजा होने दीजिए अभी तक पैमाने को लब से लगाया ही नहीं।।

मरहम

यादों की मरहम भी क्या मरहम है। बेरहम भी मरहम पर जीने लगे है।। काश.. यह मरहम मर्ज़ नहीं होते। हम और आप आज कैसे…

तू आबाद रहे

तू रहे आबाद कोई गम ना हो तेरी आंखें दर्द से कभी नम ना हो हमनें बहुत देखें हैं अपने जीवन में दुख ईश्वर से…

शिकायत

तुम्हारी नाराजगी को मैं हरगिज समझती हूं अपनी गलतियों को भी खूब समझती हूं पर इंसान हूँ गलती तो हो ही जाती है अपनों से…

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