मेरे लब पर तेरे लब पर सब के लब पर गंगा है,
जो भारत का वासी केवल उसकी जान तिरंगा है
(कुलदीप विद्यार्थी)
जब कलम की जरुरत थी उठाई, आज तिरंगे की जरुरत पड़ी उठा लिया, बाकी ये देश के गद्दार समझ जाए पीछे कभी हटने की सोची नहीं हैं

मेरे लब पर तेरे लब पर सब के लब पर गंगा है,
जो भारत का वासी केवल उसकी जान तिरंगा है
(कुलदीप विद्यार्थी)
जब कलम की जरुरत थी उठाई, आज तिरंगे की जरुरत पड़ी उठा लिया, बाकी ये देश के गद्दार समझ जाए पीछे कभी हटने की सोची नहीं हैं