Site icon Saavan

नंदनवन

चमक रहा चांद पूनम का
जगमग आज आंगन है।
प्रफुल्लित हर कण वसुधा का
सुहानी रात साजन है।।
हृदय के कुंज में प्रीतम
सजाया सेज फूलों का।
नयन पथ से उतर आओ
नहीं है आतंक शूलों का।।
पाक हो दिल दिलवर का
नहीं जन्नत से कम होता।
‘विनयचंद ‘प्रेम की दुनिया
नंदनवन के सम होता।।

Exit mobile version