पैदा होने से पहले मिटा दी जाएँगी बेटियाँ,
बिन कुछ पूछे ही सुला दी जाएँगी बेटियाँ,
गर समय रहते नहीं बचाई जाएँगी बेटियाँ,
तो भूख लगने पर रोटी कैसे बनाएंगी बेटियाँ,
जहाँ कहते हैं कन्धे से कन्धा मिलायेंगी बेटियाँ,
सोंच रखते हैं एक दिन बोझ बन जाएँगी बेटियाँ,
चुपचाप गर यूँही कोख में छिपा दी जाएँगी बेटियाँ,
तो भला इस दुनियां को कैसे खूबसूरत बनायेंगी बेटियाँ॥
राही अंजाना