Poetry on Picture Contest

मैं हिन्दी

हिन्द भाषाओं का सागर है l मैं हिन्दी उसमें से एक हूँ , उद्भव मेरी संस्कृत से है l हिन्द की सारी भाषाओं में भाईचारा था l अंग्रेजी ने हमें स्वार्थ के लिए बांटा था l मेरे संस्कार ने आजादी की चिंगारी डाला था l फिर क्या था मैं इतिहास रचने निकल पड़ा था l हिंद की कड़ी बनी, शंखनाद किया आजादी का l मैंने जुल्मों सितम सहा, पर अडिग रहा l आजादी का मंत्र हिंद के जनमानस में फूंका l ऐसे मैंने आजादी का इतिहास रचा ... »

🌹🌹आज पकड़े गए कान्हा🌹🌹

आज पकड़े गए तुम कन्ह। माखन चुराते हुए,’ माखन खाते हुए।। रोज़ खीजते हो तुम रोज़ सताते हो । नटखट बड़े हो तुम कान्हा.🌹……….।। हाथ नहीं आते हो माखन चुराते हो🌷। माखन खाते तो तुम हो कान्हा दूसरों का नाम धराते हो।🌱 नटखट बड़े हो तुम कान्हा .🌴 कितना सताते हो 🙏🌹🌹…तुम हाथ नहीं आते हो माखन चुराते हो आज बताती हूं तुम को मै कान्हा ✨ कैसे माखन चुराते हो देखती हूं कान्हा🙏 यूं मंद मंद ... »

चेतावनी धरती की

हे अज्ञानी मानव,  सुन ले मेरी पुकार, तेरी हूँ मैं पालनहार,  फिर भी तू कड़े है वार l तुमको  शुद्ध आहार दिया,  मुझको प्लास्टिक की पहाड़ दिया, तुझको जीवनदायी पानी दिया, तुमने उसमें जहर मिलाया  l ओजन जैसी प्रहरी दिया, उसको भी कर्म से छेद किया, तुमको खुला आसमान दिया, उसको भी प्रदूषित किया l तुमको मिट्टी की खुशबू दिया,  तुमने कचरे वाली बदबू  फैलाया , जीवन उपयोगी सारी चीजें दिया,तुमने विनाशकारी चीजें बना... »

दम तोड़ती जिंदगी

अचानक से कर्ण में एक ध्वनि गूंजी , देखा तो भीड़ में कोई दम तोड़ रही थी, पालन हार अपनी जिंदगी की जंग लड़ रही थी, कटती अंग – प्रत्यंग के साथ काली घटा छा रही थी, मानों अपनी कातर नजरों से बहुत कुछ कह रही थी, प्राण खोने का भय न था उसमें जरा भी, मानों किसी की तिवान उसे कचोट रही थी, कौन देगा जीवन इस संसार को ? पखेरू कहाँ  ढूंढेगा अपना बसेरा ? बटोही ढूंढेगा छाँव कहाँ ? सुत करेंगे किलोल कहाँ ? ओह !&#... »

कब आएगा नया सवेरा (स्वतंत्रता दिवस प्रतियोगिता)

रवि के उजाले में हम तिरंगा लहरायेंगे। वीर जवानो के गाथा फिर से हम दोहरायेंगे।। दो मिनट के मौन रख कर हम एक साथ। इंकलाब जिंदाबाद के नारा लगायेंगे।। वतन के लिए हमने क्या किया भूल जायेंगे हम। गर्व से सुभाष बापू के डगर पे हम सबको चलना सिखलायेंगे।। आज़ाद देश के गुलाम बन कर जी रहे हैं हम। फिर भी आज़ादी की कीमत सभी को बतायेंगे।। »

हे भारती आशीष दे मुझको

आज आजादी की शुभ अवसर है , हे भारती नमन मेरा आपको है , आशीष दें आज आप मुझको , घर  के दुश्मनों को मिटा सकूँ , बाहरी दुश्मनों का संहार कर सकूँ , भले मेरा सीना छलनी हो जाए , फिर भी दुश्मनों के सर धड़ से अलग कर सकूँ , रक्त का हर कण तेरे चरणों में  बहा दूँ , दुश्मनों के नापाक इरादे को नाकाम कर दूँ , भले मेरा मस्तक तेरे चरणों का भेंट चढ़ जाए , फ़िर भी मेरा देह दुश्मनों के छक्के छुड़ाते रहे , भले ही आत्मा... »

हिन्दुस्तान हमारा (स्वतंत्रता दिवस प्रतियोगिता)

अपना देश कितना सुंदर कितना प्यारा। हर देश से प्यारा देश हिन्दुस्तान हमारा।। हिन्दी है हम हिन्दी ही मेरा परम धरम। इसलिए तो गर्व करे आज भी हिन्दुस्तान हमारा।। पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण वालों से कोई भेद नहीं। सभी को एक नजर से देखे हिन्दुस्तान हमारा ।। जिसको हिंद से प्रेम नहीं वह अभागा कपूत नादान है। उसे रास्ते पर लाओ यही संदेश देता है हिन्दुस्तान हमारा।। वैसे भी नादान को सही रास्ते पर लाना हम जानते है... »

अभिलाषा

मैं कब कहता हूँ फूलों की सेज मिले, मुझे तो कमल जैसी सुदृढ मन मिले l जो खिलता तो कीचड़ में है, पर दाग नहीं लगने देता दामन में l कब कहता हूँ पीड़ा रहित जीवन मिले, मुझे तो गुलाब जैसी जज़्बा मिले l जो कांटों में भी मुस्कुराते रहें, फिर भी प्यार का प्रतीक कहलाए ll मैं कब कहता हूँ कि दूसरों की सेवा मिले, मुझे तो रजनीगंधा जैसी सेवा भाव मिले l जो डाली से टूटकर कहीं और सज जाए, फिर भी खुशबू फैलाती जाए l Raj... »

बुलंदों की हुड़दंग

जब देश में रंगा बसंती चोला था। तब अंग्रेजी शासन भी डोला था।। महासंग्राम की जब आई घड़ी। सभी के दिलो में तब, शोला ही शोला था।। हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई, सभी एक साथ। चीख चीख कर, आज़ादी आज़ादी बोला था।। कहीं भाइयों की कुर्बानी, तो कहीं बेटों की कुर्बानी। उस समय भी माँ की हाथो में, आज़ादी का झोला था।। सुन ले ए दुश्मन, ईंट के जवाब हम पत्थर से देंगे । सभी हिन्दुस्तानी, छाती ठोक ठोक कर बोला था।। नहले पे दहल... »

तिरंगा

हमारा आन तिरंगा है, हमारा बान तिरंगा है। हमारा शान तिरंगा है, हमारा जान तिरंगा है।। हमारा धर्म तिरंगा है, हमारा कर्म तिरंगा है। हमारा सोच तिरंगा है, हमारा समझ तिरंगा है।। हमारा औकात तिरंगा है, हमारा बल तिरंगा है। इसलिए तो आज भारत में तिरंगा ही तिरंगा है।। »

संगत

आये टोली ले मक्खन खिलाने को आये कान्हा ले अपने संग संगत को देखि मोहे कान्हा को छोड़ चलन छिप गये परदे के पीछे आज पकड़ में आया कान्हा मक्खन गिराये कान्हा भूमि पर »

प्यारी पीहू का जन्मदिन

प्यारी सी एक परी, जिसका जादू हर ओर चला है। मेरे भईया-भाभी का घर, जिसने खुशियों से भरा है। मुस्कान जिसकी, दुनियां से न्यारी है। सुरत भी देखो, कितनी प्यारी है। दादी-बाबा, मम्मी-पापा और हम सबकी लाडली। गुड़िया सी वो प्यारी पीहू, इतराती है बर्थडे गर्ल बनी। जन्मदिन पर उसके, ढेर सारा प्यार मिलें। आने वाले जीवन में, खुशियां अपरंपार मिलें। »

यशोदा प्यारे कृष्ण

यशोदा प्यारे कृष्ण कहें यशोदा मैया कान पकड़ कान्हा से तंग हुई मैं लल्ला अब तेरे शरारत से सुनो लल्ला माखन चोरी की आदत छोड़ो मेरे प्यारे कृष्ण मुरारी मटकी ना फोड़ों छूप-छूप कर तुने सारे माखन हैं खाये दही माखन को तुने घर में है गिराये मेरे लल्ला अब सारी मस्ती तो छोड़ो मेरे प्यारे कृष्ण मुरारी मटकी ना फोड़ों बहुत किया है तंग मुझे माखन गिराकर भोली भाली सूरत बना इठलाकर सुनो लल्ला मथनी रस्सी अब ना तोड़ो ... »

बचपन

बचपन की एक प्यारी छवि, जो आज तुम्हें मैं बतलाता हूं। मन कल्पना के दर्पण में, उसे देख मैं सुख पाता हूं। गांव की वह प्यारी गलियां, जिसमें बचपन का नटखटपन है। खट्टे मीठे ताने बाने है, मित्रों के वह अफसाने हैं। क्या बचपन है क्या मंजर है, जिसमें हमको ना कोई गम है। नादानी नटखटपन और पवित्रता ना ईश से कम है। वह गलियों की दादी नानी, वह अनुशासन की प्रतिछाया, उनसे कौन करे मनमानी। पर साथ ही प्रेम की मूरत, और व... »

ओ मैया! मोरी

ओ मैया! मोरी पीर बड़ी दुखदायी सब कहें मोहे नटवर-नागर माखनचोर कन्हाई। तेरो लाला बरबस नटखट कब लघि बात छपाई। ओ मैया! तेरो कान्हा माखन बिखराई। सो खावत सो माखन-मिसरी ग्वालन खूब खिलायी। फोड़ दई मोरी मटकी- हांड़ी गऊवन देत ढिलाई। पनघट पे नित बंशी बजावत मोरी सुधि-बुधि सब बिसराई। राह चलत नित छेड़त नटखट छोड़े ना मोरि कलाई। सुनि गोपिन के वचन कन्हैया मन्द-मन्द मुसकायी। ना मोसे फूटी मटकी-हांड़ी नाहि गउवन दियो ढिलाई। ... »

माखनचोर ।

तू है माखनचोर। कान्हा तुम आ जाते छुपके खा जाते हो माखन चुपके, तड़के आँगन सखियाँ करतीं शोर तू है माखनचोर। दही मगन खा मटकी तोड़ी करते नहीं शरारत थोड़ी, गाँव में अब चर्चा है हर ओर तू है माखनचोर। माखन नहीं अकेले खाते बाल सखा सब लेकर आते, शाम कभी तो आ जाते हो भोर तू है माखनचोर। माँ, माखन से मैं अनजाना व्यर्थ गोपियाँ मारें ताना, उनका तो बस मुझपर चलता जोर मैं नहीं माखनचोर। अनिल मिश्र प्रहरी। »

आज पकड़ में आयो कान्हा

आयो कान्हा देखि मोहे तोरे संगी साथी कुछ भाग चलत, कुछ ले परदे कि आड़ छुप खम्ब कि ओट देखत मोहे कि आज मेरो पकड़ में आयो कान्हा जब यह आया चुपके से माखन खाने को आज पकड़ में आयो कान्हा »

नटखट, ओ लल्ला मोरे

नटखट, ओ लल्ला मोरे तू काहें मोहे खिझायों। संग सखा तू पुनि-पुनि मटकी पर नज़र लगायो।। सब ग्वालन से मिलकर झटपट माखन खायो। नटखट ओ लल्ला मोरे तू काहें मोहे खिझायों।। मैया, ओ प्यारी मैया मैं मन को न रोक पायो। मटकी में माखन देख जी ललचाओ।। तू तो जानत हैं मोहे माखन बहुत सुहायो। नटखट कान्हा मोरे, तिन्ही सकल हृदय में बस जायो। तोरी मधुर बोली मोरे कानों को अति सुहायो।। मनमोहक रूप को देख मोरे नयन तोहे निहारत जाय... »

माखन चोर 🙏

छूप छूप के खाये माखन है ये माखन चोर बड़ा नटखट है प्यारा नंद किशोर घुसे घर में मित्रो के संग देखी माखन की मटकी देखा खूब सारा माखन सबकी नज़र उसी पे अटकी खाये माखन मस्ती में मित्रो के साथ देखा आ रही माँ यशोदा भागे सब इधर उधर बच गए सब बस माखन चोर का पकड़ लिया हाथ पकड़ के कान्हा के कान को दिया कस बह रहा कटोरी से माखन का रस बोले क्यों नहीं समझता तू बहुत बदमाशी करली अब बस छलका के आंसू दिखाई भगवन ने लीला देख ... »

कुछ नया करते

चलो कुछ नया करते हैं, लहरों के अनुकूल सभी तैरते, चलो हम लहरों के प्रतिकूल तैरते हैं , लहरों में आशियाना बनाते हैं, किसी की डूबती नैया पार लगाते हैं l चलो कुछ नया करते हैं, दुश्मनों की आँखों का सूरमा नहीं, आँखे निकाल लाते हैं, चलो दुश्मनों से  दुश्मनी निभाते, दोस्तों पे कुर्बान हो जाते हैं l चलो कुछ नया करते हैं, दूसरों का श्रेय लेना बंद करते हैं, पीठ – पीछे  तारीफ करते हैं, चलो साजिश करना बं... »

संजना

सावन में ए सखी, खनके क्यों कँगना। कोयलिया गीत सुनाए ,क्यों मेरे घर अँगना।। बार बार दिल धड़काए, प्यास जगाए। जाने क्या करेगी, मेरी नादान ए कँगना।। जब सुनती हूँ, “ए शोभा पियु कहाँ ” की मीठी स्वर। तब न पूछ सखी , घायल हो जाती है ए संजना।। »

गरीबी

गरीबी एक एहसास है, इसमें एक मीठी सी दर्द है, रोज़ की दर्द में भी संतोष छिपी है, फकीरी में अमीरी का एहसास है, शायद यही गरीबी है l मुर्गे की बांग  से सुबह जग जाना, नई उलझनों में फंस जाना, उलझनों को सुलझाने की कोशिश करना, पक्षी की चहक के साथ घर वापिस आना, शायद यही गरीबी की पहचान है l गरीबी में न टूटना, जरूरतों मे भी न झुकना, ज़रूरतों को कर्म से पूरी करना, विफलताओं में ईश्वर को कोसना, शायद यही गरीबी र... »

माखन

कविता- माखन ———————— नटखट लाला नयनो के तारा, छोड़ दे तू सब काम निराला| मैं सह लूंगी बात तुम्हारी, आए शिकायत रोज तुम्हारी| सुन सुन के मै हार गयी हू, गगरी फोरा सब की सारी, घर का ही तो माखन चुराए, बाल सखा संग माखन खाए| खा ले बेटा दुख नहीं मुझको, दुख तो मुझको माखन गिराए| डांट में तेरे प्यार छिपा है, माखन से मीठा हाथ तेरा है| कानों को तूने जब-जब पकड़ा, मा... »

मनमोहन

जब भी मनमोहन, श्याम सलोना, बंशीधर मुरली बजाने लगा, ह्रदय तल के धरातल पे वो प्रेम की ज्योति जलाने लगा, कभी गैयों और ग्वालों का प्यारा कन्हिया गोपियों संग रास रचाने लगा, कभी माँ जसोदा का छोटा सा लल्ला फोड़ मटकी से माखन खाने लगा, कभी बन्धन में जो बंधा ही नहीं वो ओखल में बन्ध कर मुस्काने लगा, कभी गोपियों संग श्री राधे के प्रेम में वो प्रेम से प्रेम निभाने लगा॥ राही (अंजाना) »

मैं निर्दोष हूँ मैया

मैया यशोदा से लिपट के, हँस के बोले नंदलाला। माखन कहाँ खाया है, तेरा सबसे दुलारा नंदलाला ।। दोष लगाना कान खिंचवाना, यही सभी को भाता है। बाल सखा से पूछ ले मैया, कहाँ था तेरा नंदगोपाला।। मैया – सारा दिन भाग रहा था मैं, गैया के पीछे पीछे। फिर कैसे दोष दे रही है, ब्रज के समस्त ब्रजवाला ।। झूठ के खेती करने आ पहुँचे है, समस्त ब्रजवासी। कहना मान ले मैया, सच कहता है तेरा कन्हैया लल्ला।। »

पकड़ मत कान री मैया

पकड़ मत कान री मैया कसम कुण्डल की खाऊँ मैं। शिकायत कर रही झूठी कहानी सच की बताऊँ मैं ।। करूँ क्यों मैं भला चोरी घर में हैं बहुत माखन। नचाती नाच छछिया पे चखूँ मैं स्वाद को माखन।। चूमकर गाल को मेरे करती लाल सब ग्वालन। छुपाने को इसी खातिर लगाती मूँह पे माखन।। सताई सब मुझे कितना तुझे कैसे बताऊँ मैं? पकड़ मत कान री मैया कसम कुण्डल की खाऊँ मैं।। शिकायत कर रही झूठी कहानी सच की बताऊँ मैं।। चराए शौख से कन्... »

माखन चोरी मत करना

कान्हा देख आगे से ऐसे माखन चोरी मत करना बता दे रही हूँ कह दूंगी मैया से फिर मत कहना। »

चितचोर

मोहक छवि है कैसी, मनभावन कान्हा चितचोर की। माखनचोरी की लीला करते ब्रिज के माखनचोर की।। वसुदेव के सुत, जो वासुदेव कहाते थे नन्द बाबा के घर में नित दृश्य नया दिखाते थे यशोदानन्दन नामथा जिनका मुख में ब्रह्माण्ड दिखातेथे बात- बात में जो गिरिवर को कनिष्ठा पर उठाते थे अपने सदन में छोङ,घर-घर माखन छिप कर खाते थे यह दृश्य है ग्वालबाल की टोली के सरदार की। मोहक—- माँ जशोदा थी बाबा नन्द की पटरानी नौ लाख... »

माखन नहीं चुरायों है!

भ्रम हुआ है तुमको, मैया ! भोला तेरा कृष्ण कन्हैया, माखन नहीं चुरायों है। लांछन लगाएं ब्रजबाला, ग्वालिन बड़ी ही सयानी चपला, मुझको बहुत नचायों हैं, ना नाचूं तो चोर बताएं! और मुख पर माखन बहुत लगाए। अगर नाचू तो; खुद ही खिलाएं ! मगर कमरिया नाजुक-सी मोरी , किस-किस का दिल बहलाए रे ! बहुत सताती हाए!वो मैया! भोला तेरा कृष्ण कन्हैया माखन नहीं चुरायों हैं। मैया तू मुझसे क्यो रूठी, बात बताओ! सच्ची है या झूठी?... »

माखन चोरी करते गिरधर,

ब्रज की एक सखी के घर माखन चोरी करते गिरधर, पकड़ लिए हैं रंगे हाथ फिर भी करते हैं मधुर बात। बोली ग्वालिन यूँ कान खींच मन ही मन में रस प्रेम सींच, बोलो क्यों करते हो चोरी, किस कारण से मटकी फोरी। सारा माखन गिरा दिया मन-माखन मेरा चुरा लिया, मात यशोदा है भोरी, फिर तुझे सिखाई क्यों चोरी। जाकर कहती हूँ अभी उन्हें यह लल्ला करता है चोरी, होगी खूब पिटाई तब जायेगी दूर ढिठाई तब। ना ना ऐसा मत कर गोरी जो कहे करू... »

मैं नहीं माखन खाया

कहे नटवर मैया से, मैं कब माखन खाया। झूठ के गगरी, समस्त ब्रजवासी है लाया।। मैं तो था ,अपने भैया बलराम के संग। अब आप ही बताए, मै कैसे माखन खाया।। »

माखन खाते पकड़े गए कन्हाई

यशोदा पूछ रही कान्हा से, “लल्ला, मटकी से रोज़ – रोज़ माखन कौन चुराता है”। लाड लड़ा के बोले कान्हा, डाल के गलबैयां मां के, ” मैं क्या जानूं , मैं हूं नन्हा बालक ,तू मेरी प्यारी माता है”। मां बोली,” रहने दे कान्हा, हर दिन तेरा ही उलाहना आता है” बलराम से पूछूंगी मैं, वो जो तेरा भ्राता है। “ना मैया ना, बलराम तो झूठा है, वो कितना मुझे सताता है” ये स... »

कोरोना को हराना है

आजकल का यह जमाना है, सबको बेवकूफ बनाना है। समझदारी की कोई कदर नहीं, बस शानो-शौकत दिखाना है। नियमों को कोई यहां तोड़े, नियमों को कोई वहां तोड़े, बस एक दूसरे पे इल्जाम लगाना है। बेवकूफी कर जो ना मास्क लगाए, कोरोना को अपने घर बुलाए। मैं हूं एक शिक्षिका, यह संदेश सब तक पहुंचाना है l मेरे संग है मेरे विद्यार्थी, इस महामारी से लड़ कर दिखाना है, अब न किसी को सताना है, बेवकूफी छोड़ कोरोना को हराना है। »

साँवला सलोना

साँवला सलोना चला, माखन चुराने को। मैया ने देख लिया, रंगे हाथ गिरधारी को। कान पकड़ के मैया, कहती हैं नंद से। क्यों चुराए है तू?, माखन यूँ मटकी से। इतने में बोलते हैं, कन्हैया यूँ मैया से.. मैंने न चुराया माखन, पूछ लो तुम ग्वालों से। मैया कहती हैं मैंने, तुझको ही देखा है। माखन की मटकी से, माखन चुराते हुए। बोल कन्हैया मेरा, क्यों तू ये करता है? क्या मैं न देती तुझे?, जी भर खाने के लिए। छुप – छुप... »

मां

मां मैं तुमसे कुछ आज कहूँ। जग से प्यारी तुम मेरी मइया, नंदबाबा का मै अनमोल कन्हैया, फिर क्यू दाऊ है मुझे चिढाए , मैं काला मां तू क्यू गोरी, नंद मुझे क्या मोल के लाए, माँ मुझे यही कह भइया चिढाए, कहो मइया मैं नंद गोपाल, हूँ तेरी आंखो का मै दीपक, कान पकड़ मैं बोल रहा हूँ, खीझ कराऊ ना मइया तुझको, अब तेरी बातों का मान करूँ, ना खाऊं माखन चोरी करके, ना चटकाऊ अब गोपियों की मटकी, फिर भी मां ये जब मुझे सताए... »

ज्ञान का पहला मार्ग

अज्ञानता ही ज्ञान का पहला मार्ग है l अज्ञानता से हीन भाव रखना, अपने आप में मूर्खता है l अल्प ज्ञान भी ज्ञान  है, जब तक अहम का वास नहीं है l महाज्ञानी भी अज्ञानी है, जब शब्दों में अहम झलकता है l ज्ञान में जब अहम का प्रभाव हो, तो वह अज्ञानी ही कहलाता है l अज्ञानी अहम खोकर ज्ञानी बनता,अज्ञान तप कर ज्ञान बनता l शब्दों में समाहित उद्देश्य, ज्ञानी को परिभाषित करता l घिसी-पिटी ज्ञान भी ज्ञान होता है,ज्ञा... »

श्यामल रूप है

श्यामल रूप है,नंद को लाल है। मोर मुकुट संग, पायल झंकायो है। नटखट अठखेलियों से, गोपियाँ रिझायो है। माखन खायो है, रास रचायो है। यमुना नदी किनारे, बंसी बजायो है। मटकियाँ फोड़त है, गौये चरायो है। घर – घर जाए के, माखन चुरायो है। मैया के डाँटन पर, झूठ खूब बोलयो है। मीठी – मीठी बातों में, सबको फँसायो है। मिट्टी जब खाये तो, ब्रह्मांड दिखायो है। पालना में झूलकर, राक्षस भगायो है। मैया के बाँधन पर... »

आदत से लाचार मेरा कान्हां

चुरा के माखन खाए नटवर नागर नंदा। कान पकड़ के खींचीआज मैया यशोदा ।। माखन चोर है, मैया यशोदा के नंद लाला। तभी तो शिकायत कर गयी समस्त ब्रजबाला ।। घर 🏡 घर में मटकी तोड़ना माखन खाना। पकड़े जाने पर सुंदर सुंदर बहाना बनाना।। परेशान हो कर जब पीटने दौड़ती यशोदा मैया। फूट फूट कर रो पड़ते ब्रज के छोटे छोटे गैया।। चुरा कर माखन ए मैया अब कभी न खाऊंगा। अपनी माँ के मन को अब न ठेस पहुंचाऊंगा।। यही सुन के लगा लेती... »

माखनचोर

मात हमारी यशोदा प्यारी,सुनले मोहे कहे गिरिधारी नहीं माखन मैनु निरखत है,झूठ कहत हैं ग्वालननारी। मैं तेरो भोला लला हूँ माता,मुझे कहाँ चुरवन है आत बस वही मै सब खाता, तेरे हाथों का माखन है भाता ठुनक ठुनक कहते असुरारी,झूठ कहत हैं ग्वालननारी।। ये जो ग्वालन हैं,बङी चतुरन हैं,बरबस ही पाछे पङत हैं ना जाने क्यू मोहे बैरन हैं,झूठ-मूठ तोसे चुगली करत हैं मैं तो सीधा-सा हूँ बनवारी, झूठ कहत हैं ग्वालननारी ।। मैय... »

कान्हा फ़िर से तूने माखन खाया ……

ओ कान्हा तूने फ़िर से माखन खाया , तोड़ दी हांडी , सारा माखन भी गिराया….. क्यों करता है तू , इतनी कुबद रे क्यों करता है तू , इतनी कुबद रे…. थक जाती हूं मैं , बोल कैसे तू सुधरे…… मित्र भी तेरे सारे साथ ही आते पकड़ में तू आता और वो भाग जाते कैसे मैं मारूँ तुझको या कैसे समझायूँ… तू ही लाल मेरा , तुझ पर सारा प्यार मैं लुटाऊँ….. मान जा रे लल्ला मेरे , अपनी माँ की तू अर्ज... »

माखन चोर

माखन चोर माखन चोर। ब्रज में मचा है यही शोर ।। सब से नजरे बचा के देखो। कैसे भागे माखन चोर।। कहीं मटकी फूटी , कहीं माखन बिखरे । पकड़ो पकड़ो दौड़ो दौड़ो, व्रज में आया कैसा चोर।। कान पकड़ के मैया बोली, कहाँ गया था, रात से हो गई भोर।। »

अपने देश में (INDEPENDENCE DAY)

हम उस देश के प्रहरी है जिस देश में तिरंगा लहराता है। बुलंदी वाले छत्रपति शिवाजी के चर्चे शत्रु भी करता है।। पंजाबी गुजराती मराठी गोरखा मद्रासी और मुसलमान। सभी देश पे आज भी अपनी जान न्योछावर करता है।। रणनीति के डगर पे ए वीर दिखाओ अब शान से चल के। हिम गंगे के मिलन आज भी देश का इतिहास बताता है।। सुभाष भगत आज़ाद और सावरकर के इस गुलिस्ताँ में। आज भी तिरंगा अपनी सुंदरता बड़ी शान से बिखेरता है। »

समय रूपी डोर

समय पतंग की डोर जैसी l मांजा बड़ी तेज है l किसकी पतंग काट जाए विश्वास नहीं l कभी राजा संग कभी रंक संग l पल में तेरा पल में मेरा हो जाए l कब खुशियों की पतंग कट जाए l कभी दर्द उड़ा ले जाए l छोटो की क्या औकात l मांजा ऎसी बड़ो- बड़ो को मात दे जाए l हरिशचंद्र को सड़क पे लाया l वाल्मीकि के हाथों रामायण रचाया l इस डोर का क्या कहना l मुझे इसी डोर से है, अपनी पतंग उड़ना l इसी डोर से है, अपनी पतंग उड़ना ll ... »

   पहचान

महानता व्यक्तित्व मे नहीं, शब्दों में होती है l पहचान लिवास से नहीं, आत्मा से होती है l बल शारीरिक शक्ति में नहीं, आत्म बल में होती है l वीरता प्रवंचना से जीती विजय में नहीं, युद्ध नीति के पालन में होती है l श्रेष्ठता किसी को झुकाने में नहीं है, बल्कि झुके को अँकवार में होती है l मर्दानगी नारी की बर्बरता में नहीं, बल्कि नारी की सम्मान में होती है वीरता असहायों को कुचलने में नहीं, बल्कि साथ खड़े हो... »

ग़लतफ़हमी

चरखे से अगर आजादी मिलता, हमें सेना की जरूरत न होता l चरखे से हिंदुस्तान चलता, हिन्द मे कोई विशेष ना होता l न हिंदू मुसलमान होता, सभी हिंदुस्तानी पूत कहलाता l न करगिल, न चीन से युद्ध होता, सही मायने मे भाई – भाई कहलाता l विश्व क्रम में पहला स्थान होता, चारो तरफ नमो: नमो:होता l वीरों की शहादत न होता, न जालियावाला कांड होता l चरखे ने साजिस रचा, हिन्द को बेवकूफ़ बनाया l पर अब ना चल पाएगा, निस्वा... »

…… भारत का (Independence Day)

गुलामी को आज़ादी में बदल दिया, हम वो शख्स है अपने भारत का। हर दिन लहू से सिंचे है देश को, इसलिए कहलाता हूँ सपूत भारत का।। गैरो ने लगाई थी पुरी ताक़त, फिर भी बाल न बांका कर सका। राहों में भी बिछाए काँटे ही काँटे, काँटे को ही फूल समझ कर चल पड़े , किया नाम रौशन अपने भारत का।। भ्रष्टाचारों के भी क्या तेवर थे, थर्रा उठी इन्सानियत था राज हैवानो के। फिर भी हम न घबड़ाए न रुके , क्योंकि लाज बचाना था अपने भ... »

मेरा नमन

हे वीर, नमन मेरा तुझको l वीर पुत्र , सूरवीर हो l l         आप ही प्रहरी , प्रलय भी आप हो l         अश्व जैसी तेज, सिंह की दहाड़ हो ll शांत प्रिय, रुद्र रूप  हो l जल – थल ,नभ में भी आप हो ll         आप रंग , बेरंग भी हो l         सीमा रेखा ,शत्रु की जीवन रेखा आप हो ll आप हो तो संभव , न हो तो असम्भव हो l आप ही शहीद  , आप ही अमर हो ll          जीवन रक्षक , शत्रु भक्षक भी आप हो l          कठोर आ... »

मैं (अहंकार)

मैं मन की भाव हूँ, अहंकार से लिप्त हूँ l मैं लोभ , मैं मोह माया का जाल हूँ l मैं हिंसा का रूप, मैं विनाशकारी हूँ l मैं यूं ही बदनाम हूँ, वरना मैं विश्वकर्मा हूँ ll मैं अनंत हूँ , विष भी मैं हूँ l मैं चक्रव्यूह, मैं महाभारत हूँ l मैं कौरव नाशक, रावण, मैं ही कंश हूं l मैं तो यूँ ही बदनाम हूँ, वरना श्रीकृष्ण, जटाधारी हूँ ll मैं निराकार हूँ, काली, दुर्गा भी मैं हूँ l मैं वहुरूप्या हूँ, किसी को भी हर ल... »

दहाड़

ज्यों पले इक मां की गोद में, नन्ही सी जान। त्यों पले तू भारत की गोद में, पाकिस्तान। समुद्र है हिंदुस्तान मेरा, लहरें हैं विशाल। एक लहर भी क्रोधित हो तो, तू हो जाए बेहाल। तिनके को भी तरसेगा, भूख से होकर व्याकुल। दर दर तू भटकेगा , प्यास से होकर पागल। ले छीन लिया वो हक हमने, जो तुझे देके गलती की थी। इस बूंद बूंद पानी की कीमत तूने ना पहचानी, अब भूखा प्यासा फिरेगा तू, हम हैं जिद्दी हिन्दुस्तानी। बहुत ह... »

चल पड़े हैं वीर देखो शरहद की ओर

लेके काँधे पे बन्दूक दिल में देशप्रेम अटूट चल पड़े हैं वीर देखो शरहद की ओर। न हीं जीवन की मोह न हीं परिजन बिछोह देश के खातिर दिया सब कुछ है छोड़। चल पड़े हैं वीर देखो शरहद की ओर।। ये हमारे वीर सिपाही लड़ने में न करे कोताही जलती धरती अंबर बरसे घनघोर। चल पड़े हैं वीर देखो शरहद की ओर।। नहीं किसी से वैर है न अपना कोई गैर है भारत माँ की रक्षा में है न कोई थोड़। चल पड़े हैं वीर देखो शरहद की ओर।। विस्तार... »

Page 1 of 41234