Poetry on Picture Contest

बहकावों में छले गए..

कुछ दावों में, वादों में, कुछ बहकावों में छले गए, भोले-भाले कुछ किसान झूठे भावों में चले गए.. खेतों में पगडण्डी की जो राह बनाया करते थे, आज भटक कर वो खुद ही ऐसे राहों में चले गए.. वो ऐसे छोड़ के आ बैठे अपने खेतों की मिट्टी को, सागर को छोड़ सफीने भी बंदरगाहों में चले गए.. थककर किसान ने जीवनभर जिस रोटी को था उपजाया, वो रोटी छोड़के कैसे अब झूठे शाहों में चले गए.. अब तो किसान भी नज़रो में दोतरफा होकर रहते... »

नहीं है ,अब हम मजबूर

किसान है,भारत की शान है खेत – खलियान की है,जान मेहनत में है ,उनकी अलग पहचान देश को विकसित बनाने में है उनका सबसे बड़ा योगदान देश की अभिमान भारत की है,अलग पहचान किसान है ,भारत की वीर पहचान। धन्यवाद – काजल साह – स्वरचित »

किसान आंदोलन

जिस बंदे ने तुम्हारी परोसी थाली है, पर मजबूरन आज उसी की थाली खाली है। और समझो धूप बरसात गर्मी -ठण्डी उन दताओ की वरना राजनीति के चेहरे पर कालिख है। कल जो बादल वर्षा करते रहते थे कल तक जो तुमको थाली परसा करते थे वो आज गरज-बरस कर राजनीति पर आये है समझो तुम राजनेताओं तुम पर काले साये है। »

Kisan aandolan

उसके खून से धरती माँ की चुनर लाल है, उस अन्नदाता से ही माँ के लाल लाल है। देखो आज माँ के कुछ लालो ने क्या हाल किया, कुछ लोगो से ही मेरा अन्नदाता आज बेहाल है। »

“किसान आन्दोलन”

जो बादल सदैव ही निर्मल वर्षा करते थे निज तपकर अग्नि में तुमको ठण्डक देते थे वह आज गरजकर तुम्हें जगाने आये हैं ओ राजनीति के काले चेहरों ! ध्यान धरो, हम ‘हल की ताकत’ तुम्हें दिखाने आये हैं… ——————————— धरती का सीना चीरकर जो उत्पन्न किया वह सफेदपोशों ने अपनी तिजोरियों में बंद किया हम वह ‘मेहनत का दाना’ उनस... »

मैं किसान हूं|

मैं किसान हूं , हां मैं किसान हूं | धरती मां की मैं ही आन बान शान हूं| मैं किसान हूं|| धरती मां को चीर के तुम्हें खिलाया है, अपना पसीना पौछकर तुम्हें जिलाया है, अपनी नींदें भूलकर तुम्हें सुलाया है, तुमने मुझको आज क्यों इतना रुलाया है, यह मत भूलो मैं करता ,अन्न दान हूं मैं किसान हूं , हां मैं किसान हूं| मैं किसान हूं|| मैं सड़कों पर आज हुआ क्यों, इतना मैं मजबूर हुआ क्यों, मुझको तुमने छोड़ दिया क्यो... »

अन्नदाता

मैं किसान हूं समझता हूं मैं अन्न की कीमत क्योंकि वो मैं ही हूं जो सींचता हूं फसल को अपने खून और पसीने से मरता हूं हर रोज अपने खेत की फ़सल को जिंदा रखने के लिये ताकि रहे न कोई भूखा कोई इस दुनिया में फिर भी तरसता हूं खुद ही रोटी के इक निवाले को ले जाता है कोई सेठ मेरी पूरी फ़सल को ब्याज के बहाने, कोढ़ियों के दाम लड़ता हूं अकेला आकर शहर की सड़्कों पर फिर भी नहीं हो तुम साथ मेरे अपने अन्नदाता के! »

हलधर धरने पर

हलधर धरने पर रहा, आस लगाये बैठ। मानेगी सरकार कब, सोच रहा है बैठ। सोच रहा है बैठ, मांग पूरी होगी कब। अकड़ ठंड से गया, ताप सब छीन गया अब। कहे लेखनी आज, व्यथित है कृषक भाई, कुछ तो मानो मांग, दिखाओ मत निठुराई। ************************** ठीक नहीं थी बात वह, लालकिले में पैठ। आंदोलन धीमा पड़ा, सोच रहा है बैठ। सोच रहा है बैठ, सभी नाराज हो गये। जो अपने थे वही, पराये आज हो गये। कहे लेखनी सोच, समझकर कदम उठाओ। ... »

मैं अन्नदाता

मैं अन्नदाता देख अपनी थाली में खाना रूखा सूखा, हो उदास सोचे किसान फ़िर एक बार, हूँ किसान कहलाता मैं जग में अन्नदाता, रहता साथ अन्न के, मिले मुझे ये मुश्किलों से, मेहनत मेरी रोटी बन भूख मिटाती जग की, न देख सके वो सुबह सुहावनी सब सी, पसीना मेरा शर्माए गर्मी जेठ बैसाख की, बैलों संग मेरे हल के धरा मेरी निखरती, बीज लिए आशाएं धरा के मैं बोता, आशाएं अब मेरी देखें बादल वो चंचल, आता सावन घुमड़ घुमड़ लाये मुस्... »

भारत वर्ष मेरा देश

तुमने कहा की मुसलमान गलत है हमने मान लिया तुमने कहा लॉकडाउन मे घर वापसी कर रहे मज़दूर गलत है कोरोना संक्रमण का कारण है हमने मान लिया तुमने कहा किसान आतंकवादी है ख़ालिस्तानी हमने मान लिया तुमने कहा देश नहीं बिकने देंगे रेल और हवाई अड्डे बेच दिए पीसउ बेच दिए हमने कहा चौकीदार ने कहा है अच्छा ही होगा तुमने सब अच्छा किया सबसे दूर किया पर भाई एक बार तोह चस्मा उतारो देश मे अब कौन है जिसके खिलाफ हमें करोगे ... »

Mera bharat

जो हल जोते, फसल उगाए उसे उसकी कीमत नहीं मिलती। जो मजदुर उत्पाद बनाए उसे उसकी कीमत नहीं मिलती। भूख और लाचारी का ऐसा आलम है अब जान सस्ती है रोटी नहीं। जात और धर्म का ऐसा टॉनिक खिलाया जाता है कि किसी बच्ची या व्यक्ति की मौत में धर्म नज़र आता है। महात्मा को मारने वाले की पूजा करने वाले उन्हीं के नाम पर डींगे हाँकते है। देश में बेरोज़गार बढ़ रहे हैं पर नेताओं के आम खाने के तरीके सुर्खियां बटोरते हैं। व्य... »

थकान

●थकान  ̄ ̄ ̄ ̄ किसान के पास फ़सल की बोरियां भरते वक्त बोरियां भर थकान भी होती है…. लेकिन वह नहीं भरता थकान की बोरियां…. क्योंकि- वह जानता है थकान खरीद सके उतना दम नहीं फ़सल खरीदने वालों में…! (रमेश धोरावत) ••••••••••••••• »

ये तो वही किसान है

चिड़ियों के चहचहाने से पहले, बैलो के रंभाने से पहले जो जाग जाता है, ये तो वही मेहनत का पुजारी किसान है| अन्न को उपजाने में जिसकी दिन-रात बहती लहू और जिसकी लगती जान है, ये तो वही किसान है | अन्नदाता ही अन्न को आज मोहताज है, जिसके भरोसे कितनों के चुल्हों में आग सुलगते है, और जिसके कारण आज दंभ भरते बड़े साहूकार है , ये तो वही मेहनतकस किसान हैं| कर्ज,तकलीफ और बेरोजगारी ही आज किसान की किस्मत बनी है, घु... »

Kisan ka samman khalistani beiman

तुम खालिस्तानी हो या पाकिस्तानी उतारा सेना को तो पड़ जाएगी भारी सब्र ठहरा है इम्तिहान मत लेना खून बहे तो फिर किसान आंदोलन मत कहना पुलिस की जान को क्या तुमने समान समझा है तलवार से खेल रहे हो क्या इकलौता औजार समझा है उठानी अगर बंदूक पड़ गयी तो हमने भी जमीं नहीं शमशान समझा है किसानों को नमन करो खालिस्तानी का दमन करो »

किसान

खेतों के सब बीज शज़र हो जाते हैं सरहद पर वीर अमर हो जाते हैं तुम वर्दी पहने मिट्टी साने क्या बतलाते हो हम भी इनके जैसे हैं ये दिखलाते हो, सीखो जरा लाल अटल और बल्लभ से क्या होते हैं वीर-किसान देश नगर के अब उनको तुम गोली मारो या फासी लगवा दो कर्ज़ से इक़ है मरने वाला एक तुम्हारी यारी से, ये भारी है सर्द रात मगर इस दिल्ली की तान खड़े है सम्मुख किसान-जवान कर रहै है सत्ताधारी न रहे कोई जवान किसान फिर कर रह... »

आंदोलन

भूमिपुत्र किसान भाई, तुम जिद्द अपनी छोड़ दो धरना प्रदर्शन की दिशा भी घर की तरफ मोड़ दो देश पर मण्डरा रहे ख़तरे को गम्भीरता से भांप लो तुम्हारी आड़ में मचा आतंक अब तुम पहचान लो किसान भाई कोई शक नहीं, व्यथा तुम्हारी सच्ची है आंदोलन तुम्हरा हाईजेक हुआ खबर ये भी पक्की है तुम किसान भोले भाले, दुश्मन चंट और चालाक है देश के अंदर और बाहर, हर तरफ गम्भीर हालात हैं रंगे सियार जैसे दुश्मन अंधेरा हर ओर तलाश रह... »

अन्नदाता

खेतों से निकल कर सड़को पर क्यों उतर आना पड़ा, लाल किले पर उत्तेजित हो क्यों झण्डा लहराना पड़ा।। लेकर ट्रेक्टर रैली में बढ़ चढ़के क्यों डण्डा खाना पड़ा, रस्ते पर लगा टेण्ट रातों में आखिर क्यों सो जाना पड़ा॥ अन्न उगाने वालों को आखिर भरभर के क्यों ताना पड़ा, अपनी ज़मीन को लेकर सरकारों से क्यों टकराना पड़ा। कमी कहाँ थी संसद में जो बिल किसान बनवाना पड़ा, मुश्किल हुआ जवाब नहीं तो क्यों पल्ला छुड़ाना पड़ा। राही अंजान... »

. ं. किसान

देखो देखो किसान है देश की रीड की हड्डी इनको ना तोड़ो तुम इन को मजबूत बनाओ तो देश मजबूत होगा इनको ना राजनीति की आग में मत झोंको किसान तो देश की अर्थव्यवस्था का मूल मंत्र है इनको जला दोगे देश का क्या होगा देखो देखो किसान है देश की रीढ़ की हड्डी…. आजादी आंदोलन में जैसे एकजुट हुए थे वैसे किसान आंदोलन में एकजुट हो जाओ आपस का स्वार्थ जला दो. यहां सिर्फ किसान की बात नहीं है यहां पूरे देश की बात हैं... »

मेरे हवाले कर दो…

‘रेत पर लिख दो और लहरों के हवाले कर दो, आज इस साल की सब बन्द रिसालें कर दो.. इस नए साल में बाहर न कोई ढूंढे तुम्हे, मेरे रब तुम अगर दिलों को शिवाले कर दो.. किसी भूखे के लिए ये बड़ी वसीयत है, कि उसके नाम कभी चंद निवाले कर दो.. किसी की ऊँची हैसियत से जला क्यूँ कीजे, जलो ऐसे कि हर तरफ ही उजाले कर दो.. किसी को हश्र दिखाना हो किसी आशिक का, मुझी को ताक पर रखकर के मिसालें कर दो.. तुम अपनी यादों से क... »

वही सागर का तट

वही सागर का तट बालुकामय सतह। जहाँ आनन्द मनाया कुछ इस तरह।। खाया -खेला नाचा-गया। गीले बालुका पर अंगूठा घुमाया। कुछ इस तरह।। अंकित हुआ बीस सौ बीस। कितने दुखो के भरे हैं टीश।। सागर के लहरों ने मिटा दिया वो अंकन। पर दिल में एक अधूरी यादों का है कंपन।। शायद लिखा हुआ होगा अब तक ज्यों का त्यों। चल पड़े आज फिर उसी ओर आखिर क्यों।। शायद कुछ खोजने और करने मन को हल्का। वही अधूरी यादे अंकित बीस बीस हल्का।। समझ... »

मैं, मैं न रहूँ !

खुशहाल रहे हर कोई कर सकें तुम्हारा बन्दन। महक उठे घर आँगन, हे नववर्ष! तुम्हारा अभिनन्दन।। दमक उठे जीवन जिससे वो मैं मलयज, गंधसार बनूँ ! उपवास करे जो रब का उस व्रती की मैं रफ़्तार बनूँ ! सिंचित हो जिससे मरूभूमि उस सारंग की धार बनूँ ! दिव्यांगता से त्रस्ति नर के कम्पित जिस्म की ढाल बनूँ ! मैं, मैं ना रहूँ, हारे- निराश हुए मन की, आश बनूँ ! बिगत वर्ष में में जिनका अबादान मिला कृतज्ञता ज्ञापित, उनकी मै... »

नव वर्ष आ रहा है

समय की धीर लहरें बढ़े ही जा रही हैं, खुद में बीते दिनों को समाते जा रही हैं। जा रहा यह बरस अब वक्त के इस जलधि में, आ रहा नव-बरस है आज बिंदास गति में। रेत सी जिन्दगी है, बीतता वक्त है यह, काल के इस उदधि में समाता वक्त है यह। नए पल आ रहे हैं पुराने जा रहे हैं, रेत में चिन्ह अपने घोलते जा रहे हैं। पुराना जा रहा है उसे है नम विदाई, नया जो आ रहा है आज उसकी बधाई। पा सके थे नहीं जो आप बीते बरस में, वो मिल... »

सन् 2020

सन् 2020 को विदा करते हैं, दुःखो को खुद से जुदा करते हैं। खुशियाँ का खुल के आगमन, हर इक से चलो वफ़ा करते हैं। सन् 2020…… वक्त कट गया मुश्किल था जो, इसे भूल जाने की ख़ता करते हैं। चलो बोते हैं ज़मी में नए पौधे, फिर कोशिश कर बड़ा करते हैं। सन् 2020…… साथ इक दो नहीं हजारों ले गया, प्रार्थना सब मिल दोबारा करते हैं। जाने अनजाने में हुई जो गलती, भुला सब हम गले लगा करते हैं।। *राही अं... »

उज्जवल बनाओ नया साल

अपनी त्रुटियों में करके सुधार उज्जवल बनाओ नया साल। आलस्य व नकारात्मकता को हे मानव जीवन से निकाल।। समय का न दुरपयोग कर यह पर्याप्त है रख ख्याल। स्वयं को नियंत्रित करके सहजता से जीवन संभाल।। साहस और आत्मविश्वास की अंतर्मन को तू पहना खाल। सकारातमकता को बना लेना सदैव विकट क्षणों में ढाल।। सपने सच हो तेरे अनमोल किताबों से प्रेम करना अपार। संकल्प तेरा ना विफल हो पूर्व त्रुटियों में करना सुधार।। गुरुजन श... »

नए साल ने दस्तक दी है

नए साल ने दस्तक दी है आओ इसको हग कर लें । मन तन वचन ध्यान से अपना सारा जग कर ले। बीत गया सो बीत गया कुछ सीख गए कुछ सिखा गया । कल का नहीं पता क्या हो अपनों की कुछ दूरी मिटा गया। माना कि बहुत सताया सबको कल गया साल जो बीत गया। पर हमने भी कुछ छीना उसका वह तभी तो बाजी जीत गया। धरती पर नहीं है हक केवल इंसानों का सीख दे गया ये जाने वाला साल । अपने पराए की पहचान हो गई खोखला साबित हो गया संबंधों का जाल। अद... »

“स्वर्णिम नवल वर्ष”

कालचक्र ने लिखा था एक रोज़ रेत पर उंगलियों के पोरों से, वह हस्तलेख मिट गया सागर की लहरों के थपेड़ों से… स्वागत है कर जोड़कर २०२१, खूँटी पर अब टाँग दी वैमनस्यता भरी कमीज… सागर की जलधार ने मिटा दिया एक नाम, २०२० ऐसे ही गया आया नव स्वर्ण विहान… हे नवल वर्ष ! तुम सबके जीवन में सुख का संचार करो… दीनों दुःखियों का त्रास हरो, मानवता का कल्याण करो… तुम आओ जीवन पथ पर और प्रेरण... »

अलविदा 2020 नववर्ष की चाहत में

नववर्ष आया है, झूमो, नामों सब खुशियाँ मनाओ, दहशत भरी 2020 की यादें को अब अलविदा कह जाओ | नई उमंगे, नई उम्मीदों के साथ अपना पग खुशहाली की ओर बढ़ाओ | बुरे वक्त में भी साथ निभाने का आओं अब ये कसम खाए, बुरा वक्त अब तुमको जाना होगा, खुशियाँ अब तुमको आना होगा | बुरे वक्त में हम इतना संयम दिखाई, कोरोनाकाल के सभी सहयोगी के सहादतों को तो हम भूलकर भी हम भूला ना पाएँगे | पर इस नववर्ष में उम्मीदों के किरण जगा... »

2021

उठती रहेगी इक लहर सागर से निरंतर जो समाहित कर लेगी हर पीड़ा जो दी बीते वर्ष ने हर बार होगी इक नईं हिलोर जो देगी हौंसला सतत् नवीन जीवन जीने की नववर्ष में। »

2020—–21

आती जाती हैं ये लहरें, सिर्फ निशां छोड़ जाती है रेत के ऊपर हर पल नयी, कहानी ये लिख जाती है टकराकर किनारों से, हर पल नया उठना होगा बीस बीस के बाद इक्कीस की, इबारत गढ़ना होगा याद रखों इसी सागर में, अमृत विष के प्याले हैं याद रखों इसी सागर में, छुपे सुनामी छाले हैं दिखता शांत किन्तु हृदय में, भाटे ज्वार से पाले है अपने सीने में राज इसने, दफन अनेक कर डाले है ठीक बीस भी सागर की इन शांत लहरों सा दिखता थ... »

“नववर्ष हो इतना सबल”

नववर्ष हो इतना सबल ना पीर चारों ओर हो, जिधर भी उठे नजर सर्वत्र पुष्प ही पुष्प हो.. यह लेखनी अविराम हो, हर पंक्ति में ऐसे भाव हों… जाग जाए यह जमीं और आसमां झुक जाए, लेखनी हो तरुण-सी ऐसा नववर्ष आए… कोरोना की ना मार हो, फूला-फला संसार हो… दुर्गम हो, चाहे दुर्लभ हो, हर पथ मानव को सलभ हो… युवा हो कर्मठ और हाथ में उनके पतवार हो, ना डूबे कभी बहती रहे ऐसी सुंदर नाव हो… २०२० त... »

गीली रेत पर…..

थमी हुई जिंदगी थमे हुए पल रुकती, चुकती सांसें उंगलियों की पोरों से छूटते रिश्तों के रेशमी धागे ठंडी, बेजान दीवारों से टकराते जीने, मरने, हंसने और रोने के पल कितना कुछ लिख गया गुज़रता साल गीली रेत पर कोई तो मौज हो मिटा जाए इस अनचाही तहरीर के निशान छू जाए आते साल का पहला क़दम कि ज़िंदगी बेख़ौफ फिसल आए बेजान दीवारों से फिर लिख जाए अपना नाम गीली रेत पर डॉ. अनू ३१.१२.२०२० »

शुभ हो, मुबारक हो नया साल आपको

ऐलान नया हो कोई, उद्घोष नया हो जज्बे भी नये हों और जोश नया हो हों राग नये से सभी , तान हो नई हौसले बुलंद हों, उड़ान हो नई मिल जाए नयेपन की एक मिसाल आपको शुभ हो, मुबारक हो नया साल आपको धरती से मिले धैर्य और अंबर से ऊंचाई पश्चिम से पूर्व तक दे खुशियां ही दिखाई उपहार हर जगह से सदा खास ही मिले उत्तर से भी दक्षिण से भी उल्लास ही मिले चारों दिशा से कर जाए निहाल आपको शुभ हो, मुबारक हो नया साल आपको व्यवहा... »

*परिवर्तन*

सब एकही राहपे चलते हैं आँँखें बंद किए सर झुकाए बस्स एकही बंदा होता हैं आँखे खोलके मूडता हैं वही परिवर्तन लाता हैं »

कुछ ऐसा नया साल हो

हे ईश्वर ! 2021 में ऐसा कुछ कमाल हो , गम सारे मिटे ,हर चेहरे पर मुस्कान हो , चारों तरफ से समृद्धि फैले , खुशहाल मेरा किसान हो कुछ ऐसा नया साल हो (1) कोरोना का कहीं न नाम और न निशान हो , विश्व में सबसे आगे मेरा हिंदुस्तान हो, शौर्य और वीरता का प्रतीक देश का जवान हो, कुछ ऐसा नया साल हो (2) देश में न कहीं बेरोजगारी हो, भ्रष्टाचार मुक्त हर अधिकारी हो, दाग रहित नेता और राजनीति संस्कारी हो, जनकल्याण का ... »

मेरी बेटी

अब मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी 8 महीनेहो गई है कुछ जिद्दी, कुछ नकचढ़ी हो गई है अब मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी 8 महीने हो गई है अब अपनी हर बात मनवाने लगी है हर दिन नई – नई फरमाइशें होती है लगता है कि फरमाइशों की झड़ी हो गई है मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी 8 महीनेहो गई है अगर डांटती हूँ तो हंसती है जब वो हंसती है तो मन को मोह लेती है घर के कोने कोने मे उसकी महक होती है मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी 8 महीनेहो गई है “र... »

Happy Birthday 🎂 To You Maa

मेरी सबसे 👌अच्छी दोस्त मेरी माँ है, मेरी माँ को 🎂 जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ 🎉🎈 ! माँ मुझे नहीं पता कि मैं आपके बच्चे के रूप में कितनी भाग्यशाली हूं, लेकिन मुझे ये पता है की आप मेरे लिए, माँ और अच्छी दोस्त के रूप में बहुत भाग्यशाली हो, लेकिन मैं God ji को हर दिन 👏 धन्यवाद करती हूं, जब भी मुझे आपकी जरुरत हुई है, आप हमेशा आसपास रहे हैं, और मेरे साथ दिया है, आज इस ख़ूबसूरत दिन पर मैं यही दुआ करती ह... »

कलयुग का रावण

– ** कलयुग का रावण -** ********************* हे राम रमापति अजर अमर रावण से ठाना महासमर ले आए जग की जननी को अपनी प्रिय अर्धांगिनी को ..। वह रावण की मर्यादा थी नहीं नजर लगा मान में सीता भी महाकाली थी लंका ढल जाती श्मशान में ..। अब इस भारत में भी हरण रोज ही होते हैं कोई रामकृष्ण नहीं आता अबला नयना रोते हैं ..। रावण दुशासन सिर नहीं कटते वह स्वयं काट ले जाते हैं कहीं पर लाश पड़ी होती है रावण जिंद... »

सच्चे मन से

रावण जलाना ही है तो मन में छिपे रावण को जलाओ। गर तुम से न जले तो सच्चे मन से श्री राम को बुलाओ।। »

अधर्म पे धर्म की विजय

जब जब धर्म अधर्म के चंगुल में फंसा, तब तब इस धरती पे पुरुषोत्तम का जन्म हुआ। अत्याचार से धरती फटी अधर्म से नील गगन, तभी तो दिव्य पुरुष के हाथों अधर्मी का अंत हुआ। बुराई पे अच्छाई की जीत तो एक दिन होना हो था, “ढोल शूद्र पशु नारी” यही अधर्म के कारण पापी का आज अंत हुआ। »

श्री राम जी के नाम एक पाती

विजयादशमी का यह पावन पर्व वर्षों से समाज को सच्चाई का सबक सिखाऐ पर आज यह एक प्रश्न उठाये आज प्रतयंजा कौन चढ़ाऐ कौन बाण आज छुड़ाए इस युग में कोई काबिल नहीं जो रावण का संहार करे आज कोई राम नहीं हर और रावण ही रावण छाऐ दशानन कहलाता ज्ञानी अभिमानी डंके की चोट पर युद्ध को ललकारे आज मानव छद्म वेश धार अपनों के पीठ पीछे वार करे आज मंथरा घर-घर छाई है विभीषण ने ही दुनिया में धूम मचाई है अब राम कैसे आए कोई शब... »

नहीं मरेगा रावण

61-नहीं मरेगा-रावण अहम भाव में बसता हूं मैं कभी न मरता रावण हूं मैं स्वर्ण मृग मारीच बनाकर सीता को भी छलता हूं मैं..। किसे नहीं है खतरा सोचो केवल अपनी सोच रहे हो रावण वृत्ति कभी न मरती यह सुनकर क्यों भाग रहे हो..। दुख का सागर असुर भाव है क्या राम धरा पर आएंगे सुप्त हुए सब धर्म-कर्म जब रावण कैसे मर पाएंगे..। धर्म बहुत होता त्रेता युग तक केवल लंका में रहता कलयुग पाप काल है ऐसा रावण अब घर-घर में बसता... »

“रावण दहन”

दशहरे का रावण सबसे पूछ रहा है हर वर्ष देखा है मैंने स्वयं को दशहरे पर श्रीराम के हाथों से जलते हुये, सभी को बुराई पर अच्छाई की जीत बताते हुये। उस लंकेश को तो मर्यादा पुरुषोत्तम ने मारा था, प्रभु श्रीराम ने उसकी अच्छाईयों को भी जाना था। सभी इकट्ठे होते हैं रावण को जलाने के लिए, दुनिया से पूरी तरह बुराईयों को मिटाने के लिए। आज रावण स्वयं पूरी भीड़ से यह कह रहा है, तुम में से कौन श्रीराम जैसा है यह पू... »

धनुष उठा श्री राम का

धनुष उठा श्री राम का, रावण की अब खैर नहीं चलो आज विजय की बात करें, हो कहीं किसी से,बैर नहीं त्रेता युग में रावण ने, श्री राम को ललकारा था सीता माता का हरण किया, अतएव राम ने मारा था आज के युग में देखो, रावण ही रावण आए हैं तू राम बन, संघार कर संकट के बादल छाए हैं अपने भीतर का राम जगा, भारत में फैला तिमिर भगा नारी पर हुए जुल्मों का, हे युवा, तू ही इंसाफ़ दिला अशोक-वाटिका में भी सीता, रही सुरक्षित उस ... »

हे रावण

हर दौर में अधर्म का प्रारम्भ एक नव-चरण होता रहा l हर एक युग में “हे रावण” तेरा नव-अवतरण होता रहा l हर बार अग्नि परीक्षाओं से गुजरी सीता सती सी नरियाँ , किसी न किसी रूप में औरत का यूँ अपहरण होता रहा l आखों पर पट्टी बांधकर इन्साफ तो तख़्त पर बैठा रहा , भरी सभा में किसी पंचाली का यूँ चीर-हरण होता रहा l हर दौर में भरोसा तोड़कर पीठ में हैं खँजर उतारे गए , हर घर में कोई तो घर का भेदी वभीषण होत... »

सरहद का रखवाला

हम सरहदों पर रहते हैं आज ज़माने से ये कहते हैं भारत माता के वीर सभी हम हमको सभी सरहद का रखवाला कहते हैं। है अगर हिम्मत किसी दुश्मन में तो आकर टक्कर ले हमसे हम भारत को अपने दिल में रखते हैं जज्बा-ए-हिन्दोस्तान लोग इसको कहते हैं। कोई नापाक कदम न आने देंगे इस धरा पर हम आज सर पे कफ़न बाँध कर ये कहते हैं दुश्मन कितना ही शातिर क्यों न हो उसको धुल चाटने की हिम्मत हम रखते है। हम सरहदों पर रहते हैं आज ज़माने ... »

विजयादशमी हम मनाते है

विजयादशमी हम मनाते है पर अपने अंदर के रावण को कहाँ जलाते है ? कटाक्ष कर रही है भगवान श्री राम की सच्चाई और निष्ठा ,रावण जैसे दुराचारी के क्रोध,कपट,कटुता,कलह,चुगली ,अत्याचार | दगा,द्वेष,अन्याय,छल रावण का बना परिवार , आज कहाँ मिलते है माता सीता जैसे निश्छल विचार | वर्तमान का दशानन,यानी दुराचार भ्रष्टाचार , आओ आज दशहरा पर करे,हम इसका संहार | कागज के रावण मत फूँको, जिंदा रावण बहुत पड़े है, अहंकार,आज इ... »

मैं हिन्दी

हिन्द भाषाओं का सागर है l मैं हिन्दी उसमें से एक हूँ , उद्भव मेरी संस्कृत से है l हिन्द की सारी भाषाओं में भाईचारा था l अंग्रेजी ने हमें स्वार्थ के लिए बांटा था l मेरे संस्कार ने आजादी की चिंगारी डाला था l फिर क्या था मैं इतिहास रचने निकल पड़ा था l हिंद की कड़ी बनी, शंखनाद किया आजादी का l मैंने जुल्मों सितम सहा, पर अडिग रहा l आजादी का मंत्र हिंद के जनमानस में फूंका l ऐसे मैंने आजादी का इतिहास रचा ... »

🌹🌹आज पकड़े गए कान्हा🌹🌹

आज पकड़े गए तुम कन्ह। माखन चुराते हुए,’ माखन खाते हुए।। रोज़ खीजते हो तुम रोज़ सताते हो । नटखट बड़े हो तुम कान्हा.🌹……….।। हाथ नहीं आते हो माखन चुराते हो🌷। माखन खाते तो तुम हो कान्हा दूसरों का नाम धराते हो।🌱 नटखट बड़े हो तुम कान्हा .🌴 कितना सताते हो 🙏🌹🌹…तुम हाथ नहीं आते हो माखन चुराते हो आज बताती हूं तुम को मै कान्हा ✨ कैसे माखन चुराते हो देखती हूं कान्हा🙏 यूं मंद मंद ... »

चेतावनी धरती की

हे अज्ञानी मानव,  सुन ले मेरी पुकार, तेरी हूँ मैं पालनहार,  फिर भी तू कड़े है वार l तुमको  शुद्ध आहार दिया,  मुझको प्लास्टिक की पहाड़ दिया, तुझको जीवनदायी पानी दिया, तुमने उसमें जहर मिलाया  l ओजन जैसी प्रहरी दिया, उसको भी कर्म से छेद किया, तुमको खुला आसमान दिया, उसको भी प्रदूषित किया l तुमको मिट्टी की खुशबू दिया,  तुमने कचरे वाली बदबू  फैलाया , जीवन उपयोगी सारी चीजें दिया,तुमने विनाशकारी चीजें बना... »

दम तोड़ती जिंदगी

अचानक से कर्ण में एक ध्वनि गूंजी , देखा तो भीड़ में कोई दम तोड़ रही थी, पालन हार अपनी जिंदगी की जंग लड़ रही थी, कटती अंग – प्रत्यंग के साथ काली घटा छा रही थी, मानों अपनी कातर नजरों से बहुत कुछ कह रही थी, प्राण खोने का भय न था उसमें जरा भी, मानों किसी की तिवान उसे कचोट रही थी, कौन देगा जीवन इस संसार को ? पखेरू कहाँ  ढूंढेगा अपना बसेरा ? बटोही ढूंढेगा छाँव कहाँ ? सुत करेंगे किलोल कहाँ ? ओह !&#... »

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