प्रेम सिर्फ शारीरिक नहीं होता, प्रेम किसी व्यक्ति से नहीं होता, प्रेम व्यक्तित्व से होता है.. इंसान के या अपनों के रवय्ये ( व्यवहार ) से होता है.. किसी की बातो से जब मन को […]
Submission for ‘Poetry on Picture’ Contest
प्रेम सिर्फ शारीरिक नहीं होता, प्रेम किसी व्यक्ति से नहीं होता, प्रेम व्यक्तित्व से होता है.. इंसान के या अपनों के रवय्ये ( व्यवहार ) से होता है.. किसी की बातो से जब मन को […]
तेरे बिना मेरे वजूद की कोई कल्पना तक नहीं … दुनिया भर की खुशियां वार दूँ मैं यारी पर हमारी … ज़िंदगी के सफर में मेरा जब-जब बुरा मक़ाम आया … दोस्ती किसे कहते हैं […]
जीवन मे हर पल को खूबसूरत होने की संभावना है… कब, जब आप आज मे जीना सीख लेंगे, कल मे नहीं….आज मे क्योंकि जीवन ही कुछ क्षणों का एक संग्रह है…. जीवन के अच्छे क्षण […]
प्रेम कभी अपनी जरूरत को यु पूरी करने के लिए नही होता, प्रेम हमेशा एक दूसरे के उन सुख-दुख में साथ, और भावनाओ को समझने के लिए होता है.. !! अब आपको कैसे कहू मैं […]
तुम्हारे भीतर छिपे हुए मैं उन सवालों को पूरा करने लगें , तो समझना कि तुम मेरा ये प्रेम तुम्हारे दर पर दस्तक देने लगा है । और जब उसकी यादें तुम्हें हर बार उसकी […]
कह रहा है मन हमारा क्यों दुखी संसार सारा एक निज स्थल हो ऐसा स्वर्ग से लगता हो प्यारा ना हृदय में वेदना हो ना व्यथित मन साधना हो ना हो कोई रुष्ट हर्षित ना […]
ऊपर वाले ने लिख भेजी, सबकी अलग कहानी है किसी को दिया;गम ए बुढ़ापा, कहीं तड़पती जवानी है किसी को दिया दिनभर कणभर, कहीं आँखों में पानी है तस्वीर नहीं; फुटपाथ वाले, बचपन की यह […]
क्या सही सुना था मैंने, अपना देश था सोने की चिड़िया विश्वगुरु के आसन पर आसीन , ऐसी भी थी घड़ियाँ विचार वसुधैव कुटुंबकम् का, समाया हममें अति बढ़िया उस जमीं; ऐसी तस्वीर हमारी, उजागर […]
दुनिया की अंधाधुंध गाड़ियों की भीड़ में एक नन्हीं सी परी को खड़ा जो देखा पाँव से रुक गए देख कर उसको फिर मन में प्रश्नों का जमावड़ा देखा कैसा ये जीवन कैसी ये पीड़ा […]
दुनिया की अंधाधुंध गाड़ियों की भीड़ में एक नन्हीं सी परी को खड़ा जो देखा पाँव से रुक गए देख कर उसको फिर मन में प्रश्नों का जमावड़ा देखा कैसा ये जीवन कैसी ये पीड़ा […]
परीक्षा हमारी लकिन रात रात भर साथ जागती है वो. कड़ी धूप में ठंडी छांव है वो हर कदम पर साथ खड़ी रहती है वो चोट हमें लगी लेकिन दर्द महसूस पहले करती है वो […]
क्यों बार बार , बेख्याली में भी तेरा ही ख्याल आता है। क्यों बिना धुन के भी ये दिल सारा दिन गुनगुनाता है। क्यों तुम्हारा नाम सुन के हर पल ठहर सा जाता है।
छोटी सी जिंदगी है, हर बात में खुश रहो।। जो चहेरा पास न हो, उसकी आवाज़ में खुश रहो।। कोई रूठा हो तुमसे, उसके उस अंदाज़ में भी खुश रहो।। कल किसने देखा है, कभी […]
आज कुछ लिखने का मन किया ,इस मंजर को देखते एक गुड़िया खुद ही सो गयी, गुड़िया बेचते बेचते सुबह से भूखी प्यासी, बाजार में है खड़ी खड़ी हाथों में एक लम्बे डंडे पर बांधी […]
So, there was a time, not very long ago, And not that much nearer, I remember. When we were carefree; When nothing in the world frightened us, Yet, everything was frightening, huge & new to […]
My fingers, my thumbs run my own little world, you know! They connect me to my peers – my people. The people. They type what my heart shouts, but mouth stays shut. I look at […]
समय भी ना क्या खूब चीज है कभी बहते समुद्र की रेत की तरह तो कभी साइकिल की घूमती पैयों की तरह समय क्या खूब चीज है कभी जीवन का अर्थ समझौता है उसी पैयों […]
कुछ मुरझाइ हुइ कलियो को देखा उनके पास गया तो एहसास हुआ चाहत की खुशबू उनमे अब भी बाकी है। बस आरजू है उन्हे, खिलखिलाहती धूप की मोतियो सी बूंद की, निहारती नजरो की। ये […]
In golden rays of morning light, A world awakes, a splendid sight. The dewdrops dance on petals fair, A gentle breeze whispers through the air. The songbirds sing their sweet refrain, Their melodies a joyful […]
In golden rays of morning light, A world awakes, a splendid sight. The dewdrops dance on petals fair, A gentle breeze whispers through the air. The songbirds sing their sweet refrain, Their melodies a joyful […]
वो जो मस्ुकराई थी कल यहाँ, आज कुछ खामोश सी है। वो जो लड़की बठै ी हैवहाँ,बड़ी प्यारी सी है। रूप सादा ,लि बाज़ सादा , जि सकी ऑखं थोड़ी सी अभी भी नीची है। […]
मैं रहूँ या ना रहूँ मेरे नाम रह जाए धन भले ही ज्यादा न हो पर मान -सम्मान जग -जग में हो तकलीफ भले ही मिले पर जीत का इरादा पक्का हो
प्रकृति की गोद में जन्म लेता जीवन, सौंदर्य से रंचित यह नगरी का आदान। पुष्पों की छांव में होती शांति, हरियाली से भरा, मन को सुखद समान। मछलियाँ तरंगों पर नाचती झूलती, नदियों के संगम […]
चाँदनी की चमक सजे नगरी, सुरमई बादलों की गली में हंसी चमकती है। फूलों की महक से गुलजार बन जाता है, खुशियों का मेला खिलखिलाता नजर आता है। धूप की किरणें होंठों को छू जाती […]
जगमग ज्योति जगा री सजनी, घर – बाहर सब होय उजाला। घनी अमावस की रतिया भी आज,लगे धवल चांदनी वाला।। मिट्टी का दीपक रूई की बाती । सरसों का तेल भर दीया बाती।। मिटे अंधेरा […]
कार्तिक मास अमावस घनेरी प्रकाश पुंज बिखरा तिमिर मिटाने आई है दीप जलें हर घर आंगन में शुभ दीपावली आई है। श्री गणेश लक्ष्मी कुबेर अनुकंपा बरसाते धन्य धन्य पूर्ण कार्य सब करते अंधकार से […]
जलता जाए दीप हमारा। मिट्टी के दीपों में भरकर तेल – तरल और बाती, तिमिर-तोम को दूर भगाने को लौ हो लहराती। मिट जाए भू का अँधियारा जलता जाए दीप हमारा। हो आँधी, तूफान मगर […]
हाँथों में लेकर थाल मेरी इस थाल में भरे गुलाल लगाने आई हूँ, नजरों से नजर मिलाकर तुझे छू कर तुझमे समा कर कुछ इस तरह से होली आज मनाने आई हूँ। मेरे प्रियतम मेरे […]
वासना छोड़े घर मिटे मन कि विकार पूर्व-संस्कार न सताए ऐसा हो होली का त्यौहार ।।1।। जले अगर अग्नि में तो क्रोध व काम पियो वैसी शराब जिसकी नशा न उतरे जिंदगी भर रंगों मन […]
रंगीली होली का आया त्योहार, आओ सब मिलकर मनाएं। सतरंगी रंगों से सराबोर, अबीर-गुलाल लगाएं।। फाल्गुन पूर्णिमा बसंती रंग बरसे, प्रीत के रंग में हिय मन हरसे, भर पिचकारी रंगों की बौछार, होली सब मिलजुल […]
बुरा ना मानो होली है! जोगीरा सा रा रा, होली आई, होली आई. बीत गयी बसंत, लौटी है फिर से फागुन के होली की उमंग. भांग पीकर सब ऐसे मस्त पडे़ है, जैसे दुनिया के […]
आओ कुछ ऐसी होली मनाएं हर चेहरे पर मुस्कान ,हर घर खुशहाली आए छल कपट का इस होली में दहन हो जाए प्रेम रूपी गुलाल हर जन उड़ाएं हर रंग में ऐसा रंग मिले, हर […]
इस बार की होली पर अवगुण जलाये जाएंगे, हर जन मन के हृदय में सद्गुण सजाये जाएंगे। जो रूठ के बैठ गए थे कभी संग साथी अपने, लगाकर गले सब दुःख सन्ताप भुलाए जाएंगे। आएंगे […]
सैंया तेरे साथ खेल को लाई चुनरिया कोरी मैं कौन रंग के साथ रंगोगे, मोहे अबकी होरी में जीवन मिला तोहे पाने को,कितने मौसम बीत गए इंतजार में तेरे प्रीतम नैना मेरे भीग गए अबकी […]
आओ दो बोल सुना जाओ ना, गीत के बोल सुना जाओ ना। हो गए दिन बहुत सुना ही नहीं, अपने उदगार सुना जाओ ना। सूनी सूनी सी फिजायें हैं अब सारी मुरझाई दिशाएं हैं अब, […]
मनोहर शाम है छितरे हुए हैं व्योम में घन टपकती बूँद के अहसास से पुलकित हुआ तन। लग रहे हैं बहुत खुश पेड़-पौधे उग रहे हैं अनेकों बीज दे रहा भानु उनको ताप गगन भी […]
धरती माता कह रही, संकट मे संसार रक्षा हो अस्तित्व की, सब मिल करे विचार धरती माता कह रही, पर्यावरण सुधार अभी समय है कीजिए, मत कीजै संहार धरती माता कह रही, छिद्र हुआ ओजोन […]
धरती माता ! धरती माता ! करूँ माँ कैसे मैं तेरा गुणगान, आज तो निकली जा रही है सबके प्राण | आज हर शै की रौनक जा चुकी है , चारो तरफ उदासी छा चुकी […]
वस्त्रों के बिना नारी शोभा नहीं पाती है धरती को किया नंगी और शरम नहीं आती है कैसे सपूत हो तुम जब मां तड़प रही पीने को शुद्ध पानी ऑक्सिजन नहीं पाती है प्रथ्वी दिवस […]
जब सांसे हो रही है कम ,आओ फिर से वृक्ष लगाएं हम, आओ नमन करे हम वसुधा, को जो मिटाती है हम सबकी क्षुधा को, जो बिना भेदभाव हम सबको पाले,वह भी चाहे पेड़ों की […]
गेंद जैसी गोल धरोहर है अनमोल थकती नहीं दिन रात सूरज के चक्कर लगाती है जीवो को अपने अंचल में बसाती है इसीलिए तो यह धरती माता कहलाती है लेकिन कई दिनो से है यह […]
गेंद जैसी गोल धरोहर है अनमोल थकती नहीं दिन रात सूरज के चक्कर लगाती है सभी जीवो अपने अंचल में बसाती है इसीलिए तो यह धरती माता कहलाती है लेकिन कई दिनो से है बीमार […]
गेंद जैसी गोल धरोहर है अनमोल थकती नहीं दिन रात सूरज के चक्कर लगाती है सभी जीवो अपने अंचल में बसाती है इसीलिए ये हमारी धरती माता कहलाती है लेकिन कई दिनो से है यह […]
सौंप रही है देखो पृथ्वी अपना संरक्षण किन के हाथों में जिनको आता नहीं सहेजना प्राकृतिक संसाधनों को जो ना कर सकते हैं अपनी सुरक्षा वह पृथ्वी की सुरक्षा कैसे कर पाएंगे ! यही सोचकर […]
तू ममतामयी तू जगजननी रहे आँचल तेरा हरा-भरा l तू पालक है प्राणी मात्र की, हे जीवनदायनी वसुंधरा l यह रज जो तेरे दामन की, लगती है शीतल चंदन सी, तू उपासना की पाक ज्योति, […]
पृथ्वी कितनी सुन्दर है हमें यह सब कुछ देती है पुरानी पीढ़ी के अनुभवी हाथ पृथ्वी की रक्षा सुरक्षा के लिए नई पीढ़ी के नन्हें हाथों में पृथ्वी को इस आशा के साथ सौंप रहे […]
पृथ्वी दिवस (22 अप्रैल) स्पेशल ——————————– इन दो हाथों के बीच में पृथ्वी निश्चित ही मुसकाती है पर यथार्थ में वसुंधरा यह सिसक-सिसक रह जाती है जा रही है पृथ्वी अब प्रदूषण के हाथों में […]
आज यह धरती माता,कर रही हम सब से यह पुकार है। मुझसे जन्मा अस्तित्व तेरा,और मुझसे ही यह संसार है।। मत करो क्षरण प्राकृतिक संसाधनों का, रोपो सब मिलकर वृक्ष कई रोशन होगा सबका कुनबा, […]
धरा माँ है हमारी पालती है पोसती है, इसी में जिंदगी सारे सुखों को भोगती है। अन्न रस पहली जरूरत है हमारी जिंदगी की, वायु-जल के बिन कहाँ है कल्पना इस जिन्दगी की। और सबसे […]
अन्न एवम् जल प्रदान करने वाली, वसुन्धरा को नमन्। पृथ्वी के संरक्षण हेतु, आओ उठाऍं कुछ कदम। पृथ्वी पर पवन हो रही अशुद्ध, आओ वृक्ष लगाऍं हम। इस धरा को और भी, हरा बनाऍं हम। […]
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