हर शख्स बस अपने ही ख्याल बुनता है
जिसका जवाब नहीं वही सवाल चुनता है
कोई कैसे कहे वो गुमसुम सा क्यों है
जिसे भी देखिये अपने ही जाल बुनता है
राजेश’अरमान’

हर शख्स बस अपने ही ख्याल बुनता है
जिसका जवाब नहीं वही सवाल चुनता है
कोई कैसे कहे वो गुमसुम सा क्यों है
जिसे भी देखिये अपने ही जाल बुनता है
राजेश’अरमान’