हासिल कुछ भी नहीं नफरतों से
क्यों खेलते हो फिर जज्बातों से
जब इंसा ही इंसा का दुश्मन हो
क्या मिलेगा किसी को इबादतों से
राजेश’अरमान’
हासिल कुछ भी नहीं नफरतों से
क्यों खेलते हो फिर जज्बातों से
जब इंसा ही इंसा का दुश्मन हो
क्या मिलेगा किसी को इबादतों से
राजेश’अरमान’