चारो तरफ अंधेरा ही अंधेरा है
लगता है वहाँ किसी का बसेरा है
फिर वही पुरानी दस्तक
आखिर वहाँ कौन खड़ा है
यह राज कहीं राज न रह जाए
ए शख्स आखिर तू कौन है
अंधेरा


चारो तरफ अंधेरा ही अंधेरा है
लगता है वहाँ किसी का बसेरा है
फिर वही पुरानी दस्तक
आखिर वहाँ कौन खड़ा है
यह राज कहीं राज न रह जाए
ए शख्स आखिर तू कौन है