करुँ कितना भी श्रिंगार पर जानती हूँ
तेरे आगे कुछ भी नहीं हूँ मैं
दीद जिस दिन नहीं होती तेरी
चांद छत पर नहीं आता
आईना जितनी दफ़ा देखूँ
तेरा ही चेहरा नज़र आता
करुँ कितना भी श्रिंगार पर जानती हूँ
तेरे आगे कुछ भी नहीं हूँ मैं
दीद जिस दिन नहीं होती तेरी
चांद छत पर नहीं आता
आईना जितनी दफ़ा देखूँ
तेरा ही चेहरा नज़र आता