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Wybór odpowiedniego kasyna online może być nie lada wyzwaniem. Z tysiącami dostępnych opcji, łatwo wpaść w pułapkę reklam lub zwodniczych informacji. Warto poświęcić czas na analizę i zrozumienie, co powinno kierować naszymi decyzjami przed zarejestrowaniem […]
Online casinos have transformed how players experience gambling. With advancements in technology, players now enjoy a range of games from the comfort of their homes, but online casinos also offer another enticing aspect that can […]
समय सब को प्यारा है, लेकिन खुद का
नींद अवसाद को… कुछ सहेजे हुए गीत गाती हूं मैं शांत कमरे में ही गुनगुनाती हूं मैं। व्यर्थ व्यापक समय नष्ट तुम पर किया नींद, अवसाद को घर बुलाती हूं मैं। साथ अंतिम समय तक […]
सच्चे मित्र की तलाश में , मैं इस तह तक जा लिया | सच्चा मित्र खोजते – खोजते खुद को ही पा लिया ||
वोट लेने आए नेता हमको जीता दो अपनी भी समस्याएँ सारी हमको बता दो लाऊँगा मै विकास आप सबके घरों में मुझको उस विकास का बस पता बता दो. पंकज बिंदास
महादेव शिव भोले की है, महारात्रि भक्तों आई, पावन दिन माँ गौरी जी हैं, अपने पति शिव को पाई, शिवत्व शिखर चेतना का है, क्यों न सभी हम पा जाएँ, कर कठिन तपस्या गौरी सी, […]
कभी कसमें खिलाती थी मुझे ना दूर जाना तुम सदा ही साथ में रह के महक बन फूल जाना तुम मगर मजबूरियाँ कैसी जुदा जो हो गए पल में लिखा ख़त में मुझे अंतिम कि […]
ये उदासी कौन्सी चिड़िया है ? इसका घोंसला कहाँ है ? ये कहीं रहती भी है ? या बस उड़े ही जा रही है ? पर कहाँ जा रही है ? क्या इधर आ रही […]
हाय ओ चन्द्रमा ! तू है कितना खूबसूरत , समाई है तुझमें जाने कितने हज़ारों की मूरत। रौशनी तेरी जगती है मुझे सारी रात , तेरी इस आभा ने दी है नरलोक को मात। चकोर […]
पर्यावरण पर मुक्तक (1) प्रकृति के साथ समझौता न करता आज का मानव पेड़ पर्वत काट अतिशय मगन मन मनराज का मानव । कामना की असि प्रबल काटत स्वयं निज वंश लोभी चांद तारों की […]
थर-थर कॉंप उठी थी धरती, रूह थम गई थी अंग्रेजों की। ऐसी थी वो रानी लक्ष्मी, अपनी झाॅंसी के वीरों की। जन्मी जब प्रकृति ने भी शीश झुकाया था, माथे पर तेज देख उसके हर […]
आज फिर मुलाकात हुई उससे, किसी और के ज़रिए, किसी की बातों में उसका ज़िक्र आया। किसी ने फिर से खोल के रखी उसकी बातें। किसी ने फिर याद दिलाया वो पुराना फलसफा। किसी ने […]
मैं कहाँ था कहाँ से कहाँ आ गया मैं जंहा था जहां से जंहा खो दिया मंजिल थी मेरी कहि और पर पर में खोया की मुझको पता ही न चला मैं पथिक था जिस […]
अँधेरा होने से पहले आ जाओ इतने प्यार से बुलाया है आ जाओ जख़्म पे मरहम ना लगाओ ना सही जख़्म को हरा करने ही आ जाओ।
तेरी आँखों में देखकर मैं दुनिया भूल जाता हूँ तेरी तस्वीर को देखकर मैं बेख्याल हो जाता हूँ
1 मेरे दिल से खिलवाड़ ना कर.. मैं तूफान का जलजला हूँ मुझसे प्यार ना कर.. 2 बढ़ती उम्र के साथ जिद समझौतों में बदल जाती है 3 इस चेहरे से तुमको प्यार नहीं है…!!!! […]
उसके होंठों को जब तुमने प्यार से चूमा होगा । ❤ खयाल एक पल को मेरा भी तो आया होगा । ❤
मिट्टी से दीये बनते हैं और उजाले मन के अंधेरों को दूर करते हैं
अरे! कभी तो तारीफ़ कर दे इस नामाकूल की! हर दफ़ा क्या तू मजम्मत ही करता रहेगा!!!!
कितनी कोशिश की सबके दिल में समाने की वक्त आने पर सभी ने जुर्रत की मुँह छुपाने की
वह कैसी तलवार कि जिसमें धार नहीं है कौन कहेगा सिन्धु जहाँ मझधार नहीं है, सिर्फ ताप के लिए जले वह ज्वाला कैसी आँखों से न बरसे तो अंगार नहीं है । अनिल मिश्र प्रहरी।
नाम है अनेक तेरे कण कण मे आप हो देखना बस एक झलक, सांसो में आलाप हो मैं कलंकित शंकित हूँ जरा, गंगाधर आप हो मन से मेरे भवभय हरो, हर हर विश्वनाथ ओ। सभी […]
आजकल थोड़ा खफा सा रहता है जग रहा मगर सोया सा रहता है पर जाने क्या है मजबूरी उसकी वो बैठा हुआ थका सा रहता है । अशोक बाबू माहौर
हो रहा विमुख-सा मन, न इच्छा बची ना चाह। यह उम्र का पड़ाव, सच में इरादों को छीन-हीन, कर ही देता है। वह पहले सा उत्साह, मर ही जाता है। वो रंग-बिरंगे सपने, धुंधले पर […]
बारिश की बूंदें सहला गईं प्रकृति का अंग अंग हरियाईं उपेक्षित शिलाएं अहिल्या जन्मी राम जी के पदन्यास से ०८.०२.२०२२
किताबें और कलम होती हैं हमारी मार्गदर्शिका* हमारे जीवन में निभाती है महत्वपूर्ण भूमिका* ताउम्र हम सीखते हैं इनसे, ये हैं हमारी विरासत मानव विकास के लिए हैं सर्वोपरि दिग्दर्शिका* –✍️एकता गुप्ता *काव्या* उन्नाव उत्तर […]
मत करना वो बात कि जिससे ठेस लगे सचमुच में, प्रेम ही जीवन, प्रेम ही सब कुछ, प्रेम-बोल हो मुख में। वो होते हैं सच्चे साथी साथ रहें जो दुख में, जो हों दुःख में […]
नजर हो यदि कभी टेढ़ी विधाता की तुम्हारे पर, उन्हें बस हाथ जोड़े तुम जरा प्रणाम कर लेना, सभी कुछ आपका ही है यही कह सिर झुका लेना।
मेहनत रंग लाती है हमें मंजिल दिलाती है, बिना मेहनत किसी के पास कोई चीज आती है।
चींटी को देखिए कितनी है अदभुत अनोखी हैं टांगें आंखें हैं अदभुत। अस्तित्व उसका ईश्वर ने सजाया चींटी का संसार रब ने बनाया।
हृदय देह के जीवित रहने में सहायक एक अंग मात्र नहीं है..!! अपितु, यह वो स्थान है जहाँ प्रस्फुटित होते हैं उन कोमल भावनाओं के अंकुर.., जो बनाती हैं एक साधारण मनुष्य को देवतुल्य..!! ख़्याल […]
गा रहे गीत ये विहग प्यारे न जाने कौन सी हैं भाषाएं मस्त हैं खेलते हैं आपस में न कोई गम न कोई आशाएं।
हमारी जिन्दगी का सफर बड़े आराम से कट रहा है क्योकिं ———————- अब हम परवाह नहीं करते कि कोई क्या कहता है।
नहीं सम्भल पाये हम ना जुल्फों को ही सम्भाला, मेरी कलम ने इस बीच कितनों को बेआबरू कर डाला।
वो न जाने क्यों अपना लगता है, कभी बीते कल में देखा सपना लगता है। तुम कुछ भी कहो गाओ बजाओ, लेकिन मुझे सबसे अच्छा राम का नाम जपना लगता है।
अन्दर की बातें बाहर करने वाले नजरों से गिर जाते हैं, बस एक कलम है जिससे मोहब्बत बढ़ती जाती है।
प्रेम से अधिक प्रिय कोई एहसास नहीं जो इसे नहीं समझते उनसे प्रेम की आस नहीं। बसाया कभी था जिसको ह्रदय में, अब उसी को मेरे प्रेम का एहसास नहीं।😥😥
वो शीतलता का आनन्द नहीं समझते हैं जो नफरत की आग लगाया करते हैं।
जीवन की सुंदरता को कहाँ वो जानते हैं ?? जो स्वयं से अधिक किसी और को पहचानते हैं।
मातृ भाषा दिवस हिंदी दिवस की, सभी को हार्दिक शुभकामनाएं
तुम्हारी तरह खूबसूरत, हरियाली, खुशहाली चारों तरफ, खिली हुई है, प्रेम की हवा चल रही है, दर्द की दवा बन रही है, यूँ ही दिखते रहना नजरों के सामने ही रहना ऐसा कह रही है।
उम्मीद छोड़ कर तुम थक हार कर न बैठो जब तक न पा सको तुम तब तक न हार बैठो। पाने का यदि इरादा सचमुच रखोगे मन में, पा लोगे मन की मंजिल तुम आजमा […]
बात छोटी सी है, मगर मुश्किल बड़ी है, बहू बेटी दोनों बराबर, किस अंतर से छोटी बड़ी है। दोनों इज्जत ही तो है अपने घराने की, जिद सी क्यों है अहम दिखाने की। ये बात […]
यूँ तो ख़ामोशियों की कोई ज़ुबान नहीं होती लेकिन… प्रेम में ख़ामोशियों को समझना बहुत मायने रखता है l अगर एक दूजे की ख़ामोशियों को भी नहीं समझ पाए तो…. लफ्ज़ तो लफ्ज़ हैं, कितना […]
ढलता अंधेरा और काली सी महिला बाजार किनारे खड़ी, हाथों में थैला अजनवी थी मगर कुछ अलग था चेहरे में जैसे खुशी खड़ी हो उदासी के पहरे में बढ़ने लगा तो आवाज आई कहाँ तक […]
देखकर मुस्कुराते भी नही क्या इतना बुरा हो गया हूं मैं हर बार आप-आप कहती हो सच्ची, इतना बड़ा हो गया हूं मैं बचपन मे तो छोटी रजाई इतनी लंबी बातें थी तेरी अपने पैरों […]
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