रोक सके मनुज को कोई,
धरती पे न ऐसा लाल हुआ,
जो चाहा मनुज ने पाया है,
संकट से बेड़ा पार हुआ,
मिट पाए ना कोई मिटा सके,
ऐसी छवि रचने वाली है,
हो प्रचंड ललकती ज्वाला सी,
वो आग दहकने वाली है।
रोक सके मनुज को कोई,
धरती पे न ऐसा लाल हुआ,
जो चाहा मनुज ने पाया है,
संकट से बेड़ा पार हुआ,
मिट पाए ना कोई मिटा सके,
ऐसी छवि रचने वाली है,
हो प्रचंड ललकती ज्वाला सी,
वो आग दहकने वाली है।