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आप भले जग भला

आप भले तो जग भला का,
आलाप रटते सुबह और शाम।
बड़ी बड़ी करके बातें ज्ञानचंद,
बैठ कर ठेके पर पीते जाम।।

✍महेश गुप्ता जौनपुरी

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