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आसमा

ज़मी पर जब भी गिरूँ आसमां से उठाने आता है,
सोये हुए ख्वाबों को वो मेरे रोज़ जगाने आता है,

दिखता किसी को नहीं ढूंढते सब हैं ठिकाने उसके,
एक वो है जो राही को हर रस्ता दिखाने आता है,

वहीं खड़ा हो जाता हूँ जहाँ से कुछ नज़र आता नहीं मुझे,
हाथ उसका अँधेरे से मुझे रौशनी में दिखाने आता है।।

राही अंजाना

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