तेरा इन्तजार करू, तेरा एतबार करू लेकिन
कब तक बता यू ही सुबह से शाम करू !
तेरे बिना राहे चलती नहीं मेरी लेकिन
कब तक बता यू ही मंजिल-ऐ-राह को बदनाम करू!
‘निसार’

तेरा इन्तजार करू, तेरा एतबार करू लेकिन
कब तक बता यू ही सुबह से शाम करू !
तेरे बिना राहे चलती नहीं मेरी लेकिन
कब तक बता यू ही मंजिल-ऐ-राह को बदनाम करू!
‘निसार’