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इन्तजार….

तेरा इन्तजार करू, तेरा एतबार करू लेकिन
कब तक बता यू ही सुबह से शाम करू !

तेरे बिना राहे चलती नहीं मेरी लेकिन
कब तक बता यू ही मंजिल-ऐ-राह को बदनाम करू!
‘निसार’

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